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इंश्योरेंस कंपनी को देने होंगे 8.06 करोड़ रुपये, क्लेम रिजेक्ट करने के मामले में कंज्यूमर कोर्ट ने दिया आदेश

मुंबई के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ई-मेल रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि विक्टोरिनॉक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने सर्वेयर द्वारा मांगे गए डॉक्यूमेंट्स उपलब्ध कराए थे।

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Image Source : FREEPIK सांकेतिक तस्वीर

मुंबई के जिला कंज्यूमर कोर्ट ने विक्टोरिनॉक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के फायर इंश्योरेंस क्लेम को गलत तरीके से रिजेक्ट करने के मामले में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को 8.06 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान करने का आदेश दिया है। विक्टोरिनॉक्स इंडिया के गोदाम में 16 फरवरी, 2019 को आग लग गई थी, जिसमें वहां रखा काफी सामान जलकर खाक हो गया था।

सर्वेयर ने किया था 8.06 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन

इंश्योरेंस कंपनी द्वारा नियुक्त किए गए सर्वेयर ने 8.06 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया था। न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने जनवरी, 2021 में कुछ आंतरिक समझौते और चालान उपलब्ध नहीं कराने का हवाला देते हुए विक्टोरिनॉक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का क्लेम रिजेक्ट कर दिया था। 

स्विट्जरलैंड की विक्टोरिनॉक्स AG की सब्सिडरी कंपनी है विक्टोरिनॉक्स इंडिया

इंश्योरेंस कंपनी की शिकायत करने वाली कंपनी विक्टोरिनॉक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, स्विट्जरलैंड की विक्टोरिनॉक्स AG की स्वामित्व वाली सब्सिडरी कंपनी है। ये कंपनी भारत में अपनी पैरेंट कंपनी द्वारा बनाए गए ट्रैवल बैग, चाकू, लग्जरी घड़ियां, कटलरी और अन्य कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट, इंपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन का काम करती है। विक्टोरिनॉक्स इंडिया ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से 'स्टैंडर्ड फायर एंड स्पेशल पेरिल्स पॉलिसी' ली थी।

विक्टोरिनॉक्स इंडिया ने उपलब्ध कराए थे सर्वेयर द्वारा मांगे गए सभी डॉक्यूमेंट्स 

इस मामले में मुंबई के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ई-मेल रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि विक्टोरिनॉक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने सर्वेयर द्वारा मांगे गए डॉक्यूमेंट्स उपलब्ध कराए थे और उसके सवालों का जवाब देने के लिए ऑनलाइन मीटिंग्स में भी हिस्सा लिया था। 

जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में क्या कहा

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा कि नुकसान का आकलन हो जाने और उस पर किसी पक्ष द्वारा विवाद नहीं किए जाने के बावजूद सिर्फ प्रक्रियागत और तकनीकी आधार पर क्लेम रिजेक्ट करना अनुचित और कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं था। 

मानसिक परेशानी और मुकदमे में खर्च हुआ पैसा भी चुकाएगी इंश्योरेंस कंपनी

कंज्यूमर कोर्ट ने इंश्योरेंस कंपनी को शिकायत दायर किए जाने की तारीख से दावे की राशि पर 9 प्रतिशत ब्याज के साथ मानसिक परेशानी के लिए 50,000 रुपये और मुकदमा खर्च के तौर पर 50,000 रुपये का भुगतान 45 दिन के भीतर करने का आदेश दिया है। 

PTI Inputs

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