कारीगरों के प्रोत्साहन के लिए चलाई जाने वाली 'पीएम विश्वकर्मा' योजना को पश्चिम बंगाल में भी लागू किया जाएगा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने शुक्रवार को ये जानकारी दी। ये कदम राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने के कुछ दिन बाद ही उठाया गया है। एमएसएमई मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने इस मामले में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के साथ एक अहम बैठक की। बैठक में योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने, लाभार्थियों की पहचान बेहतर करने, कौशल विकास को मजबूत करने और पारंपरिक कारीगरों तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।
17 सितंबर, 2023 को शुरू हुई थी पीएम विश्वकर्मा योजना
आधिकारिक बयान के मुताबिक, बैठक में राज्य में अन्य एमएसएमई योजनाओं के क्रियान्वयन और संस्थागत समन्वय बढ़ाकर एमएसएमई परिवेश को मजबूत करने की रणनीतियों पर भी विचार किया गया। मुख्य सचिव ने एमएसएमई मंत्रालय के सहयोग की सराहना करते हुए केंद्रीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। केंद्र सरकार की 'पीएम विश्वकर्मा' योजना 17 सितंबर, 2023 को शुरू की गई थी। पश्चिम बंगाल सरकार ने इसके क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय निगरानी समिति और जिला स्तरीय कार्यान्वयन समितियों के गठन की अधिसूचना जारी की है।
क्या है पीएम विश्वकर्मा योजना
डॉ. रजनीश ने कहा कि ये योजना पारंपरिक कौशल के संरक्षण के साथ कारीगरों को आधुनिक उपकरण, औपचारिक वित्तीय पहुंच और बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि पारंपरिक शिल्प और कारीगरों की समृद्ध विरासत वाले पश्चिम बंगाल में इस योजना के सफल क्रियान्वयन की पर्याप्त संभावनाएं हैं। राज्य में इस योजना के तहत अब तक 7.79 लाख कारीगर पंजीकृत हैं। बताते चलें कि इस योजना के तहत कारीगरों या शिल्पकारों को ऋण सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा, उनकी क्षमता, उत्पादकता और उत्पादों की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए बेहतर ट्रेनिंग के साथ आधुनिक उपकरणों के लिए भी सहायता दी जाती है।
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