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Hindi News पैसा फायदे की खबर Gold Outlook 2023: वैश्विक मंदी बढ़ाएगा सोने की चमक, अगले एक साल में इतना हजार हो सकता है मंहगा

Gold Outlook 2023: वैश्विक मंदी बढ़ाएगा सोने की चमक, अगले एक साल में इतना हजार हो सकता है मंहगा

घरेलू मोर्चे पर सोने की मांग मजबूत बनी है। आपको बता दें कि चीन के बाद भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है।

सोने की चमक- India TV Paisa Image Source : PTI सोने की चमक

Gold Outlook 2023: सोने में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। रूस-यूक्रेन संकट, वैश्विक मंदी की आशंका और एक बार फिर कोरोना महामारी की दस्तक से सोने की चमक और तेज होगी। कमोडिटी विशेषज्ञों का कहना है कि अगले एक साल में सोने की कीमत में तेजी से बढ़ोतरी होगी। केडिया कमोडिटीज के डायरेक्‍टर अजय केडिया का कहना है कि 2023 में सोने की कीमतें 62,000 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। सोने में पहला रेजिस्‍टेंस 56,200 रुपये, दूसरा लेवल 59,450 रुपये और तीसरा रेजिस्‍टेंस लेवल 62,000 रुपये प्रति दस ग्राम रह सकता है। आपको बता दें कि अभी सोने का भाव 55,225 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। यानी यहां से सोने में 7000 रुपये की बढ़ोतरी अगले साल में देखने को मिल सकती है। 

घरेलू मांग में मजबूती बनी हुई 

घरेलू मोर्चे पर सोने की मांग मजबूत बनी है। आपको बता दें कि चीन के बाद भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। भारत अपनी घरेलू मांगों को पूरा करने के लिए दुनिया के कई देशों से सोने का आयात करता है। इससे भारत का व्यापार घाटा बढ़ा है। व्यापार घाटे को कम करने और रुपये पर दबाव को कम करने के लिए भारत सरकार ने जुलाई में सोने पर आयात कर 7.5% से बढ़ाकर 12.5% कर दिया था। हालांकि, इससे मांग में कमी नहीं आई और विश्व स्वर्ण परिषद के अनुसार, भारत की सोने की मांग एक साल पहले की तुलना में 14% बढ़कर सितंबर में समाप्त तिमाही में 191.7 टन हो गई। घरेलू मांग भी सोने की कीमत बढ़ाने का काम करेंगे। 

ये कारण भी दाम बढ़ाने में करेंगे मदद 

सितंबर को समाप्त तिमाही में, दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों ने लगभग 400 टन सोना खरीदा है। मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाले समय में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी के डर से सोने की मांग और बढ़ेगी। ये कीमत बढ़ाने का काम करेंगे। इसके साथ ही हर साल गोल्‍ड की एक सीजनल डिमांड आती है। इस दौरान कीमत तेजी से बढ़ती है। भारत में यह समय जुलाई और अक्‍टूबर के बीच का होता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि ज्‍यादातर एशियाई देशों से त्योहारी मांग आती है। साथ ही दुनिया के अन्‍य देशों से क्रिसमस व न्‍यू ईयर सेलिब्रेशन का सपोर्ट कीमतों को मिलता है।

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