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ट्रंप की टैरिफ बढ़ोतरी से भारत की हुई बल्ले-बल्ले, इस कारण अब होगी लाखों करोड़ की बचत

कच्चा तेल यानी क्रूड ऑयल दो दिनों में करीब 14% टूट चुका है। ब्रेंट क्रूड का भाव 63.93 डॉलर पर आ चुका है।

US President Donald Trump and PM Narendra Modi- India TV Hindi
Image Source : FILE अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम नरेंद्र मोदी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ बढ़ोतरी से दुनियाभर के देशों में खलबली मची हुई है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। ट्रंप ने भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इससे भारतीय कंपनियों की मुश्किल बढ़ेगी। उनके सामान अमेरिका में महंगे होंगे, जिससे उनका कारोबार प्रभावित हो सकता है। इसका असर भारत के निर्यात पर भी होगा। भारतीय सामान की मांग घटने से निर्यात गिरेगा। हालांकि, यह फौरी आकलन है। भारत और अमेरिका ट्रेड डील करने पर बात कर रहे हैं। जल्द ही दोनों देशों में सहमति बन सकती है। इस बीच ट्रंप के फैसले से भारत को दो बड़े फायदे हो गए हैं। पहला क्रूड ऑयल यानी कच्चा तेल सस्ता होने से भारत को बड़ी बचत होगी। वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपया तेजी से मजबूत हुआ है। ये दोनों बदलाव भार​त के हित में है। इससे भारत के लाखों करोड़ बचेंगे। 

दो दिनों में करीब 14% तक टूटा कच्चा तेल 

कच्चा तेल यानी क्रूड ऑयल दो दिनों में करीब 14% टूट चुका है। ब्रेंट क्रूड का भाव 63.93 डॉलर पर आ चुका है। क्रूड का यह दाम अगस्त 2021 के बाद सबसे निचले स्तर पर है। WTI टूटकर 60 डॉलर के करीब पहुंच चुका है। गोल्डमैन सैक्स ने इस साल ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत के लिए अपने पूर्वानुमान को 5.5% घटाकर 69 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। इसका फायदा भारत को मिलेगा क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 85% क्रूड ऑयल करता है। 

घट सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम 

भारत ने वित्त वर्ष 2022-23 में कच्चे तेल के आयात पर 232.7 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2023-24 में 234.3 अरब डॉलर खर्च किए। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है और ये अपनी कच्चे तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए 85 प्रतिशत से ज्यादा आयात पर निर्भर है। अब जब कच्चा तेल की कीमत में बड़ी गिरावट आ गई तो इससे भारत को लाखों करोड़ की बचत होगी। इससे व्यापार घाटा कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही महंगाई को काबू रखना संभव होगा। आने वाले दिनों में सरकार पेट्रोल और डीजल के दाम घटाकर आम आदमी को तोहफा दे सकती है। 

रुपया हुआ मजबूत, डॉलर लुढ़का 

ट्रंप के ट्रेड वॉर शुरू करने से भारत को दूसरा फायदा रुपये के रूप में मिला है। हाल के दिनों में डॉलर तेजी से कमजोर हुआ है और रुपया मजबूत हुआ है। आपको बता दें कि दिसंबर से फरवरी के दौरान रुपया निचले स्तर पर पहुंचने के बाद अब मार्च से उल्लेखनीय रिकवरी आई है। डॉलर के मुकाबले रुपया 0.44 फीसदी मजबूत हुआ है। 

रुपया मजबूत होने से तेल से लेकर जरूरी इलेक्ट्रिक सामान और मशीनरी के साथ मोबाइल-लैपटॉप समेत अन्य गैजेट्स आयात करना सस्ता होगा। रुपया कमजोर होने के कारण इन वस्तुओं का आयात पर अधिक रकम चुकाना पड़ रहा था। इसके चलते भारतीय बाजार में इन वस्तुओं की कीमत में बढ़ोतरी हो रही है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसका भुगतान भी डॉलर में होता है और डॉलर के महंगा होने से रुपया ज्यादा खर्च हो रहा था। अब रुपया मजबूत होने से महंगाई में भी कमी आएगी। 

 

 

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