मुंबई: टाटा ट्रस्ट देशभर में 40 से 50 गैर-लाभकारी सामान्य अस्पतालों का नेटवर्क बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इस मॉडल में इलाज का खर्च उठाने में सक्षम मरीजों से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल उन लोगों के इलाज में मदद के लिए किया जाएगा, जो इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने वित्त वर्ष 2025-26 की सालाना रिपोर्ट में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्था का लक्ष्य सिर्फ पैसा खर्च करना नहीं, बल्कि ऐसे संस्थान बनाना है जो लंबे समय तक समाज के काम आएं।
'अब सिर्फ खर्च नहीं, काम का असर भी दिखाना होगा'
नोएल टाटा ने अपने संदेश में कहा कि अब यह पूछना काफी नहीं है कि ट्रस्ट ने कितना पैसा खर्च किया या कितना योगदान दिया। उन्होंने कहा,
'संस्था को यह भी बताना होगा कि उसके काम से लोगों की जिंदगी में क्या बदलाव आया और वह बदलाव कितने समय तक कायम रहेगा। समाजसेवा का मूल्यांकन सिर्फ इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कितने लोगों तक मदद पहुंची या कितनी रकम खर्च हुई। यह देखना भी जरूरी है कि मदद से वास्तविक और लंबे समय तक बने रहने वाला फायदा हुआ या नहीं।'
पांच साल में 25 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य
टाटा ट्रस्ट ने 2026 से 2031 के लिए पांच साल की स्वास्थ्य योजना तैयार की है। इसके तहत करीब 75 ब्लॉक में 25 लाख लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और 100 से अधिक सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। नोएल टाटा ने कहा कि संस्था उन परिवारों की मदद जारी रखेगी, जो गंभीर बीमारी के कारण आर्थिक संकट का सामना करते हैं। इसके साथ ही कैंसर के इलाज की सुविधाओं को लोगों के घरों के करीब पहुंचाने के लिए विकेंद्रीकृत कैंसर देखभाल व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा।
कैंसर मरीजों के इलाज में कितनी मदद मिली?
टाटा ट्रस्ट की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में उसके कैंसर देखभाल कार्यक्रमों के तहत 1,06,626 मरीजों ने ओपीडी में परामर्श लिया। इस दौरान मरीजों के इलाज के लिए कीमोथेरेपी के 24,874 चक्र पूरे किए गए और 2,879 सर्जरी की गईं। संस्था का उद्देश्य कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज को मरीजों के लिए अधिक सुलभ बनाना है, ताकि उन्हें इलाज के लिए अपने घर से बहुत दूर न जाना पड़े और जरूरतमंद परिवारों को सहायता मिल सके।
प्रतिभाशाली युवाओं के लिए भारत में ही बनेंगे बेहतर संस्थान
नोएल टाटा ने कहा कि भारत के कई प्रतिभाशाली युवा ऐसे अवसरों की तलाश में विदेश चले जाते हैं, जो उन्हें अपने देश में नहीं मिल पाते। उनके मुताबिक, भारत को ऐसे और संस्थानों की जरूरत है, जो युवाओं की प्रतिभा को निखारें और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दें। उन्होंने कहा कि टाटा ट्रस्ट राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को विकसित करने में पहले भी भूमिका निभाता रहा है और आगे भी ऐसा करता रहेगा। जरूरत पड़ने पर दूसरे परोपकारी संगठनों और समान सोच रखने वाली संस्थाओं के साथ साझेदारी भी की जा सकती है।
IISc, TIFR और टाटा मेमोरियल अस्पताल का दिया उदाहरण
नोएल टाटा ने संस्थान बनाने की परंपरा का जिक्र करते हुए भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और टाटा मेमोरियल अस्पताल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों का निर्माण इस सोच को दिखाता है कि समाज के लिए ऐसे संस्थान खड़े किए जाएं, जो लंबे समय तक लोगों की जरूरतों को पूरा कर सकें। टाटा ट्रस्ट भविष्य में भी इसी तरह के संस्थानों को बढ़ावा देने और देश में प्रतिभाशाली लोगों के लिए बेहतर अवसर तैयार करने पर ध्यान देगा।
टाटा समूह में ट्रस्ट की बड़ी हिस्सेदारी
टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की कुल 66 फीसदी हिस्सेदारी है। टाटा संस वह होल्डिंग कंपनी है, जिसके नियंत्रण में टाटा समूह की कई बड़ी सूचीबद्ध कंपनियां आती हैं। नोएल टाटा ने रतन टाटा के बाद ट्रस्ट के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली। उनकी अगुवाई में संस्था स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के विकास जैसे क्षेत्रों में अपने काम को आगे बढ़ा रही है।
'समाजसेवा में बढ़ रही जवाबदेही की जरूरत'
नोएल टाटा ने कहा कि भारत में समाजसेवा का क्षेत्र बदल रहा है। उद्यमियों की नई पीढ़ी सामाजिक कामों को लेकर अधिक महत्वाकांक्षी हो रही है। ऐसे में पुराने और स्थापित संस्थानों को भी अपने काम की प्रभावशीलता और जवाबदेही का स्तर बढ़ाना होगा। उन्होंने आगाह किया कि सबसे बड़ा बनने की कोशिश करने से पहले सबसे बेहतर बनने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि सिर्फ आकार बढ़ाने की दौड़ का नतीजा अक्सर अच्छा नहीं होता। (PTI से इनपुट्स के साथ)
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