A
  1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा वेदांता ग्रुप, अडाणी ने भी दायर किया 'कैविएट'

जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा वेदांता ग्रुप, अडाणी ने भी दायर किया 'कैविएट'

वेदांता ग्रुप ने दलील दी है कि उसने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई थी। वेदांता की बोली 16,726 करोड़ रुपये की थी, जबकि अडाणी एंटरप्राइजेज की बोली 14,535 करोड़ रुपये थी।

Jaiprakash Associates, Jaiprakash Associates limited, jaypee group, adani group, adani enterprises, - India TV Hindi
Image Source : PTI वेदांता ग्रुप ने पहले NCLT के आदेश को NCLAT में दी थी चुनौती

वेदांता लिमिटेड ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण के लिए अडाणी ग्रुप की 14,535 करोड़ रुपये की सफल बोली को मंजूरी देने वाले एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वेदांता ने 25 मार्च को अपनी अपील दायर की थी। इससे एक दिन पहले राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने अडाणी की समाधान योजना के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इस बीच, अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक 'कैविएट' दायर की है। 

वेदांता ग्रुप ने NCLT के आदेश को NCLAT में दी थी चुनौती

कैविएट एक कानूनी नोटिस है, जिसमें कोर्ट से अनुरोध किया जाता है कि दूसरे पक्ष की याचिका पर कोई भी आदेश देने से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए। अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने 24 मार्च को वेदांता की उस याचिका पर अंतरिम रोक लगाने से मना कर दिया था, जिसमें राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के आदेश को चुनौती दी गई थी। हालांकि, एनसीएलएटी ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के ऋणदाताओं की समिति (COC) से एक हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई के लिए 10 अप्रैल की तारीख तय की है। 

क्या है वेदांता ग्रुप की दलील

वेदांता ग्रुप ने दलील दी है कि उसने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई थी। वेदांता की बोली 16,726 करोड़ रुपये की थी, जबकि अडाणी एंटरप्राइजेज की बोली 14,535 करोड़ रुपये थी। वेदांता का तर्क है कि दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) का मुख्य उद्देश्य संकटग्रस्त संपत्ति का अधिकतम मूल्य प्राप्त करना है, लेकिन ऋणदाताओं ने कम मूल्य वाली बोली को चुना। 

ऋणदाताओं की समिति ने अपनी सफाई में क्या कहा

दूसरी ओर, ऋणदाताओं की समिति (COC) ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी बोलीदाता द्वारा केवल सबसे ऊंची बोली लगाना उसके लिए जीत की गारंटी नहीं होता। ऋणदाताओं के अनुसार, अडाणी की योजना को इसलिए प्राथमिकता दी गई क्योंकि उन्होंने लगभग 6,000 करोड़ रुपये का तत्काल नकद भुगतान और दो साल के भीतर पूरा भुगतान करने की पेशकश की थी। इसके विपरीत, वेदांता का भुगतान 5 साल की लंबी अवधि में फैला हुआ था। जून, 2024 में जेपी एसोसिएट्स (जेएएल) को 57,185 करोड़ रुपये के कर्ज भुगतान में चूक के बाद दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में शामिल किया गया था।

पीटीआई इनपुट्स के साथ

Latest Business News