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यूपी के लड़के ने गांव में बना दिया बायोगैस प्लांट- गोबर, गन्ने की खोई से बनी गैस से दौड़ रहीं गाड़ियां

उपेंद्र ने बायोगैस का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो रोजाना करीब 2.4 टन कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन कर रहा है।

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Image Source : FREEPIK सांकेतिक तस्वीर

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला किए जाने के बाद से ही मिडिल-ईस्ट दहल रहा है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बदले में ईरान ने भी पूरी ताकत से पलटवार किया और जमकर हमले किए। इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने के साथ ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से पूरी दुनिया की तेल और गैस सप्लाई अभी तक बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट की खबरों के बीच, उत्तर प्रदेश के एक लड़के ने अपने गांव में ही बायोगैस का प्लांट लगा दिया, जो रोजाना 2.4 टन कंप्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन कर रहा है।

हरदोई जिले के रहने वाले हैं 29 साल के उपेंद्र तिवारी

यूपी के हरदोई जिले का रहने वाला ये लड़का, कोई मामूली लड़का नहीं, बल्कि ब्रिटेन से पढ़ाई किया हुआ है। 29 साल के उपेंद्र तिवारी ने ब्रिटेन से एमबीए की डिग्री हासिल की है और एक उद्यमी भी हैं। उपेंद्र ने बायोगैस का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो रोजाना करीब 2.4 टन कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन कर रहा है। उपायुक्त (उद्योग) हर्ष प्रताप सिंह ने बताया कि गाय के गोबर, गन्ने की खोई और फसल अवशेषों से तैयार ये गैस गाड़ियों में सीएनजी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल हो रही है। इसके साथ ही इसे घरेलू इस्तेमाल के लिए पाइप के जरिए सप्लाई की जाने वाली रसोई गैस (PNG) के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 

हरदोई के भैलामऊ गांव के पास स्थापित किया गया है ये प्लांट

उपेन्द्र तिवारी ने हरदोई के भैलामऊ गांव के पास ये बायोगैस प्लांट स्थापित किया है। उनकी इस पहल से प्रतिदिन 2.4 टन सीबीजी का उत्पादन हो रहा है, जो स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। तिवारी ने बताया कि निकट भविष्य में प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 12 टन प्रतिदिन करने की योजना है। बताते चलें कि मिडिल-ईस्ट में जारी संकट की वजह से बाकी देशों की तुलना में भारत की स्थिति काफी हद तक कंट्रोल में है। देश में सीएनजी और पीएनजी की पूरी सप्लाई जारी है। हालांकि, एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई में दिक्कतें आ रही हैं। 

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