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जितिया व्रत पर गूंजते हैं ये पारंपरिक लोकगीत, 'जुग-जुग जिए मोर बबुआ..' से लेकर जितिया के पर्व तक, पढ़ें पूरे लिरिक्स

जितिया व्रत से जुड़े लोकगीत इस पर्व की पारंपरिक संस्कृति का अहम हिस्सा माने जाते हैं। इन गीतों में संतान के लिए मां की ममता और मंगलकामना देखने को मिलती है। इन लोकगीतों के बिना पर्व अधूरा है। यहां पढ़ें जितिया के लोकप्रिय गीतों के पूरे बोल।

Jitiya Vrat Geet Lyrics, जीवित्पुत्रिका व्रत के गीत, जितिया व्रत के गीत- India TV Hindi
Image Source : MAGNIFIC जीवित्पुत्रिका व्रत के गीत

जितिया व्रत यानी जीवित्पुत्रिका व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखा जाता है। साल 2026 में जीवितपुत्रिका व्रत 3 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। इस दौरान पूजा-पाठ के साथ पारंपरिक लोकगीत गाने और सुनने की भी खास परंपरा है। इन गीतों में मां की अपने बच्चों के लिए लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना झलकती है। यही वजह है कि जितिया के मौके पर गांव-घर में इन गीतों की गूंज सुनाई देती है। जितिया के ये लोकगीत माताओं की भावनाओं से जुड़े हैं। यहां पढ़िए 'जुग जुग जिए मोर बबुआ दुलरुवा' समेत जितिया के खास गीत...

जितिया के गीत 1ः  जुग जुग जिए मोर बबुआ दुलरुवा

जुग जुग जिए मोर बबुआ दुलरुवा
जुग जुग जिए मोर
जुग जुग जिए मोर बबुआ दुलरुवा
जिउत वहांन देवता से करब हम अरजिया

ऐ हो सखी भुखीब
ऐ हो सखी भुखीब

जितिया के परबिया…

बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
बड़ा भारी होला

तीन दिन के होला सखी पावन परबिया
न खाये उपवास पारण के बा बिधिया
आशीन अनहरिया के अस्टमी तिथि के

जीवतिया पुजाला निरजल व्रत रख के
सासु जी से पूछब
सासु जी से
सासु जी से पूछब कुल व्रत के नियमिया…

ऐ हो सखी भुखीब
ऐ हो सखी भुखीब

जितिया के परबिया…

बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
बड़ा भारी होला

सप्तमी के दिने होला गंगा आसन्नवा
नवनि संग मडवा वर्ती खाये एहि दिनवा
नेनुवाके पातपर पुवा पकवनवा
चील सियारिन दिहल जाला भोगवा

गोतनि सग करब हम
गोतनि सग
गोतनि सग करब हम
भोर में सरगहिया

ऐ हो सखी भुखीब
ऐ हो सखी भुखीब

जितिया के परबिया…

बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
बड़ा भारी होला

लव कुश पुजला सखी अष्टमी के संझिया
कथा सुनीली बूढ़ होके चाहे कन्या
नवमी के भोर होला पारण के दिनवा
कांडा गिराउके बनेला भोजनवा

सईया से मगाइब हम
उत्तम जी से
खुसबू मगाइये सोने के जिउतिया

ऐ हो सखी भुखीब
ऐ हो सखी भुखीब

जितिया के परबिया…

बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
बड़ा भारी होला…

जितिया के गीत 2ः जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो...

तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए

तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए

तोहरो जीनगीया के दिही सवार हो
जिऊत वाहन देव अर्जी करीह स्वीकार हो

चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो

चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
हमरो दुलरवा के नजरों ने लागे
रहीह तू हरदम सबका से आगे

पढ़ लिख के बबुआ खूब नाम कमईह
कौनो परेशानी से तू कबहू ना डेरईह

जीऊत वाहन देव के बा महिमा अपार हो
एही से त निर्जल भूकल बानी त्यौहार हो

चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो

चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो

हमरो उमर तोहरा के लग जाए
रोग बल्ला कोई छू नहीं पाई

पावन परब हम तोहरे ला करिले
कवनो ना गलती होखे ध्यान हम धरीले

तोहरे से रोशन बा अंगना हमार हो
कबहु भुलइह ना माई के दुलार हो

चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो

चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो...

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