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MSMEs को मिलेगा आसान लोन, एंबिट फिनवेस्ट ने की इस बैंक से साझेदारी, जानें डिटेल

एंबिट फिनवेस्ट का कहना है कि यह पार्टनरशिप सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को लोन तक एक्सेस आसान बनाएगा। कंपनी इस पार्टनरशिप के जरिये, एमएसएमई के व्यापक क्षेत्र तक पहुंचने की तैयारी में हैं।

यह पार्टनरशिप एम्बिट फिनवेस्ट के लिए चौथा सह-ऋण गठबंधन है।- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK यह पार्टनरशिप एम्बिट फिनवेस्ट के लिए चौथा सह-ऋण गठबंधन है।

 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को लोन मिलना आसान होने जा रहा है। दरअसल, एम्बिट समूह की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) शाखा एम्बिट फिनवेस्ट ने मंगलवार को कहा कि उसने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को लोन देने के लिए  के साथ पार्टनरशिप की है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, यह पार्टनरशिप एम्बिट फिनवेस्ट के लिए चौथा सह-ऋण गठबंधन है, इससे पहले यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सिडबी और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के साथ इसी तरह की साझेदारी की जा चुकी है।

यह पार्टनरशिप आरबीआई के सह-ऋण ढांचे के मुताबिक

खबर के मुताबिक, यह व्यवस्था भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सह-ऋण ढांचे के मुताबिक है, जिसका मकसद प्रायोरिटी वाले क्षेत्र में लोन फ्लो को बढ़ावा देने के लिए बैंकों और एनबीएफसी की संयुक्त शक्तियों का लाभ उठाना है। यह रणनीतिक गठबंधन एम्बिट फिनवेस्ट को डीसीबी बैंक की मजबूत बैलेंस शीट का लाभ उठाने में सक्षम बनाएगा ताकि अधिक प्रतिस्पर्धी, मिश्रित ब्याज दरों पर सुरक्षित व्यावसायिक ऋण प्रदान किया जा सके।

लोन पाने में चुनौतियां होंगी कम

एम्बिट फिनवेस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) संजय अग्रवाल ने कहा कि इस पार्टनरशिप के जरिये, हमारा लक्ष्य एमएसएमई के व्यापक क्षेत्र तक पहुंचना है, जिनमें से कई को पर्याप्त लोन हासिल करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

किसको मिलता है एमएसएमई लोन

एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) लोन कई तरह के व्यवसायों के लिए बैंकों द्वारा ऑफर किया जाता है। इनमें मुख्य रूप से विनिर्माण, व्यापार या सेवा क्षेत्र के व्यवसाय शामिल हैं। पात्र होने के लिए, व्यवसायों को आम तौर पर एमएसएमई के रूप में रजिस्टर्ड होना जरूरी है। साथ ही वैलिड उद्यम पंजीकरण प्रमाणपत्र होना चाहिए, और टर्नओवर, लाभप्रदता और क्रेडिट स्कोर से संबंधित कुछ मानदंडों को भी पूरा करना चाहिए।

एमएसएमई को तीन कैटेगरी में बांटा गया है

माइक्रो: प्लांट और मशीनरी या उपकरण में निवेश 2.5 करोड़ रुपये से अधिक नहीं और वार्षिक कारोबार 10 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है तो उसे माइक्रो कैटेगरी में रखा जाता है।
स्मॉल: प्लांट और मशीनरी या उपकरण में निवेश, जिसमें 25 करोड़ रुपये से अधिक नहीं और वार्षिक कारोबार 100 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है तो उसे स्मॉल कैटेगरी में रखा जाता है।
मीडियम: प्लांट और मशीनरी या उपकरण में निवेश 125 करोड़ रुपये से अधिक नहीं और वार्षिक कारोबार 500 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है तो वह मीडियम कैटेगरी के एमएसएमई में आते हैं। 

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