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वेदांता ने जेपी ग्रुप के लिए लगाई 17,000 करोड़ रुपये की सफल बोली, अडाणी को पीछे छोड़ा

राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने 3 जून, 2024 को जेपी एसोसिएट्स को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) में भेज दिया था।

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Image Source : VEDANTA GROUP जेएएल पर कुल 57,185 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा

माइनिंग सेक्टर की दिग्गज कंपनी वेदांता ने कर्ज में फंसी जयप्रकाश एसोसिएट्स (JAL) के अधिग्रहण के लिए 17,000 करोड़ रुपये की सफल बोली लगाकर अडाणी ग्रुप को पीछे छोड़ दिया है। सूत्रों ने शुक्रवार को ये जानकारी दी। सूत्रों ने कहा कि वेदांता की बोली की राशि 17,000 करोड़ रुपये है लेकिन मौजूदा समय की कीमत और भविष्य में मिलने वाले पैसों को ध्यान में रखने पर इसका शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV) 12,505 करोड़ रुपये बैठता है। जेपी एसोसिएट्स का कारोबार रियल एस्टेट, सीमेंट, ऊर्जा, होटल और सड़क परियोजनाओं में रहा है। लेकिन भारी कर्ज के बोझ से दबने और कर्ज चुकाने में नाकाम रहने की वजह से कंपनी को दिवाला प्रक्रिया का सामना करना पड़ा।

NCLT ने जून 2024 में जेपी एसोसिएट्स को CIRP में भेजा था

राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने 3 जून, 2024 को जेपी एसोसिएट्स को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) में भेज दिया था। सूत्रों ने बताया कि जेएएल के ऋणदाताओं की समिति (COC) ने कंपनी की बिक्री के लिए दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत चुनौती प्रक्रिया अपनाई। कर्जदाताओं की समिति की 5 सितंबर को हुई बैठक में चुनौती प्रक्रिया पूरी हुई। इसमें वेदांता ने दूसरे दावेदार अडाणी एंटरप्राइजेज को पीछे छोड़ते हुए बाजी मार ली। सूत्रों ने बताया कि वेदांता ने 17,000 करोड़ रुपये की सफल बोली लगाई। इसके साथ बोली का शुद्ध वर्तमान मूल्य 12,505 करोड़ रुपये हो गया और अडाणी ग्रुप पीछे रह गया।

जेएएल पर कुल 57,185 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा

वित्तीय ऋणदाताओं ने जेएएल पर कुल 57,185 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा किया हुआ है। इनमें सबसे बड़ा दावा 'नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड' (एनएआरसीएल) का है, जिसने भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले ऋणदाता ग्रुप से कंपनी के कर्ज खरीदे हैं। इस साल अप्रैल में जेएएल के अधिग्रहण में 25 कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई थी। हालांकि, जून में कंपनी ने कहा कि उसे दिवाला प्रक्रिया के जरिये अधिग्रहण के लिए 5 बोलियां और अग्रिम राशि मिली हैं। इन 5 दावेदारों में अडाणी एंटरप्राइजेज, डालमिया भारत सीमेंट, वेदांता ग्रुप, जिंदल पावर और पीएनसी इन्फ्राटेक शामिल थे।

जेपी ग्रुप के प्रमुख प्रोजेक्ट्स

हालांकि, बोली प्रक्रिया के अंत में केवल अडाणी ग्रुप और वेदांता की तरफ से ही ठोस बोलियां लगाई गई थीं। जेएएल की परिसंपत्तियों में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में स्थित कई बड़ी रियल एस्टेट परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें ग्रेटर नोएडा का जेपी ग्रीन्स, नोएडा स्थित जेपी ग्रीन्स विशटाउन और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास जेपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी प्रमुख हैं। कंपनी के पोर्टफोलियो में दिल्ली-एनसीआर, मसूरी और आगरा में संचालित होने वाले 5 होटल भी हैं।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी कंपनी की प्रॉपर्टी

इसके अलावा जेएएल की मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में 4 सीमेंट यूनिट्स और कुछ पट्टे पर ली गई चूना पत्थर की खदानें भी हैं। हालांकि, इसके सीमेंट प्लांटों में फिलहाल काम बंद है। जेएएल की अपनी सब्सिडरी यूनिट्स- जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड, यमुना एक्सप्रेसवे टोलिंग लिमिटेड और जेपी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड समेत कई कंपनियों में निवेश भी हैं। जयप्रकाश ग्रुप (जेपी ग्रुप) की एक अन्य कंपनी जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड का दिवाला समाधान प्रक्रिया के जरिये पहले ही मुंबई की कंपनी सुरक्षा ग्रुप द्वारा अधिग्रहण किया जा चुका है। 

पीटीआई इनपुट्स के साथ

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