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WPI Inflation: सितंबर में थोक महंगाई घटकर 0.13% पर, किन वजहों से मिली राहत? जानें क्या हुआ सस्ता

जानकार के मुताबिक, अक्टूबर में डब्ल्यूपीआई फिर से अपस्फीति की ओर बढ़ सकता है, और अक्टूबर 2025 में यह 0.5% तक पहुंच सकता है।

खाद्य और प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में गिरावट के कारण समग्र मुद्रास्फीति कम हुई है। - India TV Hindi
Image Source : PIXABAY खाद्य और प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में गिरावट के कारण समग्र मुद्रास्फीति कम हुई है।

सितंबर 2025 में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूआईपी) आधारित मुद्रास्फीति में महत्वपूर्ण गिरावट आई, जो सिर्फ 0.13% पर आ गई। यह गिरावट मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में कमी के कारण हुई। अगस्त 2025 में WPI मुद्रास्फीति 0.52% और पिछले साल सितंबर में यह 1.91% थी। पीटीआई की खबर के मुताबिक, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में खाद्य पदार्थों की कीमतों में अपस्फीति 5.22% रही, जबकि अगस्त में यह 3.06% थी। विशेष रूप से, सब्जियों में कीमतों की गिरावट में तेज़ी आई, जहां सब्जियों की कीमतों में 24.41% की गिरावट आई, जबकि अगस्त में यह गिरावट 14.18% थी। विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति भी मामूली रूप से घटकर 2.33% रही, जो अगस्त में 2.55% थी। वहीं, ईंधन और बिजली क्षेत्र में अपस्फीति 2.58% दर्ज की गई, जो अगस्त में 3.17% थी।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

बार्कलेज इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री आस्था गुडवानी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में गिरावट के कारण WPI मुद्रास्फीति आने वाले समय में लंबे समय तक कम रहने की संभावना है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के एसोसिएट निदेशक पारस जसराय ने कहा कि हालांकि, सितंबर 2025 में मुख्य मुद्रास्फीति बढ़कर 1.9% हो सकती है, जो आभूषणों की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि (34.1%) के कारण है। जसराय का यह भी कहना था कि अक्टूबर में डब्ल्यूपीआई फिर से अपस्फीति की ओर बढ़ सकता है, और अक्टूबर 2025 में यह 0.5% तक पहुंच सकता है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि निकट भविष्य में मुद्रास्फीति का रुख कमजोर रहने की उम्मीद है, हालांकि 2026 के अंत तक इसमें मामूली वृद्धि हो सकती है।

सरकारी हस्तक्षेप और कृषि उत्पादन का प्रभाव

पीएचडीसीसीआई के सीईओ और महासचिव रंजीत मेहता ने बताया कि खाद्य और प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में गिरावट के कारण समग्र मुद्रास्फीति कम हुई है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि खाद्य और ऊर्जा की कम लागत, मजबूत कृषि उत्पादन, और वैश्विक वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता ने थोक कीमतों में नरमी को बढ़ावा दिया है। अच्छे मॉनसून और सरकारी हस्तक्षेप ने आपूर्ति पक्ष की स्थिति को मजबूत किया, जिससे आवश्यक वस्तुओं की खुदरा कीमतों में भी नियंत्रण रहा।

भविष्यवाणी और केंद्रीय बैंक की नीतियां

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने इस महीने की शुरुआत में बेंचमार्क नीतिगत दर को 5.5% पर अपरिवर्तित रखा था। वहीं, खुदरा मुद्रास्फीति भी सितंबर में 8 साल के निचले स्तर 1.5% पर पहुंच गई, जिससे आर्थिक स्थिति में कुछ राहत मिल रही है। आगे देखते हुए, जसराय ने कहा कि अक्टूबर 2025 में एक अनुकूल आधार प्रभाव की वजह से डब्ल्यूआईपी मुद्रास्फीति फिर से अपस्फीति की ओर बढ़ सकती है, और आगामी महीनों में थोक मुद्रास्फीति का रुख शांत रहने की उम्मीद है। आखिरकार आने वाले महीनों में खाद्य आपूर्ति में वृद्धि, स्थिर वैश्विक वस्तु कीमतें, और सरकारी नियंत्रण उपायों से थोक मुद्रास्फीति के कमजोर बने रहने की संभावना है। साथ ही, अच्छे मानसून के बाद खरीफ फसलों की कटाई और रबी फसलों की आपूर्ति से खाद्य मुद्रास्फीति पर भी काबू पाया जा सकता है।

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