उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए एक और अच्छी खबर है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹3.4 लाख करोड़ की लागत वाली 124 नेशल हाईवे (NH) और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाने की घोषणा की है। ये प्रोजेक्ट कुल 6,376 किलोमीटर लंबी होंगी। एनएचआई ने जिन नए प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाने की तैयारी में हैं, उनमें गोरखपुर–किशनगंज–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे भी शामिल है। 476 किलोमीटर लंबे गोरखपुर-किशनगंज-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के लिए हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत बोली लगाई जाएगी। यानी बोली लगाने के बाद इस रोड प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा।
पूर्वाेत्तर भारत के बीच संपर्क मजबूत होगा
गोरखपुर–किशनगंज–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के बनने से पूर्वाेत्तर भारत के बीच संपर्क मजबूत होगा। इस एक्सप्रेसवे के बनने से बिहार और पूर्वाेत्तर भारत के बीच संपर्क और मजबूत होगा। इससे व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रोजेक्ट पर निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। आपको बता दें कि यह एक्सप्रेसवे यह एक्सप्रेसवे बिहार के आठ जिले, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से होकर गुजरेगा। इस प्रोजेक्ट में गंडक, बागमती और कोसी नदी पर पुलों का निर्माण भी शामिल है। इससे इन जिलों में जमीन की कीमतों में तेजी से वृद्धि होने की संभावना है।
घटेगी दूरी, होगी समय की बचत
इस एक्सप्रेसवे के बनने से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में रहने वाले लोगों को बड़ा फायदा होगा। यात्रा की दूरी घटेगी और समय की बड़ी बचत होगी। अभी किशनगंज से एनएच—27 और अगे जाकर एनएच—57 से दरभंगा, मोतिहारी, सिवान, गोपालगंज होते हुए गोरखपुर जानें में 12 से 14 घंटे का समय लगता है। हालांकि, इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से गोरखुपुर जाने में 6 से 7 घंटे लगेंगे। जानकारों का कहना है कि इस एक्सप्रेसवे के बनने से आर्थिक विकास को भी फंख लगेंगे। इसके आसपास के एरिया में रोजगार के अवसर खुलेंगे।
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