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IDFC First Bank में ₹590 करोड़ का फ्रॉड, हरियाणा सरकार के खाते में हेराफेरी, RBI एक्टिव

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने सोमवार को कहा कि बैंक के कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की मिलीभगत के जरिए हरियाणा सरकार के खातों से जुड़ी 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड को अंजाम दिया गया।

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Image Source : IDFC FIRST BANK इतने बड़े फ्रॉड को कैसे दिया गया अंजाम

प्राइवेट सेक्टर के IDFC First Bank में हुए 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड की खबर सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। इस फ्रॉड की वजह से सोमवार को बैंक के शेयरों में 20 प्रतिशत तक की भारी गिरावट देखने को मिली, जिसकी वजह से निवेशकों के 14,000 करोड़ रुपये डूब गए। ये फ्रॉड तब सामने आया, जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने बैंक बैलेंस और अकाउंट रिकॉर्ड में दिखाई गई रकम के बीच अंतर की शिकायत दर्ज कराई। जांच में सामने आया कि ये फ्रॉड, बैंक की पूरी तिमाही की कमाई से भी ज्यादा है। आइए जानते हैं कि आखिर आईडीएफसी बैंक में ये इतना बड़ा फ्रॉड कैसे हुआ और इसे किसने अंजाम दिया।

बैंक फ्रॉड को किसने दिया अंजाम

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने सोमवार को कहा कि बैंक के कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की मिलीभगत के जरिए हरियाणा सरकार के खातों से जुड़ी 590 करोड़ रुपये के फ्रॉड को अंजाम दिया गया। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने रविवार को खुलासा किया था कि उसके कर्मचारियों और अन्य लोगों द्वारा हरियाणा सरकार के खातों में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। शेयर बाजार खुलने से पहले निवेशकों और जानकारों के लिए आयोजित एक 'कॉन्फ्रेंस कॉल' में वैद्यनाथन ने कहा कि धोखाधड़ी के परिणामस्वरूप और किसी भी तरह के दबाव को पहले से ही पहचानने की अपनी नीतियों के अनुरूप बैंक कुछ प्रावधान करेगा। 

हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को समिति से किया बाहर

हरियाणा सरकार ने कथित धोखाधड़ी के आरोपों के मद्देनजर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ-साथ आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को भी सरकारी कार्यों के लिए अपनी समिति से बाहर (डी-एम्पैनल्ड) कर दिया है। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने कथित तौर पर धोखाधड़ी से खाते खोलने के मामले में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया है। वैद्यनाथन ने बताया कि सलाहकार कंपनी केपीएमजी द्वारा किया जा रहा स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट 4 से 5 हफ्तों में पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, '' हमने केपीएमजी को कल (रविवार) ही इसके लिए नियुक्त किया है। मेरी समझ के अनुसार ऐसी प्रक्रियाएं आमतौर पर चार-पांच सप्ताह लेती हैं।'' 

इतने बड़े फ्रॉड को कैसे दिया गया अंजाम

वी. वैद्यनाथन ने कहा कि बैंक ने करीब 590 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का आकलन किया है, जिसमें 490 करोड़ रुपये मिलान (रिकंसिलिएशन) के बाद पहचाने गए और अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये आंतरिक जांच के दौरान स्वयं चिन्हित किए गए। उन्होंने संकेत दिया कि ये राशि आगे बढ़ने के आसार नहीं है। वैद्यनाथ ने कहा, ''हमने ये आंकड़ा वर्तमान आकलन के आधार पर जारी किया है । हमें इसमें आगे कोई बड़ा बदलाव होने के आसार नजर नहीं आते।'' उन्होंने बताया कि वसूली और 35 करोड़ रुपये का ''कर्मचारी बेईमानी बीमा'' कवर, बैंक पर प्रभाव को कम कर सकता है। वैद्यनाथन ने इस प्रकरण को फर्जी भौतिक चेक लेनदेन के जरिए कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की ''मिलीभगत'' का मामला बताते हुए कहा कि ये मुद्दा एक इकाई और एक ग्राहक समूह तक सीमित था। ये किसी प्रणालीगत 'रिपोर्टिंग' त्रुटि का मामला नहीं है। 

पुलिस में दर्ज हुआ मामला

उन्होंने कहा कि बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, नियामकों और लेखा परीक्षकों को सूचित किया है तथा बैंकिंग सिस्टम में वसूली एवं 'लियन-मार्किंग' की कार्रवाई शुरू की है। 'लियन-मार्किंग', बैंक या किसी वित्तीय संस्थान द्वारा खाते की एक निश्चित राशि को अस्थायी रूप से 'फ्रीज' (ब्लॉक) करने की प्रक्रिया है। वैद्यनाथन ने बताया कि हेराफेरी की राशि हरियाणा सरकार से जुड़े जमा बैंक की कुल जमाओं का लगभग 0.5 प्रतिशत है, जबकि केंद्र एवं राज्य इकाइयों सहित कुल सरकारी जमाएं जमा आधार का 8 से 10 प्रतिशत हैं।

पूरे मामले पर भारतीय रिजर्व बैंक की नजर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने सोमवार को कहा कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले से जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और इसमें कोई प्रणालीगत समस्या नहीं है।

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