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मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच FPI ने की भारी बिकवाली, मार्च में अब तक ₹52,704 करोड़ के शेयर बेचे

एफपीआई ने जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3765 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर पैसे निकाले थे।

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Image Source : FREEPIK पिछले 5 महीनों की सबसे बड़ी निकासी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, रुपये की कीमत में गिरावट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भारत की वृद्धि और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मार्च में अब तक घरेलू शेयर बाजार से 52,704 करोड़ रुपये (लगभग 5.73 अरब डॉलर) निकाल लिए हैं। इससे पहले फरवरी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो 17 महीने का सबसे ज्यादा प्रवाह था। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले एफपीआई लगातार तीन महीने तक शुद्ध बिकवाल रहे थे।

पिछले 5 महीनों की सबसे बड़ी निकासी

एफपीआई ने जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3765 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर पैसे निकाले थे। मार्च में अब तक (13 मार्च तक) एफपीआई ने लगभग 52,704 करोड़ की निकासी की है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एफपीआई की निकासी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। एंजल वन के वकार जावेद खान ने कहा कि इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय तक संघर्ष की आशंकाओं ने ब्रेंट क्रूड को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है। इसके अलावा रुपया 92 प्रति डॉलर के स्तर के आसपास कमजोर बना हुआ है। बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने के बीच एफपीआई अब बिकवाली कर रहे हैं। 

दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन के बाजार अभी ज्यादा आकर्षक

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट, रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत की वृद्धि और कॉरपोरेट की कमाई पर असर पड़ने की चिंताओं ने एफपीआई की धारणा को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि पिछले 18 महीने में विकसित और उभरते बाजारों की तुलना में भारत से कमजोर रिटर्न की वजह से भी एफपीआई की दिलचस्पी कम हुई है। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन को अभी ज्यादा आकर्षक बाजार के रूप में देखा जा रहा है।

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