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लौह खदान में भारत की पहली महिला शिफ्ट शुरू, देश में ऐसा पहली बार हुआ, जानें किस कंपनी की है पहल

इस शिफ्ट में भारी मिट्टी हटाने वाली मशीनरी, फावड़े, लोडर, ड्रिल और डोजर ऑपरेटर और शिफ्ट सुपरवाइज सहित सभी खनन से जुड़े काम महिलाएं संभाल रही हैं।

यह सभी महिलाओं की शिफ्ट न सिर्फ कंपनी के लिए बल्कि भारतीय खनन उद्योग के लिए भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि ह- India TV Hindi
Image Source : AI फोटो यह सभी महिलाओं की शिफ्ट न सिर्फ कंपनी के लिए बल्कि भारतीय खनन उद्योग के लिए भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

महिलाओं की कार्यक्षमता की कोई लिमिट नहीं है। वह हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रही हैं। इसी कड़ी में अब लौह अयस्क की खान में काम करना और उसकी पूरी जिम्मेदारी संभालना भी शामिल हो गया है। टाटा स्टील ने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित अपनी नोवामुंडी लौह खदान में पहली बार महिला शिफ्ट शुरू की है। यह देश में पहली बार शुरू की गई पहल है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, इस शिफ्ट में भारी मिट्टी हटाने वाली मशीनरी, फावड़े, लोडर, ड्रिल और डोजर ऑपरेटर और शिफ्ट सुपरवाइज सहित सभी खनन से जुड़े काम महिलाएं संभाल रही हैं।

समान कार्यस्थल बनाने के लिए कंपनी की अटूट प्रतिबद्धता

खबर के मुताबिक, टाटा स्टील ने एक बयान में कहा कि भारत में अपनी तरह की पहली यह पहल, पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान उद्योगों में महिलाओं को सशक्त बनाने और समान कार्यस्थल बनाने के लिए कंपनी की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। बीते सोमवार को खान सुरक्षा उप महानिदेशक (एसई क्षेत्र, रांची) श्याम सुंदर प्रसाद ने सभी महिलाओं की शिफ्ट को हरी झंडी दिखाई, जो समान कार्यस्थल को बढ़ावा देने में सरकार के समर्थन की एक नई शुरुआत है। खान सुरक्षा महानिदेशक द्वारा 2019 में खनन में सभी शिफ्टों में महिलाओं की तैनाती की अनुमति देने का निर्णय सही दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

भारतीय खनन उद्योग के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

टाटा स्टील के उपाध्यक्ष (कच्चा माल) डी बी सुंदर रामम ने कहा कि यह सभी महिलाओं की शिफ्ट न सिर्फ कंपनी के लिए बल्कि भारतीय खनन उद्योग के लिए भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह रूढ़ियों को तोड़ने वाली महिलाओं की लचीलापन और क्षमता का प्रमाण है। यह हमारे इस विश्वास का भी प्रतिबिंब है कि इनोवेशन और ऑपरेशनल क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए विविधता और समावेशन जरूरी हैं। यह यात्रा 2019 में टाटा स्टील की प्रमुख विविधता पहल, "वुमेन@माइन्स" के शुभारंभ के साथ शुरू हुई, जो केंद्र द्वारा खान अधिनियम, 1952 में ऐतिहासिक छूट के बाद, अपनी खदानों में सभी शिफ्टों में महिलाओं को तैनात करने वाली भारत की पहली कंपनी बन गई।

महिलाओं को ट्रेनिंग दी गई

टाटा स्टील ने स्थानीय समुदायों से महिलाओं को भारी मिट्टी हटाने वाली मशीनरी चलाने और खनन ईको सिस्टम में भाग लेने के लिए भर्ती करने और ट्रेनिंग करने की पहल शुरू की थी। कंपनी के बयान में कहा गया है कि पहलों को जबरदस्त उत्साह के साथ पूरा किया गया और महिलाओं को डम्पर, फावड़ा, डोजर, ग्रेडर और ड्रिल ऑपरेटर जैसी भूमिकाओं में तैनात किया गया। अप्रैल 2022 में कार्यबल में शामिल होने से पहले उन्होंने टेक्निकल और ऑपरेशन स्किल, सिम्युलेटर सेशन, सेफ्टी प्रोटोकॉल और शारीरिक फिटनेस सहित व्यापक ट्रेनिंग लिया।

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