1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. कच्चा तेल $90 के पार रहा तो आपकी EMI और कर्ज हो सकते हैं महंगे, UBI की रिपोर्ट में दी गई चेतावनी

कच्चा तेल $90 के पार रहा तो आपकी EMI और कर्ज हो सकते हैं महंगे, UBI की रिपोर्ट में दी गई चेतावनी

रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि वैश्विक तनाव, इनपुट लागत, कच्चे तेल की कीमतें और समग्र कमोडिटी ट्रेंड पर सतर्क नजर रखना होगा, क्योंकि ये कारक भविष्य में महंगाई और मौद्रिक नीति दोनों को प्रभावित करेंगे।यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब RBI महंगाई को 4% के लक्ष्य के करीब लाने की कोशिश कर रहा है।

FY26 में WPI महंगाई 0.70 प्रतिशत रही, जबकि FY27 में इसके 5 प्रतिशत से ऊपर रहने का अनुमान है।- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK FY26 में WPI महंगाई 0.70 प्रतिशत रही, जबकि FY27 में इसके 5 प्रतिशत से ऊपर रहने का अनुमान है।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो बढ़ते महंगाई दबाव के चलते ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है। यानी आपकी ईएमआआई या कर्ज लेना महंगा पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल ब्याज दरों को लेकर लंबी अवधि तक स्थिरता (पॉज) का रुख बरकरार रहने की उम्मीद जताई गई है, लेकिन महंगाई और वैश्विक कमोडिटी कीमतों की दिशा इस रुख को बदल सकती है।

महंगाई के रुझानों पर लगातार नजर 

रिपोर्ट के अनुसार, इस समय बैंक ब्याज दरों में स्थिरता के अपने अनुमान पर कायम हैं और महंगाई के रुझानों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर टिकती हैं, तो दरों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) को लेकर रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई तेज़ी से बढ़ सकती है और 4.5 प्रतिशत के स्तर से ऊपर बनी रह सकती है। इसके पीछे ऊंची इनपुट लागत और वैश्विक अनिश्चितताओं को प्रमुख कारण बताया गया है।

रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर

इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक ने 8 अप्रैल को जारी मौद्रिक नीति समीक्षा में FY27 की पहली बैठक के दौरान रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा। केंद्रीय बैंक ने इस फैसले के पीछे वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों को अहम वजह बताया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई में तेजी के संकेत पहले ही दिखने लगे हैं। FY26 में WPI महंगाई 0.70 प्रतिशत रही, जबकि FY27 में इसके 5 प्रतिशत से ऊपर रहने का अनुमान है।

मार्च 2026 में थोक मुद्रास्फीति बढ़ी

मासिक आधार पर मार्च 2026 में थोक मुद्रास्फीति महंगाई बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो फरवरी में 2.13 प्रतिशत और पिछले साल इसी महीने 2.25 प्रतिशत थी। इस उछाल की मुख्य वजह ईंधन कीमतों में तेज बढ़ोतरी रही। ईंधन महंगाई, जो पिछले महीने -3.64 प्रतिशत थी, बढ़कर 6.24 प्रतिशत हो गई और अनुमान से अधिक रही। हालांकि, खाद्य महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रण में रही और सालाना आधार पर 1.86 प्रतिशत पर स्थिर बनी रही, जिसका कारण सब्जियों की कीमतों में नरमी रहा। वहीं, कोर महंगाई भी बढ़कर 4.31 प्रतिशत हो गई, जो पिछले महीने 3.91 प्रतिशत थी।

आने वाले महीनों में महंगाई पर आ सकता है दबाव

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष जैसे वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल सहित अन्य कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी आने वाले महीनों में महंगाई पर और दबाव डाल सकती है। आगे के लिए बैंक ने कहा है कि वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति, इनपुट लागत, कच्चे तेल की कीमतों और समग्र कमोडिटी ट्रेंड पर करीबी नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि यही कारक भविष्य में महंगाई की दिशा और मौद्रिक नीति के फैसलों को तय करेंगे।

Latest Business News