First Republic Bank JP Morgan: अमेरिका के अमीरों का बैंक कहे जाने वाले फर्स्ट रिपब्लिक बैंक का बैंक जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी ने अधिग्रहण कर लिया है। यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी तीन बार इसे बचाने की कोशिश की जा चुकी है और उस चक्कर में यह बैंक तीन बार अलग-अलग हाथों में बिक चुका है। साल 2007 में मेरिल लिंच एंड कंपनी ने 1.8 अरब डॉलर में फर्स्ट रिपब्लिक बैंक को खरीदा था। इसके बाद 2009 में इसे बैंक ऑफ अमेरिका ने खरीदा। इसके बाद साल 2010 में इन्वेस्टमेंट फर्म जनरल अटलांटिक और कॉलोनी कैपिटल ने इसे 1.86 अरब डॉलर में खरीदा। इसके बाद इसे पब्लिक कर दिया गया।
क्यों डूबा ये बैंक?
बैंक को बचाने के सभी प्रयासों के विफल होने के बाद ऐसा किया गया है। यहां सबसे खास बात यह है कि जेपी मॉर्गन फर्स्ट रिपब्लिक के सभी एसेट का अधिग्रहण करेगा, और इस एसेट की कीमत 229.1 बिलियन डॉलर के करीब है। यह आंकड़ा 13 अप्रैल को आई एक रिपोर्ट पर आधारित है। ये जान लीजिए कि बैंक के इतने बुरे दिन कैसे आ गए? दरअसल, फेडरल रिजर्व ने महंगाई से लड़ने के लिए ब्याज दरों में तेजी से बढ़ोतरी की और इधर डिपॉजिटरों ने बैंक से कुल जमा राशि से आधे पैसे निकाल लिए। आंकड़ों में देखें तो पहले तीन महीनों में 102 बिलियन डॉलर निकाल लिए गए। 2022 के अंत में बैंक का डिपॉजिट 176 बिलियन डॉलर के करीब था। बैंक ने इस दौरान 92 बिलियन डॉलर उधार भी लिए थे। यह खबर जैसे ही फैली बैंक के शेयर धड़ाम से नीचे आ गए।
इस वजह से बर्बाद हुआ था अमेरिका का एक और बैंक
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने पिछले महीने सिलिकॉन वैली बैंक (एसवीबी) के धराशायी होने के लिए बेहद खराब बैंक प्रबंधन, कमजोर नियमन और शिथिल सरकारी निगरानी के मिले-जुले असर को जिम्मेदार बताया। फेडरल रिजर्व की तरफ से एसवीबी के डूबने के पीछे की वजह तलाशने के लिए यह समीक्षात्मक रिपोर्ट तैयार कराई गई है। इसके मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े इस बैंक के नियमन एवं निगरानी से जुड़ी चूक ने इसके पतन की इबारत लिखी। फेडरल रिजर्व के उप प्रमुख माइकल बॉर की अगुवाई में तैयार रिपोर्ट कहती है कि केंद्रीय बैंक की कार्य संस्कृति की भी इसमें भूमिका रही है जिसमें पर्यवेक्षक समस्या को बढ़ता हुआ देखने पर भी बैंक प्रबंधन पर सख्त रुख नहीं अख्तियार कर पाते हैं। कई वर्षों तक उद्यम पूंजी फर्मों और प्रौद्योगिकी स्टार्टअप का पसंदीदा रहा सिलिकॉन वैली बैंक मार्च की शुरुआत में अचानक डूब गया था। इसकी वजह से समूची अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली के प्रति एक तरह का अविश्वास पैदा हुआ था।
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