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''1 लीटर डीजल पर 18.9 रुपये और पेट्रोल पर 6 रुपये का नुकसान''- पहली तिमाही में तेल कंपनियों को भारी घाटा

ICICI सिक्योरिटीज के मुताबिक, पिछले दो वित्तीय वर्ष में पेट्रोल मार्जिन 2024-25 की तीसरी तिमाही में 12 रुपये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।

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Image Source : PTI कम कीमत पर बिक्री की वजह से कंपनियों को 75,000 करोड़ रुपये का नुकसान

देश की तमाम ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही काफी खराब गुजरी है। अप्रैल-जून तिमाही में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को रिटेल में बेचे गए प्रत्येक लीटर डीजल पर 18.9 रुपये और एक लीटर पेट्रोल पर 6 रुपये का नुकसान हुआ। ब्रोकरेज फर्म आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के मुताबिक तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम रहीं।

पिछले साल तेल कंपनियों ने की थी बंपर कमाई

एक साल पहले, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एक लीटर डीजल पर 8.2 रुपये और पेट्रोल पर 10.3 प्रति लीटर की कमाई की थी। ब्रोकरेज फर्म ने बताया कि इसकी तुलना में, जून 2024 तिमाही में रिटेल मार्जिन डीजल पर 2.5 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर 4.4 रुपये प्रति लीटर था। लेकिन, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और रिफाइंड फ्यूल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर घरेलू कीमतों पर पूरी तरह नहीं दिखा, जिससे रिटेल मार्जिन नेगेटिव हो गया।

कम कीमत पर बिक्री की वजह से कंपनियों को 75,000 करोड़ रुपये का नुकसान

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा था कि OMCs को जून तक की तिमाही में पेट्रोल, डीजल, लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और जेट फ्यूल को बाजार दरों से कम कीमत पर बेचने के कारण लगभग 75,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। रिफाइनरी गेट पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों के हिसाब से तय होती हैं। इसके बाद OMCs, पंप पर बिक्री के लिए तेल की कीमतें तय करने के लिए ढुलाई, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की लागत, डीलर कमीशन और रिटेल मार्जिन जोड़ती हैं।

2024-25 की तीसरी तिमाही में 1 लीटर पेट्रोल पर हुई थी 12 रुपये की कमाई

जब घरेलू पंप पर मिलने वाले तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के साथ नहीं बढ़ती हैं, तो रिटेल मार्जिन कम हो जाता है, जैसा कि जून तिमाही के दौरान हुआ। इसी तरह, जब अंतरराष्ट्रीय ईंधन की कीमतें गिरती हैं लेकिन पंप कीमतें वैसी ही रहती हैं, तो रिटेल मार्जिन बढ़ जाता है। इसलिए, रिटेल मार्जिन तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों के ट्रेंड के साथ घटता-बढ़ता रहता है। ICICI सिक्योरिटीज के मुताबिक, पिछले दो वित्तीय वर्ष में पेट्रोल मार्जिन 2024-25 की तीसरी तिमाही में 12 रुपये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था, जबकि डीजल मार्जिन 2025-26 की पहली तिमाही में 8.2 रुपये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।

तेल कंपनियों ने 4 साल तक की मोटी कमाई

साल 2022 की शुरुआत में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें बहुत बढ़ गई थीं, OMCs ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों के हिसाब से नियमित रूप से रिटेल कीमतें बदलने का तरीका छोड़ दिया। पिछले चार सालों में पंप की कीमतों में बहुत कम बदलाव किए गए हैं, जिससे कंपनियों को वैश्विक तेल की कीमतें गिरने पर ज्यादा मार्जिन कमाने का मौका मिला है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने पर उन्हें कम या नेगेटिव मार्जिन का सामना करना पड़ा है।

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