नई दिल्ली: जब कोई कंपनी आपको किसी खास पद के लिए चुनती है तो वह एक लेटर देती है जिसमें इन हैंड सैलेरी से लेकर उन तमाम सुविधाओं का डेटा मौजूद होता है जो कंपनी अपने हर कर्मचारी को मुहैया कराती है। इस पूरे डाटा को HR की भाषा में CTC कहा जाता है। जैसा कि आप जानते है आपकी सैलेरी पर एक निश्चित राशि करयोग्य होती है लेकिन हम में से अधिकांश लोग सिर्फ यही मानते है कि यह कटौती सिर्फ TDS के मद में ही होती है। हम अपनी खबर में बताएंगे कि आपकी CTC के किन किन हिस्सों पर टैक्स देनदारी बनती है।
कुल CTC में से ऐसे निकाले करयोग्य सैलरी
- सैलरी में काफी सारे करयोग्य और करमुक्त हिस्से शामिल होते हैं।
- सैलरी के करयोग्य हिस्सों में बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता, विशेष भत्ते, बोनस,परफार्मेंस बोनस, एनुअल रिटेंसन बोनस।
- आमदनी के करयोग्य हिस्सों में मुफ्त आवास और रियायती दरों पर मिलने वाले घर,किफायती दरों पर मिलने वाली वाहन सेवा, कर्मचारियों के मिलने वाले स्टॉक विकल्प और ब्याजमुक्त कर जैसे अनुलाभ भी आते हैं।
- सैलरी या आमदनी के करमुक्त हिस्सों में एचआरए, एलटीए, मेडिकल खर्चे, नियोक्ता की ओर से ईपीएफ और एनपीएस के आपके खाते में जमा की गई, ग्रुप मेडिक्लेम, जीवन और दुर्घटना बीमा की राशि भी आती है।
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