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FPIs ने मई में अब तक ₹27,048 करोड़ निकाले, 2.2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंची इस साल की कुल निकासी

आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशक फरवरी को छोड़कर इस साल सभी महीनों में बिकवाल रहे हैं।

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Image Source : PIXABAY घरेलू बाजार से क्यों पैसा निकाल रहे हैं विदेशी निवेशक

वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की बिकवाली का सिलसिला जारी है। एफपीआई ने मई में अब तक भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से 27,048 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, इसके साथ ही 2026 में अबतक एफपीआई कुल 2.2 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। ये राशि पूरे 2025 में निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशक फरवरी को छोड़कर इस साल सभी महीनों में बिकवाल रहे हैं। 

इस साल सिर्फ फरवरी में आया शुद्ध निवेश

जनवरी में एफपीआई ने 35,962 करोड़ रुपये निकाले थे। हालांकि, फरवरी में उन्होंने 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो पिछले 17 महीने का सबसे बड़ा मासिक निवेश था। इसके बाद मार्च में रुख फिर बदल गया और विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। अप्रैल में भी बिकवाली जारी रही और एफपीआई ने 60,847 करोड़ रुपये निकाले। मई में भी ये प्रवृत्ति बनी हुई है। 

घरेलू बाजार से क्यों पैसा निकाल रहे हैं विदेशी निवेशक

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के चीफ मैनेजर (रिसर्च) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर अनिश्चितता, विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण उभरते बाजारों में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल ऊंचे स्तर पर रहने से विकसित बाजारों में निवेश अपेक्षाकृत ज्यादा आकर्षक हो गया है। इससे निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। हिमांशु ने कहा कि वैश्विक मुद्रास्फीति की दिशा और प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में संभावित कटौती को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेश निर्णयों को प्रभावित कर रही है।

रुपये पर बढ़ सकता है दबाव

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार ने कहा कि लगातार एफपीआई बिकवाली और चालू खाते के घाटे (कैड) में वृद्धि से रुपये पर दबाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि साल की शुरुआत में रुपया डॉलर के मुकाबले 90 के स्तर पर था, लेकिन 15 मई को ये गिरकर 96.14 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि अगर एफपीआई निकासी जारी रहती है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो रुपये में और कमजोरी आ सकती है। 

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