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अमेरिका ने रोजगार वीजा नियमों को फिर से कड़ा किया, फ्लोरिडा के गवर्नर की H-1B को लेकर चेतावनी

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी का नया नियम और फ्लोरिडा सरकार का रुख- दोनों ही संकेत हैं कि अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों, विशेष रूप से भारतीय वर्क वीज़ा धारकों, के लिए आने वाले समय में हालात और सख्त हो सकते हैं।

यह कदम H-1B और H-4 वीज़ा धारकों, STEM छात्रों, के करियर और नौकरी की स्थिरता पर गहरा प्रभाव डाल सकता - India TV Hindi
Image Source : FREEPIK यह कदम H-1B और H-4 वीज़ा धारकों, STEM छात्रों, के करियर और नौकरी की स्थिरता पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

अमेरिका में काम कर रहे लाखों विदेशी पेशेवरों, खासतौर पर भारतीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा झटका है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएचएस) ने विदेशी नागरिकों के लिए वर्क परमिट की ऑटोमैटिक एक्सटेंशन सुविधा को खत्म कर दिया है। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, नई व्यवस्था गुरुवार, 30 अक्टूबर से प्रभावी होने जा रही है। नया नियम लागू होने के बाद, अगर वर्क परमिट की अवधि समाप्त हो जाती है और रिन्युअल मंजूर नहीं हुआ है, तो केवल एक दिन बाद ही कर्मचारी की काम करने की अनुमति खत्म हो जाएगी।

क्या है नया नियम?

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी द्वारा जारी नए अंतरिम अंतिम नियम के तहत, अगर किसी विदेशी कर्मचारी का वर्क परमिट नवीनीकरण आवेदन समय पर मंजूर नहीं होता है, तो वह अपने पुराने परमिट की समाप्ति के तुरंत बाद काम करना बंद करने के लिए बाध्य होगा। पहले तक विदेशी कर्मचारी अपने वर्क परमिट की अवधि समाप्त होने के बाद भी 540 दिन (लगभग 18 महीने) तक काम जारी रख सकते थे, यदि उनका नवीनीकरण आवेदन लंबित था।

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी का स्पष्टीकरण

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के मुताबिक रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज (ईएडी) यह साबित करता है कि कोई व्यक्ति अमेरिका में एक निश्चित अवधि तक काम करने के लिए अधिकृत है। लेकिन अब बिना नवीनीकृत परमिट के काम जारी रखना गैरकानूनी होगा। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवाएं यानी USCIS के आंकड़ों के मुताबिक, वर्क परमिट एक्सटेंशन की प्रक्रिया में 3 से 12 महीने तक का समय लग सकता है। इसी वजह से डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने सलाह दी है कि विदेशी कर्मचारी अपना नवीनीकरण आवेदन वर्क परमिट की समाप्ति से कम से कम 180 दिन पहले जमा करें।

भारतीय कर्मचारियों पर सबसे बड़ा असर

अमेरिका में विदेशी कार्यबल का बड़ा हिस्सा भारतीय पेशेवरों का है, जिनमें से अधिकतर H-1B वीज़ा धारक हैं। इनमें वे लोग शामिल हैं जो ग्रीन कार्ड के लिए वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे हैं, साथ ही उनके जीवनसाथी (H-4 वीज़ा धारक) भी जो अपने वर्क परमिट पर निर्भर हैं। साथ ही, STEM क्षेत्र में OPT (ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) पर काम कर रहे छात्र भी इस बदलाव से प्रभावित होंगे।

फ्लोरिडा के गवर्नर का कड़ा कदम

फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसैंटिस ने बुधवार को अपने राज्य की यूनिवर्सिटीज़ को निर्देश दिया है कि वे विदेशी वर्क वीज़ा धारकों की जगह अमेरिकी नागरिकों को नौकरियां दें, ताकि H-1B वीज़ा के दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि देशभर की यूनिवर्सिटीज़ विदेशी कर्मचारियों को H-1B वीज़ा पर ला रही हैं, जबकि योग्य अमेरिकी नागरिक नौकरी के लिए उपलब्ध हैं। हम फ्लोरिडा में ऐसे दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं करेंगे। डीसैंटिस ने आगे कहा कि यदि किसी विश्वविद्यालय को अमेरिकी नागरिक नहीं मिल रहे हैं, तो उन्हें अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों की समीक्षा करनी चाहिए ताकि ऐसे ग्रेजुएट तैयार हों जो इन पदों के योग्य हों।

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