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Insurance Myths: बारिश के बाढ़ में डूब गई कार? जानिए कौन सा मोटर इंश्योरेंस आएगा आपके काम

कौन सा इंश्योरेंस बाढ़ के चलते आपकी कार को हुए नुकसान को कवर करता है। क्या आपको इंश्योरेंस के साथ कुछ टॉपअप लेने होते हैं। आइए इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं।

बाढ़ में डूबी कार? कौन सा इंश्योरेंस आएगा काम- India TV Paisa Image Source : FILE बाढ़ में डूबी कार? कौन सा इंश्योरेंस आएगा काम

Insurance Myths: मानसून के मौसम हर सााल अपने साथ प्राकृतिक आपदाएं भी लेकर आता है। बीते हुछ वर्षों की तरह इस साल भी पहाड़ों पर भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं, वहीं मैदानी इलाके बाढ़ की चपेट में हैं। इस साल दिल्ली भी बाढ़ से अछूती नहीं रही और यमुना किनारे का एक बड़ा हिस्सा इस साल जलमग्न हो गया। फिलहाल मुंबई और गुजरात के कई शहर बाढ़ का सामना कर रहे हैं। 

शहरी इलाकों में बाढ़ के चलते कई सड़कें ही नहीं बल्कि हाउसिंग सोसाइटी में भी पानी भर गया है। वहीं बेसमेंट पार्किंग में पानी भरने की भी समस्या दिख रही है। अचानक हुई बारिश से कई लोग रास्ते में ही फंस गए और किसी अंडरपास या सड़क पर उनकी कारें अचानक बंद पड़ गई। कार के डूबने पर इंजन में पानी जाने का डर होता है, साथ ही कार का इंटीरियर भी खराब हो जाता है। मतलब ये कि बैठे बैठाये मोटा खर्च आपके सिर पर आ गया है। ऐसे में वाहन इंश्योरेंस (Car Insurance) आपके काम आ सकता है। लेकिन सवाल उठता है कि कौन सा इंश्योरेंस बाढ़ के चलते आपकी कार को हुए नुकसान को कवर करता है। क्या आपको इंश्योरेंस के साथ कुछ टॉपअप लेने होते हैं। आइए इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं। 

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कितनी तरह के होते हैं कार इंश्योरेंस 

आमतौर पर वाहन इंश्योरेंस के मामले में दो इंश्योरेंस कैटेगरी आती हैं। पहला थर्ड पार्टी इंश्योरेंस, जिसमें वाहन के एक्सिडेंट की स्थिति में इंश्योरेंस लेने वाले को तो कोई लाभ नहीं होता है, लेकिन दूसरा व्यक्ति जिसके वाहन या स्वयं उसे नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई थर्ड पार्टी इंश्योरेंस से होती है। थर्ड पार्टी इंश्योरेंस को सरकार ने सभी वाहनों के लिए अनिवार्य किया है। यदि आपको वाहन के नुकसान को क्लेम करना है तो आपको कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस खरीदना होगा। इसमें कंपनियां दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा, चोरी आदि के मामले में क्लेम का भुगतान करती हैं। 

कार डूबने पर कौन से इंश्योरेंस से लाभ

जैसा हमने पहले ही बताया कि कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस में ही आपको कार को होने वाले नुकसान को क्लेम करने का विकल्प मिलता है। यह इंश्योरेंस पॉलिसी प्राकृतिक आपदाओं, एक्सीडेंट, चोरी आदि से सुरक्षा प्रदान करती है। आप कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस के बाद जीरो डेट का टॉपअप भी ले सकते हैं। ऐसे में यदि आपने कार का इंश्योरेंस करा रखा है तो आपको इस तरह की सभी समस्याओं में इसका फायदा मिल सकता है। इसमें आपको खराब मौसम की वजह से गाड़ी को हुए नुकसान को दुरुस्त कराने या इसे रिप्लेस करने का कवर मिलता है। 

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कुछ कंपनियां प्राकृतिक आपदा पर लगाती हैं शर्त 

बता दें कि प्राकृतिक आपदा वाला विकल्प चुनिंदा पॉलिसियों में ही होता है। ऐसे में इंश्योरेंस लेने से पहले हालांकि यह पॉलिसी वैकल्पिक होती है। ऐसे में इंश्योरेंस पॉलिसी रिन्यू करते समय यह जरूर चेक कर लें कि आपके इंश्योरेंस में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान पर कवर मिलेगा या नहीं।

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क्या थर्ड पार्टी इंश्योरेंस से मिलेगा लाभ

हम पहले ही बता चुके हैं कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस सिर्फ आपके वाहन से क्षतिग्रस्त होने वाले दूसरे वाहन को ही कवर प्रदान करता है। सीधे अर्थों में कहें तो आप कभी भी स्वयं अपनी गाड़ी को हुए नुकसान का क्लेम थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में नहीं कर सकते हैं।इसके लिए आपके पास ​कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी होनी चाहिए।

गाड़ी डूबे तो न करें ये काम 

यदि जलभराव के कारण आपकी कार डूब जाती है और बंद पड़ जाती है, साथ ही कार के इंजन में पानी चला गया है तो उसे स्टार्ट करने की कोशिश कभी न करें। सड़क गाड़ी के डूबने या उसमें पानी भरने की स्थिति में उसकी तुरंत वीडियो रिकॉर्डिंग और फोटो जरूर लें। यह आपके लिए सबूत का काम करेंगे। इंश्योरेंस क्लेम करते समय आवश्यक दस्तावेजों की जरूरत होते है उन्हें जरूर पेश करें। ध्यान रखें कि यदि आपने मौजमस्ती में जानबूझ कर पानी वाले स्थान में कार को लेजाने की कोशिश की है तो कॉम्प्रिहेंसिव कवर होने के बाद भी बीमा कंपनी आपके क्लेम को रिजेक्ट कर सकती है। 

पानी से होता है ये नुकसान

बारिश के दौरान सड़कों पर जलभराव से गाड़ियों को कई तरह के नुकसान पहुंच सकते हैं। गाड़ी में अगर पानी घुस जाए तो दो तरह का नुकसान हो जाता है। इसमें गाड़ी का इंजन खराब हो सकता है। वहीं दूसरा इलेक्ट्रिकल सिस्टम और एक्सेसरीज को नुकसान हो सकता है। इंजन में पानी घुसने पर बड़ा खर्चा आता है। कई मामलों में यह 1 लाख रुपये से ज्यादा भी हो सकता है। एक्सेसरीज को रिपेयर करने में भी बहुत खर्चा आता है।

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