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NCLT ने नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के खिलाफ दिवाला याचिका की खारिज, जानें क्या है पूरा मामला

ETSL ने 15 जनवरी, 2016 को नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के साथ हुए 'बस ऑपरेटर' समझौते से जुड़े लगभग 7.09 करोड़ रुपये के परिचालन बकाये का दावा करते हुए लॉ ट्रिब्यूनल का रुख किया था।

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Image Source : PTI नोएडा मेट्रो

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने एम्पायर ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड की नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRC) के खिलाफ दायर दिवाला याचिका को खारिज कर दिया। NCLT ने पाया कि सेवा गुणवत्ता, अनुबंधीय दायित्वों और भुगतान कटौती को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से ही विवाद जारी है। एनसीएलटी की इलाहाबाद पीठ ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) की धारा-9 के तहत नोएडा मेट्रो के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू करने की याचिका को अस्वीकार कर दिया।

नोएडा मेट्रो पर 7.09 करोड़ रुपये के परिचालन बकाये का दावा

एम्पायर ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (ETSL) ने 15 जनवरी, 2016 को नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के साथ हुए 'बस ऑपरेटर' समझौते से जुड़े लगभग 7.09 करोड़ रुपये के परिचालन बकाये का दावा करते हुए लॉ ट्रिब्यूनल का रुख किया था। समझौते के अनुसार, ETSL को नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच 100 लो-फ्लोर एसी सीएनजी बसें चलानी थीं। लेकिन, कंपनी ने 100 के बजाय सिर्फ 50 बसें ही सर्विस में लगाई थीं। ईटीएसएल ने बाकी 50 बस चलाने के लिए नोएडा मेट्रो से संपर्क किया, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। 

NMRC और ETSL के बीच हुए समझौते में क्या थे प्रावधान

समझौते के अनुसार, नोएडा मेट्रो को बिल प्राप्त होने के एक हफ्ते के भीतर 50 प्रतिशत भुगतान और अगले 15 दिन में बाकी भुगतान करना था। समझौते में ये भी प्रावधान था कि भुगतान में देरी होने पर नोएडा मेट्रो को प्रतिदिन 9 प्रतिशत की चक्रवृद्धि ब्याज दर से भुगतान करना होगा। ETSL ने आरोप लगाया कि उसने 25 अप्रैल, 2019 से 16 मार्च, 2020 के बीच कई 'बिल' दिए, लेकिन उन्हें नोएडा मेट्रो से कोई भुगतान नहीं मिला। इसके बाद उसने आईबीसी की धारा-8 के तहत नोटिस जारी किया और चूक (डिफॉल्ट) का दावा करते हुए परिचालन ऋणदाता के रूप में याचिका दायर की। 

नोएडा मेट्रो ने अपने पक्ष में क्या कहा

नोएडा मेट्रो की ओर से सीनियर वकील सुनील फर्नांडीस, अभिषेक प्रसाद और कौशलेंद्र नाथ सिंह ने दलील दी कि आईबीसी के तहत कोई भुगतान चूक नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि एम्पायर ट्रांसपोर्ट ने कॉन्ट्रैक्ट के अनुरूप सेवाएं देने में बार-बार विफलता दिखाई और कई उल्लंघन किए, जिनके संबंध में कई कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए। ये नोटिस इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एम्पायर ट्रांसपोर्ट द्वारा दायर रिट याचिका में भी प्रस्तुत किए गए थे, जिसे 14 जुलाई, 2021 को खारिज कर दिया गया था और इसके बाद विवाद में मध्यस्थता कार्यवाही शुरू की गई थी। 

एनसीएलटी ने अपनी सुनवाई में क्या कहा

नोएडा मेट्रो का पक्ष सुनने के बाद एनसीएलटी की दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि ये विवाद सिर्फ भुगतान न होने का नहीं, बल्कि सेवा की गुणवत्ता और अनुबंध के तहत किए गए उल्लंघनों को लेकर गंभीर मतभेदों का है। लॉ ट्रिब्यूनल ने कहा कि नोएडा मेट्रो ने सेवा में कई कमियों को लेकर कई कारण बताओ नोटिस जारी किए थे, जिनमें जीपीएस और यात्री सूचना प्रणाली की खराबी, टूटी हुई विंडशील्ड, विकलांगों के लिए रैंप की खराब स्थिति, स्टॉप बटन का काम न करना, अपर्याप्त बस तैनाती, एयर कंडीशनिंग की समस्याएं और ईपीएफ व ईएसआई जैसे वैधानिक अनुपालन में कमी शामिल हैं। 

क्यों खारिज हुई ETSL की याचिका

उच्चतम न्यायालय के 'मोबिलॉक्स इनोवेशन्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम किरूसा सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड' से जुड़े फैसले का हवाला देते हुए एनसीएलटी ने दोहराया कि अगर मांग नोटिस जारी होने से पहले वास्तविक विवाद मौजूद हों, तो दिवाला आवेदन स्वीकार नहीं किया जा सकता। एनसीएलटी ने कहा कि सेवा मानकों, अनुबंधीय प्रदर्शन, दंडात्मक कटौती और खातों के मिलान से जुड़े मतभेद स्पष्ट रूप से आईबीसी के तहत "पूर्व-विद्यमान विवाद" की श्रेणी में आते हैं। आशीष वर्मा और प्रवीण गुप्ता की पीठ ने कहा, ''अतः धारा 5(6) के तहत वास्तविक एवं पूर्व-विवाद के अस्तित्व को देखते हुए धारा-9 के तहत दायर वर्तमान आवेदन स्वीकार करने योग्य नहीं है और इसे खारिज किया जाता है।'' 

पीटीआई इनपुट्स के साथ

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