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Jitiya Vrat 2026 Live: जितिया व्रत कब है 3 या 4 अक्टूबर, जानें सही डेट, व्रत विधि, मुहूर्त और पारण समय

 Written By: Laveena Sharma
 Updated : Oct 02, 2026 12:39 pm IST

जितिया व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रहती हैं और शुभ मुहूर्त में विधि विधान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। यहां आप जानेंगे जितिया व्रत की पूजा विधि, मुहूर्त, कथा, मंत्र, आरती समेत सभी जरूरी बातें।

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जितिया व्रत 2026 Image Source : INDIA TV

Jitiya Vrat 2026 Puja Vidhi, Muhurat, Katha, Aarti, Mantra Live Update: जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। मुख्य रूप से यह पर्व बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए 24 घंटे तक निर्जला व्रत रहती हैं। व्रत की शुरुआत सप्तमी तिथि पर नहाय खाय के साथ होती है और समाप्ति मातृ नवमी के दिन व्रत का पारण करके होती है। बता दें इस साल यह व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। जबकि 2 अक्टूबर को इस व्रत का नहाय खाय रहेगा। चलिए जानते हैं जितिया व्रत रखा कैसे जाता है और इस व्रत की पूजा विधि क्या है।

जितिया पूजन मुहूर्त 2026

  • ब्रह्म मुहूर्त - 04:38 AM से 05:26 AM
  • प्रातः सन्ध्या - 05:02 AM से 06:15 AM
  • अभिजित मुहूर्त - 11:46 AM से 12:34 PM
  • विजय मुहूर्त - 02:08 PM से 02:56 PM
  • गोधूलि मुहूर्त - 06:05 PM से 06:29 PM
  • सायाह्न सन्ध्या - 06:05 PM से 07:18 PM
 

जितिया व्रत की पूजा सामग्री 

  • गन्ना, कुशा, मौली, अक्षत, धुप, दीप, कर्पूर, घी, दूध, बांस की डलिया, जनेऊ, सिंदूर, रोली, जिउतिया का धागा, सेब, ऋतु फल, भीगे चने, फूल माला
  • प्रसाद के लिए केला, बताशे या घर में बना हुआ प्रसाद जैसे, ठेकुआ, हलवा और पुए
  • पान, सुपारी, दक्षिणा, खिलौने
  • नेनुआ या तोरई के पत्ते
  • जीमूतवाहन जी की प्रतिमा
  • गोबर और मिट्टी से बनी सियारिन और चील की प्रतिमा 

जितिया व्रत की पूजा विधि

  • सबसे पहले भगवान गणेश को कुशा से जल छिड़ककर स्नान करवाएं।
  • इसके बाद सियारिन, चील और जीमूतवाहन जी की प्रतिमा पर भी जल छिड़कें।
  • फिर धूप-दीप जलाएं।
  • सभी प्रतिमाओं को अक्षत और फूल अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान गणेश, चील और सियारिन को सिंदूर अर्पित करें और भगवान जीमूतवाहन जी को कुमकुम और चंदन चढ़ाएं।
  • इसके बाद पूजा में सभी प्रतिमाओं को वस्त्र रूपी मौली या कलावा अर्पित करें।
  • इसके अलावा भगवान गणेश जी और जीमूतवाहन जी को जनेऊ अर्पित करें।
  • भगवान जीमूतवाहन को सफेद रंग के फूलों की माला पहनाएं और भगवान गणेश को लाल या पीले रंग के फूल की माला पहनाएं।
  • इसके बाद भगवान जी को भोग अर्पित करें।
  • अगर आप चील और सियारिन की पूजा माता के स्वरूप में कर रहे हैं तो उन्हें श्रृंगार की सामग्री जरूर चढ़ाएं।
  • विधि विधान पूजा करने के बाद कथा जरूर सुनें।
  • अंत में आरती करके सभी में प्रसाद बांट दें।
  • पूजा के बाद इस दिन महिलाएं अपने गले में जितिया का धागा पहनती हैं।

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  • 12:39 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    जितिया व्रत कथा (Jitiya Vrat Katha Chilo Siyaro)

    जितिया की पौराणिक कथा अनुसार किसी वन में एक चील और सियारिन रहती थी। दोनों में गहरी दोस्ती थी और वे हर काम को मिल-बांट के किया करती थीं। एक बार कुछ महिलाएं जंगल में आई जो जीवित्पुत्रिका व्रत की आपस में बात कर रही थीं। चील के मन में इस व्रत के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। वह महिलाओं के पास गई और उनसें व्रत के बारे में पूछने लगी। महिलाओं ने जितिया व्रत के विधान के बारे में चील को सारी जानकारी दी।

    चील ने जाकर इस व्रत के बारे में अपनी मित्र सियारिन को बताया। जिसके बाद दोनों ने जितिया माता का व्रत और पूजन करने का निर्णय लिया। चील तथा सियारिन ने जितिया माता का व्रत का संकल्प लिया और शाम को पूजा की। लेकिन पूजा के बाद ही चील और सियारिन को भूख लगने लगी।

    सियारिन को भूख बर्दास्त नहीं हुई और वह जंगल में शिकार करने चली गई। सियारिन जब मांस को खा रही थी, तब चील ने उसे देख लिया और उसने सियारिन की बहुत डांट लगाई। चील ने ये व्रत पूरी विधि से पूर्ण किया। फिर अगले जन्म में सियारिन और चील का जन्म बहन के रूप में, एक प्रतापी राजा के यहां हुआ। सियारिन का विवाह एक राजकुमार से हुआ और चील का विवाह राज्य मंत्री के पुत्र से हुआ।

    कुछ समय बीता तो सियारिन ने एक पुत्र को जन्म दिया लेकिन जन्म के कुछ दिन बाद ही उसके पुत्र की मृत्यु हो गई। इसके बाद चील ने भी एक पुत्र को जन्म दिया, जो जीवित तथा स्वास्थ्य रहा। यह देख सियारिन को अपनी बहन चील से ईर्ष्या होने लगी।

    जलन में आकर सियारिन ने अपने बहन के पुत्र और पति को मरवाने की कोशिश की, परंतु दोनों ही बच गए। एक दिन देवी मां सियारिन के सपने में आई और उन्होंने सियारिन से कहा “यह तुम्हारे पूर्व जन्म के कर्म का फल है, अगर तुम अपनी परिस्थिति ठीक करना चाहती हो तो मां जीतिया की व्रत और उपासना करो।

    प्रातः काल उठकर इस सपने के बारे में सियारिन ने अपने पति को बताया। सियारिन के पति ने यह सुन सियारिन को ये व्रत करने के लिए कहा और उसकी बहन चील से माफी मांगने को बोला। इसके बाद सियारिन चील के घर गई और उससे अपने गलतियों की माफी मांगी। सियारिन को उसकी गलतियों पर पछतावा देखकर चील ने उसे माफ कर दिया।

    अगले साल जब जितिया व्रत पड़ा तो ये व्रत सियारिन और उसकी बहन चील दोनों ने एक साथ रखा। माता जितिया ने प्रसन्न होकर सियारिन को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। कुछ दिनों बाद ही सियारिन ने एक सुंदर बालक को जन्म दिया। इसके बाद दोनों बहन प्रेम भाव से खुशी-खुशी रहने लगी।   

  • 12:15 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Jitiya Ke Gane (जितिया के गाने)

    • जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
    • तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
    • अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
    • तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
    • अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
    • तोहरो जीनगीया के दिही सवार हो
    • जिऊत वाहन देव अर्जी करीह स्वीकार हो
    • चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    • जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
    • चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    • जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
    • हमरो दुलरवा के नजरों ने लागे
    • रहीह तू हरदम सबका से आगे
    • पढ़ लिख के बबुआ खूब नाम कमईह
    • कौनो परेशानी से तू कबहू ना डेरईह
    • जीऊत वाहन देव के बा महिमा अपार हो
    • एही से त निर्जल भूकल बानी त्यौहार हो
    • चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    • जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
    • चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    • जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
    • हमरो उमर तोहरा के लग जाए
    • रोग बल्ला कोई छू नहीं पाई
    • पावन परब हम तोहरे ला करिले
    • कवनो ना गलती होखे ध्यान हम धरीले
    • तोहरे से रोशन बा अंगना हमार हो
    • कबहु भुलइह ना माई के दुलार हो
    • चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    • जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
    • चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
  • 12:00 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत का पारण कब करेंगे?

    जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। इस दिन सुबह सूर्योदय के बाद आप कभी भी व्रत खोल सकते हैं।

  • 11:45 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Jitiya Vrat 2026 Live: जितिया व्रत में इस मंत्र का जरूर करें जाप

    ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः

     

  • 11:08 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    जितिया व्रत में नोनी का साग क्यों खाते हैं?

    जितिया व्रत के नहाय-खाय के दिन नोनी का साग खाने की विशेष और प्राचीन परंपरा है, क्योंकि इसे बेहद पवित्र, स्वास्थ्यवर्धक और ऊर्जा देने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नोनी का साग अत्यंत शुद्ध और सात्विक माना गया है, जिसे व्रत की शुरुआत में खाना अनिवार्य माना जाता है।

     

  • 10:52 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Jitiya 2026 Live: जितिया व्रत में क्या बरतें सावधानियां

    • जितिया के व्रत में लहसुन, प्याज और मांसाहार पूर्ण रूप से वर्जित होता है। 
    • व्रत करने के दौरान अपना मन, वचन और कर्म शुद्ध रखें। 
    • अगर गर्भवती महिला हैं तो यह व्रत ना करें। अगर रख भी रहे हैं तो कुछ न कुछ फलाहारी भोजन करते रहें।
    • इसके अलावा जिन महिलाओं को कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है उन्हें भी यह व्रत नहीं करने की सलाह दी जाती है।
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