ईंधन की कीमतों के नियंत्रणमुक्त होने के बाद पहली बार, भारत की सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियां (OMCs) पेट्रोल, डीजल, एटीएफ और केरोसिन के लिए रिफाइनरियों को रियायती कीमत का भुगतान करेंगी। सूत्रों ने बताया कि ये कदम खुदरा ईंधन कीमतों को स्थिर रखने के कारण होने वाले घाटे को सीमित करने के लिए उठाया गया है। इस मामले की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने बताया कि पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने 26 मार्च को पेट्रोलियम उत्पादों के लिए ऐसी दरें तय की हैं, जो उनकी आयात लागत से 60 रुपये प्रति लीटर तक कम हैं।
16 मार्च से प्रभावी मानी जाएंगी नई दरें
ये रियायती दरें 16 मार्च से प्रभावी मानी जाएंगी और इसका सबसे बुरा असर मैंगलोर रिफानरी (MRPL), चेन्नई पेट्रोलियम (CPCLA) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (HMEL)जैसी स्वतंत्र रिफाइनरियों पर पड़ेगा। पश्चिम एशिया में संघर्ष से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसके बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिससे ओएमसी को इसके प्रभाव को खुद झेलना पड़ रहा है। संघर्ष के जल्द खत्म होने के कोई आसार न देखते हुए, ओएमसी ने रिफाइनरी हस्तांतरण मूल्य (RTP) पर छूट देने का फैसला लिया है।
क्या होता है आरटीपी
आरटीपी वो आंतरिक कीमत है, जिस पर रिफाइनरियां अपने विपणन प्रभागों को ईंधन बेचती हैं। इस छूट के जरिए रिफाइनरियों को पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन के लिए आयात लागत से कम भुगतान किया जाएगा। मार्च के दूसरे पखवाड़े के लिए डीजल पर 22,342 रुपये प्रति किलोलीटर (22.34 रुपये प्रति लीटर) की छूट तय की गई थी, ताकि 85,349 रुपये प्रति किलोलीटर के आरटीपी को घटाकर 63,007 रुपये प्रति किलोलीटर किया जा सके। अप्रैल के पहले पखवाड़े के लिए डीजल पर छूट 60,239 रुपये प्रति किलोलीटर तय की गई है ताकि आरटीपी को 1,46,243 रुपये प्रति किलोलीटर से घटाकर 86,004 रुपये प्रति किलोलीटर किया जा सके।
सरकारी तेल कंपनियों को राहत
इसी तरह, एटीएफ पर 50,564 रुपये प्रति किलोलीटर की छूट के बाद आरटीपी को 1,27,486 रुपये से घटाकर 76,923 रुपये प्रति किलोलीटर कर दिया गया है। केरोसिन के लिए 46,311 रुपये प्रति किलोलीटर की छूट के बाद आरटीपी 1,23,845 रुपये से घटाकर 77,534 रुपये प्रति किलोलीटर तय किया गया है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अपने रिफाइनिंग और विपणन कार्यों के बीच इस नुकसान की कुछ हद तक भरपाई कर सकती हैं।
रिफाइनरियों पर पड़ेगा बुरा असर
हालांकि, एमआरपीएल, सीपीसीएल और एचएमईएल जैसी रिफाइनरियां इस कदम से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। सूत्रों ने कहा कि अगर प्राइवेट रिफाइनरियों के लिए भी आरटीपी पर छूट लागू की जाती है, तो नायरा एनर्जी और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसे रिफाइनरी कंपनियां भी प्रभावित होंगी। दोनों प्राइवेट रिफाइनरी कंपनियां अपने पेट्रोल और डीजल उत्पादन का अधिकांश हिस्सा ओएमसी को बेचती हैं। ओएमसी देश में एक लाख पेट्रोल पंप में से 90 प्रतिशत का परिचालन करती हैं।
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