हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही पूर्णिमा के दिन दान करने का भी विधान है। धार्मिक मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन किसी गरीब और जरूरतमंद को दान करने से धन-धान्य में बरकत होती है। भाद्रपद माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को भाद्रपद पूर्णिमा कहा जाता है। इस साल 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा का स्नान-दान और व्रत किया जाएगा। तो आइए जानते हैं पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में।
भाद्रपद पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 25 सितंबर को रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि समाप्त 26 सितंबर को रात 10 बजकर 18 मिनट पर होगा। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन स्नान दान के लिए पहला मुहूर्त सुबह 4 बजकर 53 मिनट से सुबह 6 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। वहीं विजय मुहूर्त का आरंभ दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर और समाप्त दोपहर 3 बजकर 18 मिनट पर होगा।
भाद्रपद पूर्णिमा पूजा विधि
- पूर्णिमा के दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि कर लें और फिर साफ सुथरे वस्त्र पहनें।
- इसके बाद अगर पूर्णिमा का व्रत रख रहे हैं तो सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद व्रत का संकल्प लें।
- अब घर के मंदिर में ईशान कोण पर एक लकड़ी की चौकी रखें।
- चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। फिर उस पर लक्ष्मी जी और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- विष्णु जी को चंदन और माता लक्ष्मी को सिंदूर का तिलक लगाएं। फिर ताजे फूल अर्पित करें।
- भगवान की मूर्ति के सामने घी का दीया और धूप जलाएं।
- इसके बाद पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें।
- विष्णु जी और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करने के बाद आरती करें।
- अब मां लक्ष्मी और नारायण को फल, मिठाई या खीर का भोग लगाएं।
- शाम के समय चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा को कच्चे दूध से अर्घ्य दें।
- चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पूर्णिमा व्रत का पारण करें।
भाद्रपद पूर्णिमा 2026 चंद्रोदय का समय
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम 6 बजकर 18 मिनट पर होगा। बता दें कि पूर्णिमा का व्रत बिना चंद्र दर्शन के अधूरा माना जाता है। पूर्णिमा का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूरा होता है और पारण भी चंद्र देव की पूजा के बाद ही किया जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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