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बजट महंगाई बढ़ाने वाला नहीं, इससे RBI को मदद मिलेगी: वित्त सचिव

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक पांच फरवरी से शुरू होगी। एमपीसी सात फरवरी को अपने नीतिगत निर्णयों की घोषणा करेगी।

Budget - India TV Hindi
Image Source : FILE बजट

वित्त सचिव तुहिन कांत पांडे ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए कदम उठाते हुए ऐसा बजट पेश किया है जिससे महंगाई नहीं बढ़ेगी। अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति को वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दर में कटौती पर फैसला करना है। पांडे ने कहा, राजकोषीय नीति और मौद्रिक नीति को एक साथ काम करने की जरूरत है, न कि विपरीत उद्देश्यों के लिए क्योंकि अगर हम मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने में सक्षम हैं, तो मौद्रिक सहजता से भी बहुत अधिक लाभ होगा।’’ बजट में राजकोषीय घाटे के वित्त वर्ष 2025-26 में 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो चालू वित्त वर्ष 2024-25 के 4.8 प्रतिशत से कम है। 

शुक्रवार को मौद्रिक पॉलिसी की घोषणा

पांडे ने यहां भारतीय वाणिज्य एंव उद्योग मंडल (एसोचैम) के साथ बजट के बाद आयोजित परिचर्चा में कहा, यह स्पष्ट करना बहुत जरूरी है कि हमें एक निश्चित राजकोषीय व्यवस्था के भीतर क्या करना है। हमें उस सीमा तक मौद्रिक अधिकारियों की सहायता करनी होगी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक पांच फरवरी से शुरू होगी। एमपीसी सात फरवरी को अपने नीतिगत निर्णयों की घोषणा करेगी। रुपये में गिरावट से मुद्रास्फीति को लेकर बढ़ने वाली चिंता के बारे में पूछे जाने पर सचिव ने कहा कि गिरावट का असर आयात से बढ़ने वाली महंगाई पर होता है, लेकिन इससे निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ती है। यह पूछे जाने पर कि क्या मौद्रिक नीति समिति नीतिगत दरों में कटौती का फैसला करेगी, पांडे ने कहा, मुझे लगता है कि यह फैसला एमपीसी करेगी। वे स्थिति से वाकिफ हैं। वे फैसला लेंगे।

नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​करेंगे अध्यक्षता

रिजर्व बैंक के नवनियुक्त गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​बुधवार से शुरू होने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। छह सदस्यीय समिति के निर्णय की घोषणा शुक्रवार सात फरवरी को की जाएगी। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, इस बार नीतिगत दर में कटौती की संभावना है। इसके दो कारण हैं। सबसे पहले, आरबीआई पहले ही नकदी बढ़ाने के उपायों की घोषणा कर चुका है। इससे बाजार की स्थिति में सुधार हुआ है। नीतिगत दर में कटौती के लिए यह आगे का रास्ता साफ करता है। सबनवीस ने कहा कि केंद्रीय बजट के जरिये प्रोत्साहन दिया गया है और इसे समर्थन देने के लिए रेपो दर को कम करना उचित जान पड़ता है। रिजर्व बैंक ने 27 जनवरी को बैंकों में 1.5 लाख करोड़ रुपये की नकदी डालने के उपायों की घोषणा की है।

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