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इस सरकारी बैंक में 6 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है सरकार, खुदरा निवेशक सस्ते भाव में कल खरीद सकेंगे शेयर

बैंक में इस हिस्सेदारी को कम करने से बैंक ऑफ महाराष्ट्र 25 प्रतिशत की न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता शर्त को पूरा करने में सक्षम हो जाएगा, क्योंकि सरकारी हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से कम हो जाएगी।

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Image Source : FREEPIK बैंक ऑफ महाराष्ट्र में सरकार के पास है 79.60 प्रतिशत हिस्सेदारी

सरकार ने 2492 करोड़ रुपये जुटाने के लिए आज बैंक ऑफ महाराष्ट्र की बिक्री पेशकश (ओएफएस) शुरू कर दी। ये बिक्री पेशकश गैर-खुदरा निवेशकों के लिए 54 रुपये प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य पर शुरू की गई है। सरकार इस सरकारी बैंक में 6 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर लगभग 2492 करोड़ रुपये जुटाएगी। शेयर बिक्री के विवरण-पत्र के अनुसार, ओएफएस बुधवार को खुदरा निवेशकों के लिए खुलेगा। बैंक ऑफ महाराष्ट्र के ओएफएस के लिए न्यूनतम मूल्य 54 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया गया है, जो बीएसई पर सोमवार के बंद भाव 57.66 रुपये प्रति शेयर से 6.34 प्रतिशत कम है। मंगलवार को बैंक ऑफ महाराष्ट्र के शेयर 57.61 रुपये के भाव पर बंद हुए।

बैंक ऑफ महाराष्ट्र में सरकार के पास है 79.60 प्रतिशत हिस्सेदारी

आधार प्रस्ताव में 38,45,77,748 शेयर शामिल हैं, जो बैंक की चुकता शेयर पूंजी का 5 प्रतिशत है। इसके अलावा 7,69,15,549 शेयर या एक प्रतिशत हिस्सेदारी ‘ग्रीन-शू’ विकल्प के तहत उपलब्ध है। इससे इसका कुल आकार 46.14 करोड़ शेयर या 6 प्रतिशत हिस्सेदारी बैठती है। सरकार के पास पुणे स्थित इस सरकारी बैंक में अभी 79.60 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बैंक में इस हिस्सेदारी को कम करने से बैंक ऑफ महाराष्ट्र 25 प्रतिशत की न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता शर्त को पूरा करने में सक्षम हो जाएगा, क्योंकि सरकारी हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से कम हो जाएगी। ये भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड द्वारा जारी प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) नियमों के अनुरूप है। 

4 अन्य सरकारी बैंकों में भी हिस्सेदारी बेचेगी सरकार

नियमों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों सहित सभी लिस्टेड कंपनियों में कम से कम 25 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरधारिता अनिवार्य है। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सीपीएसई और सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को अगस्त 2026 तक छूट दी है। इसके अलावा, सरकार की चार अन्य चार बैंकों- इंडियन ओवरसीज बैंक (94.6 प्रतिशत), पंजाब एंड सिंध बैंक (93.9 प्रतिशत), यूको बैंक (91 प्रतिशत) और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (89.3 प्रतिशत) में हिस्सेदारी न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता सीमा से काफी ज्यादा है। 

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