इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के दो प्रमुख कर्मचारी संगठन सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की योजना बना रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी लंबित मांगों और कामकाज के मुश्किल हालातों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे 16 अप्रैल से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे। आयकर कर्मचारी महासंघ और आयकर राजपत्रित अधिकारी संघ की भागीदारी वाली संयुक्त कार्रवाई परिषद (JCA), आयकर विभाग के लगभग 97 प्रतिशत कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करती है। ये कर्मचारी ही सरकार के लिए राजस्व संग्रह का काम करते हैं।
संयुक्त कार्रवाई परिषद ने राजस्व सचिव को लिखी थी चिट्ठी
संयुक्त कार्रवाई परिषद ने 6 अप्रैल को राजस्व सचिव को हड़ताल के सिलसिले में एक चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में उन्होंने कहा था कि वो अपनी 10 मांगों पर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की 'लगातार उदासीनता' के कारण ये कदम उठा रहा है। बताते चलें कि सीबीडीटी ही आयकर विभाग की नीतियों को तय करता है। कर्मचारी संगठनों ने कहा कि प्रोमोशन में देरी, अतार्किक ढंग से होने वाले सालाना तबादले, मुश्किल सेवा शर्तें, काम का अत्यधिक बोझ, अव्यावहारिक लक्ष्य और कर्मचारियों एवं बुनियादी ढांचे की कमी ने कर्मचारियों को 'कठिन परिस्थितियों' में लाकर खड़ा कर दिया है।
13 मई को हड़ताल करने की योजना
संयुक्त कार्रवाई परिषद ने राजस्व सचिव को भेजी गई अपनी चिट्ठी में चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों का समय पर समाधान नहीं हुआ तो 16 अप्रैल को दोपहर के ब्रेक के समय प्रदर्शन से आंदोलन की शुरुआत होगी। इसके बाद काली पट्टी पहनने, सांख्यिकीय रिपोर्ट जमा न करने जैसे कदम उठाए जाएंगे और 13 मई को एक दिन की हड़ताल तक आंदोलन तेज किया जाएगा। जेसीए ने कहा कि कैडर समीक्षा और पुनर्गठन का काम पिछले 13 सालों से लंबित है, जिससे प्रोमोशन में लगातार देरी बढ़ रही है और विभाग की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
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