अगले हफ्ते घरेलू शेयर बाजार की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर फैसलों, घरेलू मुद्रास्फीति के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों से तय होगी। शेयर बाजार एक्सपर्ट्स ने ये अनुमान जताया है। बताते चलें कि पिछले हफ्ते बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली थी। बीते सप्ताह बीएसई सेंसेक्स में 1,733.67 अंक यानी 2.26 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली थी। जबकि, एनएसई निफ्टी में 499.6 अंक यानी 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। सोमवार को गणेश चतुर्थी के मौके पर शेयर बाजार की छुट्टी रहेगी।
अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम और ब्रेंट क्रूड की चाल पर होगी खास नजर
रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजित मिश्रा ने कहा, ''ग्लोबल लेवल पर, अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम और ब्रेंट क्रूड की चाल बाजार के प्रमुख उत्प्रेरक बने रहेंगे। इस सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व का मौद्रिक नीति निर्णय और ब्याज दरों के भविष्य के रुख पर उसकी टिप्पणी पर भी नजर रहेगी।''
महंगाई दर और बेरोजगारी के आंकड़े भी तय करेंगे बाजार की दिशा
अजित मिश्रा ने कहा कि घरेलू मोर्चे पर अगस्त के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर के आंकड़ों के साथ ही बेरोजगारी और व्यापार संतुलन के आंकड़े भी चर्चा में रहेंगे। रिसर्च एनालिस्ट फर्म एचएसटी वेल्थ के फाउंडर और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने कहा, ''तात्कालिक नजर अमेरिकी महंगाई दर और फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसलों पर होगी।''
महंगाई के जोखिमों के चलते ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और डॉलर पर बढ़ सकता है दबाव
हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने कहा कि महंगाई के जोखिमों के चलते ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और डॉलर पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए 15-16 सितंबर को होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की मीटिंग इस हफ्ते की प्रमुख वैश्विक उत्प्रेरक होगी। उन्होंने कहा कि भारत के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ा बाहरी जोखिम बना हुआ है। अगर पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की सप्लाई में बाधा बढ़ती है और कीमतों में तेजी आती है, तो इससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, आयात का बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और कंपनियों का मार्जिन घट सकता है।
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