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2024 में करोड़पतियों की संख्या हुई तेज, भारत में अरबपतियों की तादाद में आया ये बदलाव

भारतीय अरबपतियों की कुलमिलाकर संपत्ति 950 अरब अमेरिकी डॉलर आंकी गई है, जो अमेरिका (5.7 खरब अमेरिकी डॉलर) और मेनलैंड चीन (1.34 खरब अमेरिकी डॉलर) के बाद वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है।

भारत में 2019 में अरबपतियों की संख्या सिर्फ 7 थी।- India TV Hindi
Image Source : FILE भारत में 2019 में अरबपतियों की संख्या सिर्फ 7 थी।

भारत में करोड़पतियों की संख्या साल 2024 में बढ़ गई। नाइट फ्रैंक के मुताबिक, 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की संपत्ति वाले भारतीय भारतीय उच्च-निवल-मूल्य वाले व्यक्तियों (एचएनडब्ल्यूआई) की संख्या बीते साल 6 प्रतिशत बढ़कर 85,698 हो गई। पीटीआई की खबर के मुताबिक, ग्लोबल एसेट कंसल्टेंट नाइट फ्रैंक ने बुधवार को अपनी 'द वेल्थ रिपोर्ट 2025' जारी की, जिसमें भारत में बढ़ते करोड़पतियों के आंकड़े बताए गए। नाइट फ्रैंक का यह भी अनुमान है कि 2028 तक यह संख्या बढ़कर 93,753 हो जाने की उम्मीद है, जो भारत के बढ़ते धन परिदृश्य को दर्शाता है।

भारत में अब 191 अरबपति

खबर के मुताबिक, भारतीय उच्च-निवल-मूल्य वाले व्यक्तियों की आबादी का बढ़ता ट्रेंड देश की मजबूत दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि, बढ़ते निवेश अवसरों और विकसित हो रहे लग्जरी बाजार को उजागर करती है, जो भारत को वैश्विक धन सृजन में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करती है। भारत की अरबपतियों की आबादी में भी 2024 में साल-दर-साल मजबूत वृद्धि देखी गई है। कंसल्टेंट फर्म ने कहा कि भारत में अब 191 अरबपति हैं, जिनमें से 26 पिछले साल ही इस कैटेगरी में शामिल हुए हैं, जबकि 2019 में यह संख्या सिर्फ 7 थी।

संयुक्त संपत्ति 950 अरब अमेरिकी डॉलर

भारतीय अरबपतियों की संयुक्त संपत्ति 950 अरब अमेरिकी डॉलर आंकी गई है, जो अमेरिका (5.7 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर) और मेनलैंड चीन (1.34 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर) के बाद वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है। नाइट फ्रैंक इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि भारत की बढ़ती संपत्ति इसकी आर्थिक लचीलापन और दीर्घकालिक विकास क्षमता को रेखांकित करती है। देश में उद्यमशीलता की गतिशीलता, वैश्विक एकीकरण और उभरते उद्योगों द्वारा संचालित उच्च-निवल-मूल्य वाले व्यक्तियों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है।

बैजल ने कहा कि यह विस्तार सिर्फ पैमाने में ही नहीं है, बल्कि भारत के अभिजात वर्ग की उभरती हुई निवेश प्राथमिकताओं में भी है, जो रियल एस्टेट से लेकर वैश्विक इक्विटी तक, परिसंपत्ति वर्गों में विविधता ला रहे हैं। बैजल ने कहा कि आने वाले दशक में, वैश्विक संपत्ति सृजन में भारत का प्रभाव और मजबूत होगा।

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