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FPIs ने पिछले हफ्ते 21,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर निकाले पैसे, मिडल-ईस्ट में बढ़ते तनाव ने चौपट किया बाजार

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3765 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर पैसे निकाले थे।

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Image Source : PIXABAY विदेशी निवेशकों ने जनवरी, दिसंबर और नवंबर में लगातार 3 महीनों तक की थी बिकवाली

इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद खाड़ी देशों में शुरू हुए युद्ध ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। मिडल-ईस्ट में लगातार बढ़ रहे तनाव की वजह से पिछले हफ्ते घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसी बीच, विदेशी निवेशकों (FPIs) ने पिछले हफ्ते 4 दिन के कारोबार में भारतीय बाजार से 21,000 करोड़ रुपये निकाल लिए। एफपीआई द्वारा फरवरी में भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये के निवेश के बाद ये ताजा बिकवाली हुई है। फरवरी का निवेश पिछले 17 महीनों में सबसे ज्यादा मासिक खरीदारी थी। इससे पहले एफपीआई लगातार तीन महीनों तक शेयर बेच-बेचकर पैसे निकाल रहे थे। 

विदेशी निवेशकों ने जनवरी, दिसंबर और नवंबर में लगातार 3 महीनों तक की थी बिकवाली

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3765 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर पैसे निकाले थे। ताजा निकासी 2-6 मार्च के दौरान हुई, जब एफपीआई ने 'कैश मार्केट' में लगभग 21,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। बताते चलें कि पिछले हफ्ते 3 मार्च को होली के मौके पर बाजार बंद थे। मार्केट एक्सपर्ट्स ने इस बिकवाली का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को बताया है। 

रुपये की गिरती वैल्यू ने भी विदेशी निवेशकों को बिकवाली के लिए किया मजबूर

एंजेल वन के सीनियर एनालिस्ट वकार जावेद खान ने कहा कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की धारणा पैदा हुई। इसके अलावा, भारतीय रुपया 92 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे चला गया, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में बढ़ोतरी हुई, जिससे बाजार की धारणा कमजोर हुई है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वी. के. विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर अनिश्चितता, बाजार में हालिया सुधार और कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने एफपीआई की बिकवाली में योगदान दिया है। 

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