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ईरान युद्ध के चलते LPG संकट गहराने की आशंका, 14.2 Kg के सिलेंडर में 10 किलो गैस देने पर हो रहा विचार!

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को आशंका है कि अचानक इस तरह की कटौती से उपभोक्ताओं में भ्रम फैल सकता है और विरोध या राजनीतिक दबाव भी बढ़ सकता है। बावजूद इसके, अधिकारियों का मानना है कि अगले कुछ हफ्तों में सप्लाई की स्थिति और खराब हो सकती है, जिससे ऐसे फैसले लेना मजबूरी बन सकता है।

एलपीजी की उपलब्धता दबाव में है। खाड़ी देशों से नई खेप नहीं पहुंच रही है।- India TV Hindi
Image Source : PIXABAY एलपीजी की उपलब्धता दबाव में है। खाड़ी देशों से नई खेप नहीं पहुंच रही है।

आने वाले दिनों में आपको 14.2 किलोग्राम गैस वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर में महज 10 किलोग्राम गैस ही मिल सकती है। देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ईरान युद्ध के कारण सप्लाई बाधित होने और देश में एलपीजी भंडार तेजी से घटने के बीच यह कदम उठाने की तैयारी कर रही हैं। economictimes की खबर के मुताबिक, कंपनियों की इस प्लानिंग के तहत 14.2 किलो के सिलेंडर में सिर्फ 10 किलो गैस भरकर सप्लाई की जा सकती है, ताकि सीमित स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके। इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह कदम मौजूदा संकट से निपटने के लिए जरूरी हो सकता है। 

सिलेंडरों पर नए स्टिकर लगाए जाएंगे

खबर के मुताबिक, कंपनियों का आकलन है कि जहां 14.2 किलो का सिलेंडर एक औसत परिवार में 35-40 दिन चलता है, वहीं 10 किलो गैस भी करीब एक महीने तक जरूरत पूरी कर सकती है। इससे उपलब्ध गैस को अधिक घरों में बांटा जा सकेगा। अगर इस योजना पर अमल किया जाता है, तो सिलेंडरों पर नए स्टिकर लगाए जाएंगे, जिनमें कम मात्रा की स्पष्ट जानकारी होगी। साथ ही, उपभोक्ताओं को कीमत में भी आनुपातिक राहत दी जाएगी। हालांकि, इसके लिए बॉटलिंग प्लांट्स में तकनीकी बदलाव और नियामकीय मंजूरियां लेना जरूरी होगा।

एलपीजी की उपलब्धता पहले ही दबाव में है। खाड़ी देशों से नई खेप नहीं पहुंच रही है और पिछले सप्ताह केवल दो जहाज- करीब 92,700 टन एलपीजी लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर पाए, जो देश की सिर्फ एक दिन की खपत के बराबर है। वहीं, कमर्शियल उपभोक्ताओं को आंशिक रूप से सप्लाई बहाल करने से भी दबाव और बढ़ गया है।

उपभोक्ताओं को फिलहाल नियमित सप्लाई मिल रही

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने हाल ही में एलपीजी सप्लाई को चिंता जताते हुए कहा कि गैस का संरक्षण जरूरी है। इसके बावजूद उनका कहना है कि उपभोक्ताओं को फिलहाल नियमित सप्लाई दी जा रही है। पहले कमर्शियल सेक्टर की सप्लाई रोकी गई थी, जिसे अब युद्ध-पूर्व स्तर के 40% तक बहाल किया गया है। देश में कुल एलपीजी खपत करीब 93,500 टन प्रतिदिन है, जिसमें से 80,400 टन यानी 86% खपत घरेलू क्षेत्र की है। मार्च के पहले पखवाड़े में कुल खपत में 17% की गिरावट दर्ज की गई, जो यह दिखाता है कि असर अब व्यापक स्तर पर दिखाई दे रहा है।

एलपीजी की 90% सप्लाई खाड़ी देशों से

बता दें, भारत अपनी एलपीजी जरूरत का करीब 60% आयात करता है, जिसमें से ईरान युद्ध से पहले लगभग 90% सप्लाई खाड़ी देशों से आती थी। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य शिपिंग के लिए बंद रहता है, तो ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। फिलहाल, भारत के छह एलपीजी टैंकर पर्शियन गल्फ में फंसे हुए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने का इंतजार कर रहे हैं। इससे आने वाले दिनों में सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और गहरा गई है।

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