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GST: सस्ते हो जाएंगे घी-मक्खन, साबुन, जूते-चप्पल सहित कई सामान! सरकार कर रही जीएसटी स्लैब में बदलाव पर विचार

रोजमर्रा के सामानों पर लगाए जाने वाले 12 प्रतिशत की जीएसटी दर के स्लैब को कम करने के लिए राज्यों की सहमति भी बेहद जरूरी होगी। स्लैब में कमी करने से मध्यम और निम्न मध्यवर्ग को फायदा होगा।

जीएसटी दर के स्लैब को कम करने के लिए राज्यों की सहमति भी बेहद जरूरी होगी। - India TV Hindi
Image Source : PIXABAY जीएसटी दर के स्लैब को कम करने के लिए राज्यों की सहमति भी बेहद जरूरी होगी।

रोजमर्रा की जरूरतों वाले सामान की कीमतों में आने वाले दिनों में गिरावट देखने को मिल सकती है। दरअसल, सरकार इन सामानों पर लगने वाले 12 प्रतिशत के जीएसटी स्लैब रेट में कटौती करने पर विचार कर रही है। लाइवहिन्दुस्तान की खबर के मुताबिक, ऐसा होने पर घी-मक्खन, साबुन, जूते-चप्पल सहित कई सामान सस्ते दाम पर उपलब्ध होंगे। खबर के मुताबिक, सरकार का इरादा मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास को राहत देना है। सरकार 12 प्रतिशत के जीएसटी स्लैब को घटाकर 5 प्रतिशत लाने पर विचार कर रही है।

चीजें जो हो सकती हैं सस्ती

खबर के मुताबिक, सरकार अगर 5 प्रतिशत जीएसटी स्लैब को लागू करती है तो आपको 1000 रुपये कीमत से कम के जूते और कपड़े सस्ते दाम पर मिलेंगे। डेयरी प्रोडक्ट की बात करें तो घी, मक्खन, पनीर, डेयरी स्प्रेड के भी दाम घटेंगे। इसके अलावा, प्रोसेस्ड मांस-मछली, टॉफी-कैंडी और डेयरी ड्रिंक्स, सिरका, सब्जियां, फल ड्राई फ्रूट्स, नमकीन, भुजिया, सोया बरी, कॉटन हैंड बैग, 20 लीटर सील बंद पानी बोतल, चश्मा, पेंसिल, खेल के सामान, पास्ता, नूडल्स, मैकरोनी फलों की जेली,मशरूम आदि सस्ते दाम पर उपलब्ध होंगे।

राज्यों की सहमति होगी अहम

रोजमर्रा के सामानों पर लगाए जाने वाले 12 प्रतिशत की जीएसटी दर के स्लैब को कम करने के लिए राज्यों की सहमति भी बेहद जरूरी होगी। केंद्र सरकार को इसके लिए राज्य सरकारों को तैयार करना होगा, क्योंकि स्लैब को घटाकर 5 प्रतिशत करने से उनके टैक्स रेवेन्यू में गिरावट आ सकती है। हालांकि, ग्राहकों को इसका काफी फायदा होगा। अगली जीएसटी परिषद की मीटिंग में इस पर फैसला लिया जा सकता है। वित्त मंत्री ने भी पहले कहा है कि हम मध्यम और निम्न मध्यवर्ग को ध्यान में रखते हुए सही फैसला करेंगे।  

वैकल्पिक रूप से, सरकार 12% स्लैब को पूरी तरह से खत्म करने और वस्तुओं को मौजूदा निचले या हाई स्लैब में रीअलॉट करने का विकल्प चुन सकती है। सरकार अगर यह फैसला लेती है तो इससे जनसंख्या के एक बड़े हिस्से द्वारा उपभोग की जाने वाली आवश्यक वस्तुओं पर मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। 

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