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वोडाफोन आइडिया को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, शेयरों में 10% की ताबड़तोड़ उछाल

वोडाफोन आइडिया के वकील ने सुप्रीट कोर्ट से कहा कि पिछले आदेश के छठे पैरा में त्रुटि हुई है, जिसमें कहा गया था कि कंपनी ने सिर्फ अतिरिक्त एजीआर देनदारी के लिए राहत मांगी है।

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Image Source : JUSTDIAL एजीआर के आधार पर फीस का भुगतान करती हैं कंपनियां

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया को बड़ी राहत देते हुए कहा कि सरकार कंपनी के समायोजित सकल राजस्व (AGR) से जुड़े सभी बकाया पर पुनर्विचार कर सकती है और राहत केवल वित्त वर्ष 2016-17 के अतिरिक्त एजीआर बकाये तक ही सीमित नहीं होगी। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की बेंच ने 27 अक्टूबर के अपने आदेश में हुई त्रुटि को स्पष्ट करते हुए कहा कि वोडाफोन आइडिया ने अपनी अपील में सिर्फ अतिरिक्त एजीआर की देनदारी नहीं, बल्कि सभी एजीआर बकायों के पुनर्मूल्यांकन की भी मांग की थी। 

कंपनी पर 9,450 करोड़ रुपये का अतिरिक्त एजीआर बकाया 

वोडाफोन आइडिया के वकील ने सुप्रीट कोर्ट से कहा कि पिछले आदेश के छठे पैरा में त्रुटि हुई है, जिसमें कहा गया था कि कंपनी ने सिर्फ अतिरिक्त एजीआर देनदारी के लिए राहत मांगी है। इस पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वोडाफोन आइडिया की याचिका में राहत का दायरा सभी बकाया देनदारी को शामिल करता है। न्यायालय के इस स्पष्टीकरण से अब केंद्र सरकार को वोडाफोन आइडिया के सभी एजीआर बकायों पर पुनर्मिलान और राहत देने का रास्ता मिल गया है। कर्ज के बोझ से डूबी कंपनी पर अतिरिक्त एजीआर बकाया लगभग 9,450 करोड़ रुपये का है जबकि दूरसंचार विभाग की उससे कुल एजीआर मांग मार्च, 2025 तक 83,500 करोड़ रुपये की है।

वोडाफोन आइडिया में सरकार की 49% हिस्सेदारी 

सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि दूरसंचार कंपनी में सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होने और 20 करोड़ ग्राहकों के हितों को देखते हुए सरकार कंपनी के मुद्दों पर दोबारा विचार करने को तैयार है। मुख्य न्यायाधीश ने आदेश में कहा, “केंद्र सरकार ने इस कंपनी में महत्वपूर्ण इक्विटी निवेश किया है और ये लाखों उपभोक्ताओं को प्रभावित करता है। इसलिए, हम सरकार को पुनर्विचार करने और जरूरी कदम उठाने से नहीं रोक सकते हैं।” 

एजीआर के आधार पर फीस का भुगतान करती हैं कंपनियां

एजीआर के आधार पर दूरसंचार कंपनियां सरकार को लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम फीस का भुगतान करती हैं। इस पर विवाद 2000 के दशक से ही चलता आ रहा है कि एजीआर में गैर-दूरसंचार आय को भी शामिल किया जाए या नहीं। उच्चतम न्यायालय ने साल 2019 में एजीआर की परिभाषा को व्यापक रखते हुए सरकार के पक्ष में फैसला दिया था, जिसके बाद वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल सहित कई दूरसंचार कंपनियों पर भारी बकाया देनदारी आ गई थी।

वोडाफोन आइडिया के शेयरों में ताबड़तोड़ तेजी

सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के चलते आज वोडाफोन आइडिया के शेयरों में ताबड़तोड़ तेजी देखने को मिली। सोमवार को एनएसई पर वोडाफोन आइडिया के शेयर 0.85 रुपये (9.74 %) की तेजी के साथ 9.58 रुपये के भाव पर बंद हुए। आज कारोबार के दौरान कंपनी के शेयर 8.76 रुपये के इंट्राडे लो से लेकर 9.96 रुपये के इंट्राडे हाई तक पहुंचे थे। बताते चलें कि टेलीकॉम कंपनी के शेयरों ने पिछले ही महीने 27 अक्टूबर को एनएसई पर 10.57 रुपये का अपना नया 52 वीक हाई बनाया था, जिसके बाद शेयरों में अचानक तेज गिरावट आई थी।

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