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जयप्रकाश एसोसिएट्स अधिग्रहण मामले में वेदांता को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के आदेश में हस्तक्षेप करने से किया इनकार

अदालत ने वेदांता लिमिटेड और सफल समाधान आवेदक अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड से कहा कि वे अपने तर्क और प्रतिदावे एनसीएलएटी के समक्ष रखें।

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Image Source : AFP वेदांता के लिए कपिल सिब्बल ने पेश की दलील

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण से जुड़े राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। एनसीएलएटी ने अडाणी ग्रुप की 14,535 करोड़ रुपये की बोली के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद वेदांता लिमिटेड ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने जयप्रकाश एसोसिएट्स की निगरानी समिति को एनसीएलएटी से पूर्व स्वीकृति के बिना कोई भी ''प्रमुख नीतिगत निर्णय'' लेने से रोककर एक सुरक्षा कवच प्रदान किया। 

10 अप्रैल को अंतिम सुनवाई शुरू करेगा एनसीएलएटी

अदालत ने वेदांता लिमिटेड और सफल समाधान आवेदक अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड से कहा कि वे अपने तर्क और प्रतिदावे एनसीएलएटी के समक्ष रखें। एनसीएलएटी इस विवाद पर 10 अप्रैल से अंतिम सुनवाई शुरू करेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने अडाणी ग्रुप द्वारा जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण से जुड़े विवाद पर दायर याचिका और जवाबी याचिका पर एनसीएलएटी से जल्द फैसला लेने को कहा है। 

पीठ ने अपने आदेश में क्या कहा

पीठ ने आदेश में कहा, '' इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि कंपनी की अपीलें अब 10 अप्रैल, 2026 को एनसीएलएटी में अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। हमें विवादित आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता। हालांकि, मामले की प्रकृति को देखते हुए हम एनसीएलएटी से अनुरोध करते हैं कि निर्धारित तारीख पर या अगर जिरह समाप्त नहीं होती तो अगले कार्य दिवस पर अपील पर सुनवाई की जाए। दोनों पक्षों ने निर्धारित तारीख पर पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।'' 

वेदांता के लिए कपिल सिब्बल ने पेश की दलील

कोर्ट ने कहा, '' चूंकि अपील पर जल्द ही फैसला होने की संभावना है और अपीलकर्ता (वेदांता) के हितों की रक्षा विवादित आदेश में पर्याप्त रूप से की गई है। इसलिए कोई अन्य निर्देश जारी करने की जरूरत नहीं है। अगर निगरानी समिति कोई बड़ा नीतिगत फैसला लेती है, तो वे एनसीएलएटी से अनुमति लेंगे।'' वेदांता लिमिटेड की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि एनसीएलएटी ने खुद कहा है कि कुछ मुद्दे थे जिन पर फैसला लिया जाना था और उनकी बोली सबसे ज्यादा थी। 

अडाणी और ऋणदाताओं की समिति की तरफ से इन वकीलों ने रखा पक्ष

कपिल सिब्बल ने कहा'' अगर ये (समाधान) योजना लागू होती है, तो देखिए लेनदारों को क्या मिलेगा। मेरा हिस्सा 17,926.21 करोड़ रुपये है। वे (अडाणी) करीब 14,000 करोड़ रुपये दे रहे हैं। लेनदारों को इससे भी ज्यादा मिलेगा। वर्तमान मूल्य और कुल राशि के हिसाब से, मैं सबसे ज्यादा भुगतान कर रहा हूं। लेनदार जेपी को 3,000 करोड़ रुपये कम में देने को तैयार हैं।'' ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) का प्रतिनिधित्व सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया। अडाणी ग्रुप की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और उनके साथ करंजावाला एंड कंपनी के विधि विभाग का दल मौजूद रहा।

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