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भारत का निर्यात जनवरी में 0.61% बढ़कर 36.56 अरब डॉलर हुआ, व्यापार घाटा 3 महीने के उच्चस्तर पर

चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 10 महीनों यानी अप्रैल-जनवरी अवधि के दौरान देश का कुल निर्यात 2.22 प्रतिशत बढ़कर 366.63 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 7.21 प्रतिशत बढ़कर 649.86 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

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Image Source : PIXABAY वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में बढ़त का रुझान

देश का निर्यात जनवरी में 0.61 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 36.56 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि, व्यापार घाटा भी बढ़कर तीन महीने के उच्चस्तर 34.68 अरब डॉलर पर पहुंच गया। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में ये जानकारी दी गई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सोने और चांदी के आयात में तेज उछाल के कारण जनवरी में आयात 19.2 प्रतिशत बढ़कर 71.24 अरब डॉलर हो गया, जो चालू वित्त वर्ष में अभी तक का उच्चतम स्तर है। जनवरी में सोने का आयात 349.22 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर रहा, जबकि चांदी का आयात 127 प्रतिशत बढ़कर 2 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान स्विट्जरलैंड से सोने का आयात 836.85 प्रतिशत बढ़कर 3.95 अरब डॉलर का रहा।

कच्चे तेल के आयात में गिरावट

हालांकि, जनवरी में कच्चे तेल का आयात 0.24 प्रतिशत घटकर 13.4 अरब डॉलर पर आ गया। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 10 महीनों यानी अप्रैल-जनवरी अवधि के दौरान देश का कुल निर्यात 2.22 प्रतिशत बढ़कर 366.63 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 7.21 प्रतिशत बढ़कर 649.86 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इन 10 महीनों में देश का कुल व्यापार घाटा यानी आयात एवं निर्यात के बीच का अंतर 283.23 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले की समान अवधि में 247.38 अरब डॉलर था। 

वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में बढ़त का रुझान

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इन आंकड़ों पर कहा कि वस्तुओं और सेवाओं दोनों के निर्यात में बढ़त का रुझान देखा जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस रुझान को देखते हुए वित्त वर्ष 2025-26 में वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल निर्यात 860 अरब डॉलर को पार कर सकता है। वित्त वर्ष 2024-25 में ये 825 अरब डॉलर था। उन्होंने कहा, "सेवाओं के निर्यात में हम चालू वित्त वर्ष में पहली बार 410 अरब डॉलर से ज्यादा का आंकड़ा पार कर जाएंगे।" वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, जनवरी में सेवाओं का निर्यात 43.90 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो पिछले साल जनवरी में 34.75 अरब डॉलर था। इस दौरान सेवाओं का आयात 19.60 अरब डॉलर रहने का अनुमान है जो पिछले साल जनवरी में 16.71 अरब डॉलर था। 

उच्च अमेरिकी टैरिफ की वजह से प्रभावित हुआ वैश्विक व्यापार

अमेरिका की तरफ से लगाए गए उच्च टैरिफ के कारण वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अगस्त से भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था, जिससे परिधान जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के निर्यात पर असर पड़ा। हालांकि, अमेरिका ने 7 फरवरी से 25 प्रतिशत टैरिफ हटा लिया है और दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता होने के बाद बाकी 25 प्रतिशत जवाबी टैरिफ को भी घटाकर 18 प्रतिशत हो जाएगा। पिछले महीने पेट्रोलियम, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, लौह अयस्क, समुद्री उत्पाद और कॉफी के निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। 

एमएसएमई के लिए अलग निर्यात नीति की मांग

हालांकि, चाय, चावल, मसाले, चमड़ा एवं चमड़ा उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, रसायन, परिधान एवं प्लास्टिक के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई। परिधान निर्यात प्रोत्साहन परिषद के चेयरमैन ए. शक्तिवेल ने कहा कि उन्होंने आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा से मुलाकात कर एमएसएमई क्षेत्र के लिए अलग निर्यात नीति की मांग की है। निर्यातक संगठनों के महासंघ फियो के अध्यक्ष एस.सी. रल्हन ने उम्मीद जताई कि लगातार नीतिगत समर्थन और नए मुक्त व्यापार समझौतों के तहत बाजार पहुंच बेहतर होने से भारत की निर्यात वृद्धि की गति बरकरार रहने की उम्मीद है। 

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