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भारत में कितने दिनों का पेट्रोल-डीजल बाकी, कोटा लागू करने पर क्या है सरकार का प्लान

पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल पुराने दामों पर ही बिक रहे हैं।

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Image Source : INDIA TV भारत में कितने दिनों का पेट्रोल-डीजल बाकी

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पूरी दुनिया तेल और गैस की भारी किल्लत का सामना कर रही है। हालांकि, भारत में हालात काफी हद तक काबू में हैं। तेल और गैस से जुड़े भीषण संकट के बावजूद भारत के फ्यूल सप्लाई में राशनिंग करने यानी कोटा लागू करने की कोई योजना नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने सोमवार को ये जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश ने कच्चे तेल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार बना रखा है और सप्लाई से जुड़े रिस्क को मैनेज करने के लिए आयात के स्रोतों में विविधता आई है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने कहा, ''घबराने की जरूरत नहीं है। पर्याप्त आपूर्ति है। राशनिंग जैसा कुछ नहीं हो रहा है और न ही ऐसा होगा।'' 

भारत में कितने दिनों का पेट्रोल-डीजल बाकी

नीरज मित्तल ने बताया कि बाजार में पिछले 67 दिनों से जारी व्यवधान के दौरान भारत ने लगभग 60 दिनों का ईंधन (पेट्रोल और डीजल) भंडार और लगभग 45 दिनों का एलपीजी भंडार बना रखा है। ये टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल, डीजल और एलपीजी संरक्षण और आयात कम करने के आह्वान के एक दिन बाद आई। प्रधानमंत्री ने बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए नागरिकों से ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग और सोने की खरीद में संयम बरतने का आग्रह किया था। प्रधानमंत्री के इस बयान को कुछ लोग ईंधन की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी की भूमिका के रूप में देख रहे थे। 

कीमतों और सप्लाई को स्थिर रखना सरकार की प्राथमिकता

पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल पुराने दामों पर ही बिक रहे हैं। लागत में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी के बावजूद कीमतों को स्थिर रखने से पेट्रोलियम कंपनियों को रोजाना 1,000 करोड़ से 1,200 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। हालांकि, सरकार के एक टॉप सूत्र ने कहा, ''सरकार का प्राथमिक लक्ष्य तेल और गैस की कीमतों तथा सप्लाई को स्थिर रखना है।'' मित्तल ने कहा कि सरकार ने अतिरिक्त ऊर्जा कार्गो हासिल किए हैं और मौजूदा आपूर्तिकर्ताओं से खरीद बढ़ाई गई है। साथ ही पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती जैसे राजकोषीय उपायों के जरिये कीमतों के झटके को खुद सहा है।

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