पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण खाद संयंत्रों के लिए प्राकृतिक गैस की कीमतों में 60 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ने की संभावना है। संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति लाइन में रुकावट आने से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति, इसकी मांग के मुकाबले 80 प्रतिशत तक सीमित हो गई है। प्राकृतिक गैस अमोनिया बनाने के लिए एक मुख्य तत्व है। इस कमी को पूरा करने के लिए उर्वरक कंपनियां हाजिर या मौजूदा बाजार से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) खरीद रही हैं। पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर उर्वरक विभाग की संयुक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा कि देश के पास आने वाले खरीफ मौसम में कृषि मांग को पूरा करने के लिए उर्वरक का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
खरीफ 2026 के लिए 3.9 करोड़ टन उर्वरक की जरूरत का अनुमान
उन्होंने कहा, ''मौजूदा स्थिति एक संवेदनशील स्थिति है, जिससे हमने बहुत ही रणनीतिक तरीके से निपटा है।'' उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र जो भारत की यूरिया की 20-30 प्रतिशत, डीएपी की 30 प्रतिशत और एलएनजी की 50 प्रतिशत जरूरतों को पूरा करता था, वो अभी भी प्रभावित है। जिसके कारण एलएनजी, अमोनिया और सल्फर जैसी आदान की लागत में बढ़ोतरी हुई है, साथ ही माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ गया है। घरेलू यूरिया उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। हालांकि, इसके प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों की कुल आवश्यकता लगभग 3.9 करोड़ टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल ये 3.61 करोड़ टन थी। उन्होंने बताया कि मौजूदा स्टॉक का स्तर लगभग 1.8 करोड़ टन है, जो पिछले साल इसी अवधि के 1.47 करोड़ टन से ज्यादा है।
यूरिया संयंत्रों के लिए बढ़ाई गई गैस की आपूर्ति
घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए, यूरिया संयंत्रों को गैस की आपूर्ति, जिसे शुरू में घटाकर लगभग 60 प्रतिशत कर दिया गया था, अब वैकल्पिक व्यवस्थाओं के माध्यम से बढ़ाकर 75-80 प्रतिशत तक कर दिया गया है। इससे उत्पादन बढ़ा है और उत्पादन में होने वाला नुकसान कम हुआ है। उन्होंने कहा कि कमी को हाजिर बाजार से एलएनजी खरीदकर पूरा किया जा रहा है। खाद संयंत्रों की हर दिन 5.2 करोड़ मानक घन मीटर गैस की जरूरत में से, लगभग 1.5 करोड़ मानक घन मीटर गैस हाजिर बाजार से खरीदी जा रही थी। उन्होंने कहा कि हाजिर खरीदारी 19.5-19.6 डॉलर प्रति इकाई की दर से की गई है, जबकि संकट से पहले के दौर में ये दर 11-12 डॉलर प्रति इकाई थी।
किसानों के लिए घबराने की कोई जरूरत नहीं
हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों को मौजूदा कीमतों पर खाद-उर्वरक उपलब्ध कराती रहेगी और कहा कि अभी कोई तत्काल कमी या घबराने की जरूरत नहीं है। फीडस्टॉक की ज्यादा लागत से सब्सिडी का बिल बढ़ जाएगा, लेकिन किसानों को यूरिया 266 रुपये प्रति 45 किलोग्राम और डीएपी का 50 किलोग्राम का बैग 1,350 रुपये में मिलता रहेगा। उन्होंने बताया कि 1.8 करोड़ टन के मौजूदा स्टॉक में से 62 लाख टन यूरिया, 23.3 लाख टन डीएपी और 56 लाख टन पी एंड के उर्वरक हैं।
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