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पहली बार लेने जा रहे लोन, इन 6 गलतियों से जरूर बचें

पर्सनल लोन अनसिक्योर्ड होने के कारण बैंक या एनबीएफसी अधिक ब्याज वसलूते हैं। लोन लेने से पहले रिसर्च जरूर करना चाहिए।

Loan- India TV Hindi
Image Source : FILE लोन

अगर आपको किसी कारण से पैसे की तुरंत जरूरत है और आप पर्सनल लोन लेने की योजना बना रहे हैं तो जरा ठहरें। आपको लोन लेने से पहले कई बातों को जानना जरूरी है। अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो एक साथ कई गलती कर बैठेंगे और बाद में पछताने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। पहली दफा लोन लेने वाले को किन गलतियों से बचना चाहिए, हम आपको बता रहे हैं। 

पहली दफा लोन लेने वाले अक्सर करते हैं ये 6 गलती 

  1. फिक्स्ड vs रिड्यूसिंग समझे बिना चुनाव करना: पहली दफा लोन लेने वालों को किस ब्याज दर पर लोन लेना है, नहीं पता है। वो फिक्स्ड vs रिड्यूसिंग समझे बिना लोन लेते हैं और अधिक ईएमआई का भुगतान करते हैं। बता दें कि फिक्स्ड रेट में ब्याज दर और EMI पूरी लोन अवधि तक एक जैसी रहती है। इसमें ब्याज की गणना पूरे लोन अमाउंट पर की जाती है, जिससे कुल भुगतान थोड़ा ज्यादा होता है। वहीं, रिड्यूसिंग रेट में ब्याज की गणना हर EMI भुगतान के बाद बची हुई लोन राशि (प्रिंसिपल) पर की जाती है, जिससे हर महीने ब्याज घटता जाता है और कुल भुगतान कम होता है। रिड्यूसिंग रेट में EMI की राशि धीरे-धीरे कम हो सकती है या बैंकों के अनुसार बदल भी सकती है। 
  2. सही लेंडर का चयन नहीं करना: सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोन लेने में हमेशा सही लेंडर की पहचान करें। आज के समय में बहुत सारे युवा मोबाइल ऐप के जरिये लोन ले लेते हैं। ये लोग आसान और कम समय में जरूर लोन देते हैं लेकिन बैंकों के मुकाबले मोटा ब्याज वसूलते हैं। कई 40 से 50 प्रतिशत तक ब्याज लेते हैं। इससे लोन लेने वाला व्यक्ति फंस जाता है। इससे बचने के लिए हमेशा एक अच्छे बैंक से लोन लें। 
  3. ब्याज दरों की तुलना नहीं करना: पर्सनल लोन अनसिक्योर्ड होने के कारण बैंक या एनबीएफसी अधिक ब्याज वसलूते हैं। लोन लेने से पहले रिसर्च जरूर करना चाहिए। ऐसा कर कम ब्याज पर लोन देने वाले बैंक आप ढूंढ सकते हैं। इससे ईएमआई का बोझ कम हो जाएगा। 
  4. हिडेन चार्ज पता नहीं करना: लोन लेने से पहले लगने वाले हिडेन चार्ज जरूर पता करें। कुछ लेंडर हिडेन चार्ज लगाते हैं, इनमें प्रोसेसिंग शुल्क, लोन पर बीमा और अन्य शामिल हो सकते हैं। प्रोसेसिंग शुल्क अनिवार्य हैं, लेकिन वे एक बैंक से दूसरे बैंक में भिन्न होते हैं, और लोन पर बीमा स्वैच्छिक है और इसे केवल तभी खरीदा जाना चाहिए जब आप चाहें।
  5. प्री-पेमेंट की जानकारी नहीं लेना: कई बैंक लोन को समय से पहले चुकाने पर प्रीमेंट चार्ज लेते हैं। यह लोन की रकम पर निर्भर करता है। इसलिए पता करें कि कौन बैंक क्या चार्ज ले रहा है। कई बैंक प्रीमेंट की सुविधा ही नहीं देते हैं। इसलिए सारी जानकारी मिलने के बाद ही किस बैंक या एनबीएफसी से लोन लेना है, उसका चयन करें।
  6. EMI कैलकुलेशन नहीं करना: पहली दफा लोन लेने वाले ईएमआई कैसे चुकाना है ये नहीं सोचते हैं। बाद में वो लोन चुकाने में फंसा हुआ महसूस करते हैं या डिफाल्ट करते हैं। ऐसा करने से उनका क्रेडिट स्कोर खराब होता है। इसलिए लोन लेने से पहले EMI कैलकुलेशन जरूर करें। यानी आप ईएमआई का भुगतान कैसे करेंगे, इसकी तैयारी पहले कर लें। 

 

 

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