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संसद के शीतकालीन सत्र में पेश हो सकता है बीमा संशोधन विधेयक, इंश्योरेंस में 100% FDI को मिलेगी अनुमति

वित्त मंत्री ने इस साल के बजट भाषण में, नई पीढ़ी के वित्तीय क्षेत्र सुधारों के तहत बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा को मौजूदा के 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा था।

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Image Source : FREEPIK बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा को 74 से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देने वाला बीमा संशोधन विधेयक संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। संसद का शीतकालीन सत्र आमतौर पर नवंबर के आखिर में शुरू होता है और क्रिसमस से पहले समाप्त होता है। जब उनसे पूछा गया कि क्या बीमा क्षेत्र में एफडीआई को और उदार बनाने वाला विधेयक आगामी शीतकालीन सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है, तो उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है।’’ 

बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा को 74 से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव

वित्त मंत्री ने इस साल के बजट भाषण में, नई पीढ़ी के वित्तीय क्षेत्र सुधारों के तहत बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा को मौजूदा के 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा, ‘‘ये बढ़ी हुई सीमा उन कंपनियों के लिए उपलब्ध होगी जो अपना पूरा प्रीमियम भारत में निवेश करती हैं। विदेशी निवेश से जुड़ी मौजूदा सुरक्षा और शर्तों की समीक्षा की जाएगी और उन्हें सरल बनाया जाएगा।’’ अब तक, बीमा क्षेत्र ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के माध्यम से 82,000 करोड़ रुपये आकर्षित किए हैं। वित्त मंत्रालय ने बीमा अधिनियम, 1938 के विभिन्न प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसमें बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ाकर 100 प्रतिशत करना, चुकता पूंजी में कमी और एक समग्र लाइसेंस का प्रावधान शामिल है।

बीमा अधिनियम में किया जाएगा संशोधन

एक व्यापक विधायी प्रक्रिया के तहत, जीवन बीमा निगम अधिनियम-1956 और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम-1999 में बीमा अधिनियम-1938 के साथ-साथ संशोधन किया जाएगा। एलआईसी अधिनियम में संशोधनों का प्रस्ताव है कि इसके बोर्ड को शाखा विस्तार और भर्ती जैसे परिचालन संबंधी निर्णय लेने का अधिकार दिया जाए। प्रस्तावित संशोधन मुख्य रूप से पॉलिसीधारकों के हितों को बढ़ावा देने, उनकी वित्तीय सुरक्षा बढ़ाने और बीमा बाजार में अधिक कंपनियों के प्रवेश को सुगम बनाने पर केंद्रित हैं, जिससे आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। 

भारत में फिलहाल कुल 59 बीमा कंपनियां 

वर्तमान में, भारत में 25 जीवन बीमा कंपनियां और 34 गैर-जीवन या साधारण बीमा कंपनियां हैं, जिनमें एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड और ईसीजीसी लिमिटेड जैसी विशिष्ट साधारण बीमा कंपनियां शामिल हैं। बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा पिछली बार 2021 में 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत की गई थी। 2015 में, सरकार ने बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत कर दी थी।

पीटीआई इनपुट्स के साथ

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