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वोडाफोन आइडिया ने DIPAM को ₹36,950 करोड़ के शेयर कर दिए जारी, आखिर क्या है वजह?

कंपनी के निदेशक मंडल की पूंजी जुटाने वाली समिति ने 8 अप्रैल, 2025 को अपनी बैठक में 10 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के निर्गम मूल्य पर 10 रुपये अंकित मूल्य के 3,695 करोड़ इक्विटी शेयर जारी कर अलॉट किए हैं।

वोडाफोन आइडिया लिमिटेड में सरकार की हिस्सेदारी कंपनी के विस्तारित चुकता पूंजी आधार में 48.99 प्रतिशत- India TV Hindi
Image Source : FILE वोडाफोन आइडिया लिमिटेड में सरकार की हिस्सेदारी कंपनी के विस्तारित चुकता पूंजी आधार में 48.99 प्रतिशत हो गई है।

टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया ने मंगलवार को निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) को 3,695 करोड़ इक्विटी शेयर जारी कर अलॉट कर दिए हैं। इन शेयरों की कुल कीमत 36,950 करोड़ रुपये है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, सरकार ने यह कदम कर्ज में डूबी दूरसंचार कंपनी के स्पेक्ट्रम नीलामी बकाया को इक्विटी में बदलने के फैसले के बाद उठाया है। इस अलॉटमेंट के बाद वोडाफोन आइडिया लिमिटेड में सरकार की हिस्सेदारी कंपनी के विस्तारित चुकता पूंजी आधार में 48.99 प्रतिशत हो गई है।

10 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के निर्गम मूल्य पर अलॉटमेंट

खबर के मुताबिक, वोडाफोन आइडिया लिमिटेड ने एक नियामक फाइलिंग में कहा कि कंपनी के निदेशक मंडल की पूंजी जुटाने वाली समिति ने 8 अप्रैल, 2025 को अपनी बैठक में 10 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के निर्गम मूल्य पर 10 रुपये अंकित मूल्य के 3,695 करोड़ इक्विटी शेयर जारी कर अलॉट किए हैं, जिनकी कुल कीमत 36,950 करोड़ रुपये है। इसमें कहा गया है कि इक्विटी शेयरों के इस अलॉटमेंट के परिणामस्वरूप, कंपनी की चुकता इक्विटी शेयर पूंजी बढ़कर 10,83,43,03,50,010 रुपये हो गई है।

इसमें 10 रुपये अंकित मूल्य के 1,08,34,30,35,001 इक्विटी शेयर शामिल हैं। यह केंद्र सरकार द्वारा स्पेक्ट्रम नीलामी बकाया राशि, जिसमें स्थगन अवधि के खत्म होने के बाद चुकाए जाने वाले स्थगित बकाया भी शामिल हैं, को सरकार को जारी किए जाने वाले इक्विटी शेयरों में बदलने के फैसले के बाद किया गया है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति पर संभावित बोझ

नियमों के तहत, किसी लिस्टेड कंपनी में 25 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सेदारी हासिल करने वाली संस्थाओं को शेयरधारकों के लिए एक खुली पेशकश करनी होती है। सेबी ने हाल ही में कहा था कि वीआईएल द्वारा सरकार को एक बड़ी राशि का भुगतान किया जाना है, जो कंपनी की वित्तीय स्थिति पर संभावित बोझ डाल सकता है। साथ ही भारत सरकार की ओर से एक खुली पेशकश की बाध्यता में नकदी की बड़ी मात्रा में निकासी शामिल है।

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