जोधपुर नगर निगम चुनाव के नतीजों के बाद अब शहर की सियासत का सबसे बड़ा सवाल सामने है कि नगर निगम का बोर्ड आखिर बनाएगा कौन? 100 वार्डों वाले निगम में बहुमत के लिए 51 पार्षदों का समर्थन जरूरी है, लेकिन फिलहाल किसी भी दल के पास अपने दम पर यह आंकड़ा नहीं है। अंतिम दलवार स्थिति में भाजपा के 45, कांग्रेस के 44, निर्दलीय के 10 और आरएलपी का एक पार्षद है। यानी भाजपा बहुमत से 6 कदम दूर है, जबकि कांग्रेस को बहुमत के लिए 7 पार्षदों की जरूरत है। यही वजह है कि चुनाव परिणाम आने के बाद से ही निगम की सत्ता का गणित लगातार बदलता नजर आ रहा है।
10 निर्दलीय बने ‘किंगमेकर’
जोधपुर निगम में सबसे ज्यादा चर्चा उन 10 निर्दलीय पार्षदों की है, जिन्होंने चुनाव जीतकर दोनों प्रमुख दलों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। कांग्रेस खेमे का दावा है कि इनमें से 6 कांग्रेस के बागी उम्मीदवार हैं, जबकि भाजपा खेमे से भी बागी होकर चुनाव मैदान में उतरे कुछ उम्मीदवार निर्दलीय के रूप में जीते हैं। ऐसे में सवाल केवल संख्या का नहीं, बल्कि राजनीतिक रिश्तों और निष्ठाओं का भी है। अगर निर्दलीय पार्षद अपने मूल दलों के साथ वापस जाते हैं तो बहुमत का गणित काफी हद तक साफ हो सकता है। लेकिन यदि वे स्वतंत्र समूह के रूप में अपनी भूमिका तय करते हैं तो महापौर चुनाव में उनकी अहमियत और बढ़ जाएगी।
आज दाखिल हुए दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के नामांकन
महापौर चुनाव के नामांकन की अंतिम तारीख पर भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने प्रत्याशियों के नामांकन दाखिल कर दिए। भाजपा की ओर से प्रसन्नचंद मेहता ने नामांकन दाखिल किया, जबकि कांग्रेस ने राजेंद्र सिंह सोलंकी को मैदान में उतारा है। दिलचस्प बात यह है कि राजेंद्र सोलंकी इस बार पार्षद का चुनाव नहीं लड़े थे। ऐसे में महापौर पद के लिए उनके नामांकन ने राजनीतिक चर्चा को और बढ़ा दिया है। जोधपुर नगर निगम महापौर पद सामान्य है और निर्वाचित निकाय के सदस्य इस पद के लिए पात्र हैं। लेकिन हाइब्रिड व्यवस्था के तहत सोलंकी का नामंकन हुआ है।
भाजपा का दावा है कि ‘हमारे पास 54 पार्षद’
नामांकन के बाद नगर निगम के बाहर भाजपा के चुनाव संयोजक भूपेंद्र सैनी ने बड़ा दावा किया। उनका कहना है कि भाजपा के पास कुल 54 पार्षदों का समर्थन है। यदि यह दावा मतदान तक कायम रहता है तो 51 के बहुमत के आंकड़े से भाजपा आगे निकल जाएगी। सैनी ने इसके साथ ही दावा किया कि कांग्रेस के चार और पार्षद उनके संपर्क में हैं। हालांकि ये राजनीतिक दावे हैं और वास्तविक स्थिति का अंतिम प्रमाण महापौर चुनाव में होने वाला मतदान ही देगा।
कांग्रेस बोले- ‘बागी घर लौटेंगे’
दूसरी ओर कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी राजेंद्र सोलंकी ने भी अपने पत्ते खोलते हुए दावा किया कि कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय के रूप में चुनाव जीतने वाले पार्षद वापस पार्टी में लौटेंगे। यदि कांग्रेस के बागी पार्षद वास्तव में कांग्रेस के साथ आते हैं तो 44 के आंकड़े में उनकी संख्या जुड़ने से मुकाबला सीधे बहुमत के करीब पहुंच सकता है। लेकिन यहां भी असली सवाल यही है कि कितने निर्दलीय वास्तव में किस खेमे के साथ मतदान करेंगे।
एक-एक पार्षद पर नजर
- भाजपा: 45 निर्वाचित + समर्थन का दावा करके 54 का आंकड़ा बता रही है।
- कांग्रेस: 44 निर्वाचित + अपने बागी निर्दलीयों के वापस आने का दावा कर रही है।
- निर्दलीय 10 पार्षद, जिनके रुख पर सत्ता का गणित निर्भर कर सकता है।
- आरएलपी 1 पार्षद, जिसकी भूमिका भी संख्या के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।
- महापौर चुनाव 25 सितंबर को होना है।
जोधपुर की सियासत में अब सवाल एक ही—‘बोर्ड किसका?’
चुनाव परिणाम ने किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई, लेकिन बहुमत से छह सीट दूर है। कांग्रेस एक सीट पीछे है और उसे बहुमत के लिए सात का आंकड़ा जुटाना होगा। अब दोनों दलों के दावों के बीच असली कहानी उन पार्षदों की है, जिनके पास सत्ता की चाबी पहुंच गई है। कौन किसके साथ जाएगा? कौन अपना पुराना राजनीतिक घर वापस चुनेगा? और कौन अंतिम समय तक अपना पत्ता नहीं खोलेगा? इन सवालों का जवाब आने तक जोधपुर नगर निगम की राजनीति में 51 का आंकड़ा’ ही सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न बना रहेगा। इससे पहले बीजेपी ने झुंझुनूं जिले की खेतड़ी नगरपालिका में कांग्रेस से जीती पार्षद गीता सैनी को चेयरमैन प्रत्याशी बनाकर सारे समीकरण ही बदल दिए थे।
रिपोर्टः चंद्रशेखर व्यास
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