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अमेरिका के टैरिफ हाइक से भारत का यह सेक्टर होगा बुरी तरह प्रभावित, इतने अरब डॉलर का है निर्यात

भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातकों के लिए 16 प्रतिशत के इस मार्जिन की भरपाई करना और इक्वाडोर के उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होगा।

US President Donald Trump- India TV Hindi
Image Source : FILE अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर बढ़ाए गए टैरिफ से भारत का समुद्री खाद्य निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातक संघ (एसईएआई) के अध्यक्ष जी.पवन कुमार ने रविवार को यह बात कही है। वर्ष 2023-24 में भारत का अमेरिका को समुद्री खाद्य निर्यात 2.5 अरब अमेरिकी डॉलर था। कुमार ने कहा कि अमेरिका को कुल समुद्री खाद्य निर्यात में से झींगा का हिस्सा 92 प्रतिशत है और हम अमेरिका को झींगा के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता हैं। कुमार ने कहा, ‘‘यह शुल्क मूल्य श्रृंखला में सभी हितधारकों को नुकसान पहुंचाएगा और चौतरफा संकट पैदा करेगा।’’ 

इक्वाडोर से मुकाबला करना होगा मुश्किल

ऐसा माना जा रहा है कि दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर की तुलना में भारत निर्यात के मामले में पिछड़ जाएगा, क्योकि उसपर (इक्वाडोर) केवल 10 प्रतिशत का शुल्क लगाया गया है। उन्होंने कहा कि वियतनाम पर 46 प्रतिशत और इंडोनेशिया पर 32 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाया गया है। इन दोनों देशों की कीमत पर भी इक्वाडोर को फायदा होगा। कुमार के अनुसार, इक्वाडोर अमेरिकी बाजार में सबसे बड़े झींगा आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की जगह ले सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातकों के लिए 16 प्रतिशत के इस मार्जिन की भरपाई करना और इक्वाडोर के उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होगा। इस क्षेत्र में प्रचलित मार्जिन केवल चार-पांच प्रतिशत है।’’ उन्होंने कहा कि ऊंचा शुल्क नौ अप्रैल से लागू होगा क्योंकि वर्तमान में समुद्री खाद्य के 2,000 कंटेनर अमेरिकी बाजार में पारगमन में हैं। 

600 करोड़ रुपये का बढ़ेगा बोझ 

कुमार ने बताया किया कि भारत में निर्यातकों पर शुल्क का प्रभाव लगभग 600 करोड़ रुपये बैठेगा। उन्होंने कहा कि इतने की कंटेनर शीत भंडार गृह में हैं, जिन्हें अभी भेजा जाना है। कुमार ने कहा कि चूंकि निर्यात ऑर्डर ‘डोरस्टेप’ डिलिवरी वाले हैं इसलिए पारगमन में माल के लिए शुल्क का प्रभाव निर्यातकों को वहन करना होगा। इससे निर्यातकों पर भारी बोझ आएगा। उन्होंने बताया कि इसके अलावा बॉन्ड देने और अमेरिकी सरकार की अन्य शर्तों को पूरा करने की आवश्यकता निर्यातकों की कार्यशील पूंजी पर असर डालेगी, जिससे वित्तीय संकट और नकदी प्रवाह में बाधा उत्पन्न होगी।

सरकार से मदद की मांग 

कुमार ने बताया कि जवाबी शुल्क के अलावा सभी झींगा आयात पर अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा 5.77 प्रतिशत का प्रतिपूरक शुल्क और 1.38 प्रतिशत डंपिंग-रोधी शुल्क लगाया जाता है। एसईएआई के अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वह इस क्षेत्र को समर्थन देने के उपायों के साथ तत्काल हस्तक्षेप करे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच जबतक कोई द्विपक्षीय व्यापार करार नहीं होता है, केंद्र को क्षेत्र को समर्थन के उपाय करने चाहिए। 

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