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अजमेर में आखिरकार कांग्रेस की जीत, किरण गढ़वाल लड़ेंगी मेयर का चुनाव, BJP की आपत्ति खारिज

 Written By: Kajal Kumari
 Published : Sep 17, 2026 07:22 pm IST,  Updated : Sep 17, 2026 08:59 pm IST

राजस्थान के अजमेर में कांग्रेस को मेयर चुनाव से पहले बड़ी जीत मिली है। भाजपा की आपत्ति को खारिज कर दिया है। इसके बाद तय हो गया है कि कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल मेयर चुनाव लड़ेंगी।

अजमेर मेयर चुनाव के उम्मीदवार- India TV Hindi
अजमेर मेयर चुनाव के उम्मीदवार Image Source : REPORTER

अजमेर नगर निगम में मेयर पद के नामांकन की जांच के दौरान भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा की ओर से कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल के खिलाफ लगाई गई आपत्ति को खारिज कर दिया गया है। आपत्ति में नगर निगम की बकाया राशि और नामांकन में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था। आपत्ति खारिज होने के बाद किरण गढ़वाल का नामांकन बरकरार, अब मेयर पद के लिए अनामिका शर्मा और किरण गढ़वाल के बीच मुकाबला तय हो गया है। अजमेर नगर निगम में मतदान 21 सितंबर को होगा।


मेयर चुनाव के लिए सियासी घमासान 
अजमेर में नगर निगम चुनाव के बाद अब मेयर पद के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसकी वजह है कि 80 वार्डों वाले अजमेर नगर निगम में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। एक तरफ कांग्रेस 37 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि भाजपा के खाते में 32 सीटें आई हैं। वहीं 11 निर्दलीय पार्षदों ने जीत दर्ज की है। ऐसे में बोर्ड गठन और मेयर चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों ने भरा नामांकन
मेयर पद के लिए भाजपा की ओर से अनामिका शर्मा ने नामांकन दाखिल किया है, जबकि कांग्रेस की तरफ से किरण गढ़वाल ने नामांकन दर्ज कराया है। किरण गढ़वाल वार्ड 57 से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर पार्षद बनी हैं। ऐसे में कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी के पास बोर्ड बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने की स्थिति है। वहीं भाजपा भी अपने पक्ष में बहुमत होने का दावा कर रही है। अजमेर में मेयर पद के चुनाव के लिए बहुमत का आंकड़ा 41 है। ऐसे में कांग्रेस को बहुमत के लिए चार पार्षदों के समर्थन की जरूरत है, जबकि भाजपा को नौ पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा।

जोड़ तोड़ की चल रही तैयारी
वहीं चुनाव से पहले जोड़-तोड़ की संभावनाओं के बीच कांग्रेस और भाजपा ने अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए उन्हें अलग-अलग स्थानों पर रखा है। कांग्रेस के पार्षदों को अजमेर से बाहर ले जाया गया है और उनके बेंगलुरु शिफ्ट किए जाने की भी चर्चा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

(अजमेर से राजकुमार वर्मा की रिपोर्ट)

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