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Jitiya Vrat 2026 Live: जितिया व्रत का पारण कितने बजे और कैसे किया जाएगा? जानिए व्रत खोलते समय क्या खाना है

 Written By: Laveena Sharma
 Updated : Oct 04, 2026 08:26 am IST

आज जितिया व्रत का पारण किया जाएगा। इस व्रत का पारण नवमी के दिन सूर्यास्त से पहले कर लेना चाहिए। चलिए जानते हैं पारण की सही विधि और टाइमिंग।

जितिया व्रत पारण समय 2026- India TV Hindi
जितिया व्रत पारण समय 2026 Image Source : INDIA TV

Jitiya Vrat 2026 Paran Time Live Update: जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। मुख्य रूप से यह पर्व बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए 24 घंटे तक निर्जला व्रत रहती हैं। व्रत की शुरुआत सप्तमी तिथि पर नहाय खाय के साथ होती है और समाप्ति मातृ नवमी के दिन व्रत का पारण करके होती है। बता दें इस साल यह व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा गया और आज इस व्रत का पारण है। 

जितिया व्रत का पारण कितने बजे है 2026

4 अक्टूबर को जितिया व्रत का पारण सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद किया जा सकता है। पारण से पहले विधि विधान पूजन करके भोग लगाएं और प्रसाद ग्रहण करके अपना व्रत खोल लें।

जितिया व्रत पारण विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • फिर दीपक जलाकर भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना करें और पूजा के समय अपने गले में जितिया धारण करें।
  • पारण करने से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न-धन आदि का दान करें।
  • फिर नोनी के साग और रागी की रोटी का भोग लगाएं।
  • इसके बाद अपना व्रत खोल लें।

जितिया व्रत कथा 2026 (Jitiya Vrat Katha PDF)

एक समय की बात है, नर्मदा नदी के पास कंचनवटी नाम का एक नगर था। नदी की पश्चिम दिशा में मरुभूमि थी, जिसे बालुहटा के नाम से जाना जाता था। वहां एक विशाल पेड़ था, उसी पेड़ पर एक चील रहा करती थी। पेड़ के नीचे एक खोह (कोटर) थी, जिसमें सियारिन रहा करती थी। चील और सियारिन में गहरी दोस्ती थी। एक बार उन दोनों ने कुछ महिलाओं को जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत करते हुए देखा, जिसके बाद उन्हें भी यह व्रत करने की इच्छा हुई। दोनों ने यह व्रत करने का संकल्प लिया। लेकिन व्रत के दिन ही उस नगर के एक बड़े व्यापारी की मृत्यु हो गई और उसका दाह-संस्कार उसी स्थान पर किया गया, जहां चील और सियारिन रहती थीं।

रात में मौसम काफी खराब हो गया और एक बड़ा तूफान आ गया। दूसरी तरफ, सियारिन को बहुत तेज भूख लगने लगी और ऐसे में उसे व्यापारी का शव पड़ा हुआ मिल गया। उससे रहा नहीं गया और उसने व्यापारी का मांस खा लिया, जिसके कारण उसका व्रत टूट गया। लेकिन चील ने पूरे नियम और संयम के साथ यह व्रत रखा और अगले दिन पूरी श्रद्धा के साथ पारण किया।

मृत्यु के बाद अगले जन्म में दोनों ने एक ब्राह्मण के घर में दो बेटियों के रूप में जन्म लिया। चील बड़ी बहन बनी और उसका नाम शीलावती रखा गया, जबकि सियारिन छोटी बहन बनी और उसका नाम कपुरावती रखा गया। शीलावती, जो पिछले जन्म में चील थी, उसका विवाह बुद्धिसेन के साथ हुआ; वहीं कपुरावती का विवाह नगर के राजा मलयकेतु से हुआ। इस प्रकार कपुरावती नगर की रानी बन गई। भगवान जीमूतवाहन के आशीर्वाद से शीलावती के 7 पुत्र हुए, जबकि कपुरावती की जो भी संतानें हुईं, वे जन्म लेते ही मृत्यु को प्राप्त हो जाती थीं।

अपनी बहन शीलावती के जीवित पुत्रों को देखकर कपुरावती को ईर्ष्या होने लगी, जिसके चलते उसने राजा से कहकर शीलावती के सभी पुत्रों के सिर कटवा दिए। इसके बाद कपुरावती ने 7 थालियों में कटे हुए सिर रखकर और उन्हें लाल कपड़े से ढककर शीलावती के घर भिजवा दिया। जब भगवान जीमूतवाहन ने शीलावती के पुत्रों के शव देखे, तो उन्होंने मिट्टी से सिरों का निर्माण करके और सभी को धड़ों से जोड़कर उनमें दोबारा प्राण फूंक दिए, जिससे शीलावती के सातों पुत्र पुनः जीवित हो गए। दूसरी तरफ, रानी कपुरावती द्वारा भेजी गई थालियों में जो सिर रखे थे, वे फल बन गए।

रानी कपुरावती बड़ी बेसब्री से अपनी बहन के सातों पुत्रों की मृत्यु के समाचार का इंतजार कर रही थी। लेकिन जब उसे उनकी मृत्यु की कोई खबर नहीं मिली, तो वह खुद अपनी बहन के घर पहुंच गई। वहां जाकर उसने देखा कि उसके सारे भांजे तो जीवित और स्वस्थ हैं। यह देखकर उसके होश उड़ गए और वह बेहोश हो गई। जब उसे होश आया, तो उसने अपनी बहन को सारी बात बता दी और कपुरावती को अपनी गलती का बहुत पछतावा हुआ। भगवान जीमूतवाहन की कृपा से शीलावती को अपने पिछले जन्म की सारी बातें याद आ गईं, जिसके बाद वह अपनी बहन को उसी जगह ले गई जहां वे दोनों पिछले जन्म में रहती थीं।

वहां पहुंचकर शीलावती ने कपुरावती को पूर्वजन्म की पूरी कथा बताई। यह सब सुनने और सत्य जानने के बाद कपुरावती की मृत्यु हो गई। जब राजा को अपनी पत्नी की मृत्यु का समाचार मिला, तो उन्होंने उसी पेड़ के नीचे उसका दाह-संस्कार कर दिया जहाँ वह पिछले जन्म में रहा करती थी। इस प्रकार कपुरावती को मोक्ष की प्राप्ति हुई।

Jitiya Vrat Katha PDF Download

Jitiya Vrat 2026 Live: जितिया व्रत पारण समय और विधि

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  • 7:18 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    जितिया व्रत के पारण में क्या खाना चाहिए?

    जितिया व्रत के पारण में मड़ुआ की रोटी, नोनी का साग, तोरई की सब्जी, चना दाल और अरवा चावल खाने की परंपरा है।

     

  • 7:00 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    जितिया व्रत का पारण कब करें?

    4 अक्टूबर को जितिया व्रत का पारण सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद किया जा सकता है। 

  • 11:33 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया माता की आरती

    जय जय जय जितिया महारानी।

    तुम हो सब जीवों की माता, हर लेती हो दुःख सब प्राणी।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    तुम्हारे व्रत से संतानें, निरोगी और लंबी उम्र पाएं।
    सुख-समृद्धि का वास हो घर में, तुम ऐसी कृपा बरसाएं।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    जो नारी श्रद्धा से पूजे, तुम्हारी महिमा अपरम्पार।
    हर संकट से रक्षा करती, और भरती खुशियों का संसार।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    सत्यवादी राजा जीमूतवाहन की, महिमा है तुम से जुड़ी।
    तुम्हारी कृपा से ही हुई, उस राजा की यश की घड़ी।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    तुम हो दुःखहर्ता, सुखकर्ता, तुम हो जीवन की दात्री।
    तुम्हारी पूजा से पावन हो, हर घर की जननी और गात्री।
    जय जय जय जितिया महारानी।

  • 11:20 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया की आरती

    जितिया माता की आरती

    ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन

    त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥ ओम जय कश्यप

    सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी.

    दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥ ओम जय कश्यप.

    सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली.

    अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ ओम जय कश्यप

    सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी.

    विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥ ओम जय कश्यप

    कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा.

    सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥ ओम जय कश्यप

    नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी.

    वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥ ओम जय कश्यप

    सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै.

    हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥ ओम जय कश्यप

    ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन

  • 11:05 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    जितिया के परबिया (Jitiya Geet)

    जितिया के परबिया…

    बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
    बड़ा भारी होला

    सप्तमी के दिने होला गंगा आसन्नवा
    नवनि संग मडवा वर्ती खाये एहि दिनवा
    नेनुवाके पातपर पुवा पकवनवा
    चील सियारिन दिहल जाला भोगवा

    गोतनि सग करब हम
    गोतनि सग
    गोतनि सग करब हम
    भोर में सरगहिया

    ऐ हो सखी भुखीब
    ऐ हो सखी भुखीब

    जितिया के परबिया…

    बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
    बड़ा भारी होला

    लव कुश पुजला सखी अष्टमी के संझिया
    कथा सुनीली बूढ़ होके चाहे कन्या
    नवमी के भोर होला पारण के दिनवा
    कांडा गिराउके बनेला भोजनवा

    सईया से मगाइब हम
    उत्तम जी से
    खुसबू मगाइये सोने के जिउतिया

    ऐ हो सखी भुखीब
    ऐ हो सखी भुखीब

    जितिया के परबिया…

    बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
    बड़ा भारी होला…

  • 10:38 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो...

    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो...

    तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
    अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए

    तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
    अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए

    तोहरो जीनगीया के दिही सवार हो
    जिऊत वाहन देव अर्जी करीह स्वीकार हो

    चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो

    चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
    हमरो दुलरवा के नजरों ने लागे
    रहीह तू हरदम सबका से आगे

    पढ़ लिख के बबुआ खूब नाम कमईह
    कौनो परेशानी से तू कबहू ना डेरईह

    जीऊत वाहन देव के बा महिमा अपार हो
    एही से त निर्जल भूकल बानी त्यौहार हो

    चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो

    चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो

    हमरो उमर तोहरा के लग जाए
    रोग बल्ला कोई छू नहीं पाई

    पावन परब हम तोहरे ला करिले
    कवनो ना गलती होखे ध्यान हम धरीले

    तोहरे से रोशन बा अंगना हमार हो
    कबहु भुलइह ना माई के दुलार हो

    चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो

    चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो...

  • 10:01 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    जितिया के गीत (Jitiya Geet)

    जुग जुग जिए मोर बबुआ दुलरुवा

    जुग जुग जिए मोर
    जुग जुग जिए मोर बबुआ दुलरुवा
    जिउत वहांन देवता से करब हम अरजिया

    ऐ हो सखी भुखीब
    ऐ हो सखी भुखीब

    जितिया के परबिया…

    बड़ा भारी होला सखी जितिया के बरतिया
    बड़ा भारी होला

    तीन दिन के होला सखी पावन परबिया
    न खाये उपवास पारण के बा बिधिया
    आशीन अनहरिया के अस्टमी तिथि के

    जीवतिया पुजाला निरजल व्रत रख के
    सासु जी से पूछब
    सासु जी से
    सासु जी से पूछब कुल व्रत के नियमिया…

    ऐ हो सखी भुखीब
    ऐ हो सखी भुखीब

  • 9:29 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत पूज

    पूजा करने की जगह को साफ-सुथरा कर लें और एक लकड़ी की चौकी रखकर उस पर लाल कपड़ा बिछा दें।

    चावल की मदद से कपड़े पर 8 पंखुड़ियों वाला कमल का फूल बना लें।

    अब उसी बने हुए कमल के ऊपर कलश रखें।

    कलश के अंदर साफ पानी, थोड़ा-सा गंगाजल, एक सुपारी, एक सिक्का और थोड़ी हल्दी डाल दें।

    कलश के मुंह पर आम के पत्ते लगाकर उसके ऊपर नारियल रख दें।

    नारियल पर कलावा लपेट दें और कलश पर सिंदूर या रोली से स्वास्तिक का निशान बना लें।

    तोरई के पत्तों पर गणेश जी, चील, सियारिन और राजा जीमूतवाहन जी की मूर्तियां या तस्वीरें स्थापित करें।

    सभी मूर्तियों को वस्त्र के रूप में कलावा चढ़ाएं।

    इसके बाद सभी को रोली-अक्षत का तिलक लगाएं, फल-फूल और तोरई/नेनुआ के पत्ते का प्रसाद चढ़ाकर जितिया व्रत की कथा सुनें और आरती करें।

  • 8:38 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    जितिया माता की आरती (Jitiya Mata Aarti Lyrics in Hindi)

    जय जय जय जितिया महारानी।
    तुम हो सब जीवों की माता, हर लेती हो दुःख सब प्राणी।
    जय जय जय...

    तुम्हारे व्रत से संतानें, निरोगी और लंबी उम्र पाएं।
    सुख-समृद्धि का वास हो घर में, तुम ऐसी कृपा बरसाएं।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    जो नारी श्रद्धा से पूजे, तुम्हारी महिमा अपरम्पार।
    हर संकट से रक्षा करती, और भरती खुशियों का संसार।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    सत्यवादी राजा जीमूतवाहन की, महिमा है तुम से जुड़ी।
    तुम्हारी कृपा से ही हुई, उस राजा की यश की घड़ी।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    तुम हो दुःखहर्ता, सुखकर्ता, तुम हो जीवन की दात्री।
    तुम्हारी पूजा से पावन हो, हर घर की जननी और गात्री।
    जय जय जय जितिया महारानी।

  • 7:58 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    जितिया की आरती (Jitiya Vrat Aarti Lyrics in Hindi)

    जितिया व्रत की पूजा में सूर्यदेव की आरती का पाठ किया जाता है। पूजा पूरी करने के बाद श्रद्धा के साथ आरती करने से भक्त भगवान सूर्य का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। यहां पढ़ें सूर्यदेव की पूरी आरती।

    सूर्यदेव की आरती

    ॐ जय कश्यप नंदन, प्रभु जय अदिति नंदन।
    त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चंदन॥
    ॐ जय कश्यप नंदन...
    सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
    दुःखहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥
    ॐ जय कश्यप नंदन...
    सुर मुनि भूसुर वंदित, विमल विभवशाली।
    अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
    ॐ जय कश्यप नंदन...
    सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
    विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥
    ॐ जय कश्यप नंदन...
    कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
    सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥
    ॐ जय कश्यप नंदन...
    नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
    वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
    ॐ जय कश्यप नंदन...
    सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
    हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥
    ॐ जय कश्यप नंदन...

  • 7:20 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया पर्व क्यों मनाया जाता है?

    हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत रखने से संतानों को लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि मिलती है। यह व्रत माता को संतान के वियोग और दुखों से बचाता है। यह सबसे कठिन निर्जला व्रतों में से एक माना जाता है।

  • 6:43 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत के दिन क्या करना चाहिए?

    निर्जला व्रत रखें।
    जीमूतवाहन की पूजा विधिपूर्वक करें।
    कथा जरूर सुनें।
    फूल, फल, प्रसाद, खिलौने और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
    पूजा के अंत में भगवान जी को दक्षिणा अर्पित करें और आरती करें।
    गले में जितिया पहनें।

  • 5:48 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    पारण के दिन खाएं जाते हैं ये विशेष व्यंजन

    व्रत का पारण सप्तमी या नवमी तिथि (उदया तिथि के अनुसार) को सूर्योदय के बाद किया जाता है। पारण के दिन कई प्रकार के पारंपरिक और स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं, जिन्हें परिवार के सभी सदस्य मिलकर खाते हैं। पारण की शुरुआत आमतौर पर भीगे हुए कच्चे चने और खीरे के टुकड़े से की जाती है। कुछ क्षेत्रों में नोनी का साग और झोर-भात भी खाया जाता है। इस दिन घरों में अलग-अलग पकवान जैसे आटे या मैदे की पूरियां, खीर, ठेकुआ और मौसमी फल परोसे जाते हैं। 

  • 4:55 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत के दिन क्या न करें?

    इस दिन व्रती महिलाओं को अन्न, जल या फल का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा पूजा सामग्री या प्रसाद का अपमान न करें। व्रत कथा जरूर सुनें। पूजा पूरी किए बिना व्रत को अधूरा न छोड़ें। पारण से पहले किसी भी तरह का भोजन करना अशुभ माना जाता है।

  • 4:10 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया धागे का महत्व

    जितिया व्रत में जितिया धागे का विशेष महत्व होता है। यह धागा लाल रंग का होता है और पूजा में चील और सियारिन को यह धागा अर्पित किया जाता है। परंपरा के अनुसार, संतानों की संख्या के बराबर जितिया धागे चढ़ाए जाते हैं। माताएं अपनी सामर्थ्य अनुसार सोने या चांदी के लॉकेट सहित जितिया अर्पित करती हैं। नवमी के दिन पारण के समय माताएं इस धागे को धारण कर लेती हैं।

  • 2:51 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    जितिया व्रत के दिन प्रदोष काल का महत्व

    जितिया व्रत के दिन माताएं निर्जला व्रत रखती हैं और दूसरे दिन शुभ मुहूर्त में पारण करती हैं। जितिया के दिन शाम के समय यानी प्रदोष काल में भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती और व्रत कथा सुना की परंपरा है। जितिया व्रत में चील और सियारिन की कथा भी जरूरी सुनी जाती है।  बता दें कि जितिया के दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता और पूजा-पाठ करने का विधान है। लेकिन शाम के समय यानी प्रदोष काल में भी पूजा, आरती और कथा  का श्रवण या पाठ किया जाता है।

  • 2:23 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    जितिया व्रत पारण नियम

    • जितिया व्रत के दिन सात्विक भोजन ही खाएं। इसमें लहसुन-प्याज का इस्तेमाल न करें।
    • पारण के दिन भोजन करने से पहले ब्राह्मण या जरूरतमंद को अन्न, धन, भोजन या अनाज का दान करें या अलग से निकाल कर रख दें। 
    • जितिया व्रत का पारण अष्टमी तिथि में नहीं किया जाता है।
    • जितिया का पारण 4 अक्टूबर  को सुबह 07:28 बजे के बाद ही करें। इसके बाद ही अन्न और जल ग्रहण करें।
  • 1:51 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    जितिया व्रत पारण विधि

    • जितिया व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। 
    • इसके बाद तांबे के लोटे में जल लाल फूल और अक्षत मिलाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
    • पूजा स्थल पर धूप-दीप जलाकर जीमूतवाहन, चील और सियारिन का ध्यान करते हुए जल और प्रसाद अर्पित करें।
    • अब सबसे पहले प्रसाद परिवार के सदस्यों को बांटें।
    • इसके बाद भगवान को चढ़ाए गए जल और प्रसाद से अपना व्रत खोलें।
    • प्रसाद ग्रहण करने के बाद सात्विक भोजन खाएं।
    • जितिया पारण के दिन नोनी का साग और झिंगनी (तोरी) की सब्जी जरूर खाएं।
  • 12:52 PM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    जितिया व्रत 2026 पारण का शुभ मुहूर्त

    जितिया व्रत का पारण दूसरे दिन नवमी तिथि में किया जाता है। इस साल जितिया पारण 4 अक्टूबर 2026, रविवार को किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, जितिया का पारण  4 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद किया जाएगा। नवमी तिथि में व्रत का पारण सबसे उत्तम माना गया है। पारण के दिन व्रती महिलाएं जल और अन्न ग्रहण कर अपना व्रत खोल सकती हैं।

  • 11:54 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    Jitiya Vrat 2026: जितिया की आरती

    जय जय जय जितिया महारानी।

    तुम हो सब जीवों की माता, हर लेती हो दुःख सब प्राणी।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    तुम्हारे व्रत से संतानें, निरोगी और लंबी उम्र पाएं।
    सुख-समृद्धि का वास हो घर में, तुम ऐसी कृपा बरसाएं।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    जो नारी श्रद्धा से पूजे, तुम्हारी महिमा अपरम्पार।
    हर संकट से रक्षा करती, और भरती खुशियों का संसार।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    सत्यवादी राजा जीमूतवाहन की, महिमा है तुम से जुड़ी।
    तुम्हारी कृपा से ही हुई, उस राजा की यश की घड़ी।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    तुम हो दुःखहर्ता, सुखकर्ता, तुम हो जीवन की दात्री।
    तुम्हारी पूजा से पावन हो, हर घर की जननी और गात्री।
    जय जय जय जितिया महारानी।

  • 10:44 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    Jitiya Moon Rise Time: जितिया व्रत के दिन चांद निकलने का समय

    3 अक्टूबर को चांद रात 11 बजकर 32 मिनट पर निकलेगा।

  • 10:05 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    Jitiya Vrat Mantra: संतान गोपाल मंत्र

    ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः

  • 9:05 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    Jitiya Vrat 2026: जितिया की आरती

    जितिया माता की आरती
    ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन

    त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥ ओम जय कश्यप

    सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी.

    दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥ ओम जय कश्यप.

    सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली.

    अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ ओम जय कश्यप

    सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी.

    विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥ ओम जय कश्यप

    कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा.

    सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥ ओम जय कश्यप

    नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी.

    वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥ ओम जय कश्यप

    सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै.

    हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥ ओम जय कश्यप

    ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन

  • 8:11 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    Jitiya Vrat 2026: जितिया पर्व क्यों मनाया जाता है?

    हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत रखने से संतानों को लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि मिलती है। यह व्रत माता को संतान के वियोग और दुखों से बचाता है। यह सबसे कठिन निर्जला व्रतों में से एक माना जाता है।

  • 7:35 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत पूजन की तैयारी कैसे करें?

    • पूजा करने की जगह को साफ-सुथरा कर लें और एक लकड़ी की चौकी रखकर उस पर लाल कपड़ा बिछा दें।
    • चावल की मदद से कपड़े पर 8 पंखुड़ियों वाला कमल का फूल बना लें।
    • अब उसी बने हुए कमल के ऊपर कलश रखें।
    • कलश के अंदर साफ पानी, थोड़ा-सा गंगाजल, एक सुपारी, एक सिक्का और थोड़ी हल्दी डाल दें।
    • कलश के मुंह पर आम के पत्ते लगाकर उसके ऊपर नारियल रख दें।
    • नारियल पर कलावा लपेट दें और कलश पर सिंदूर या रोली से स्वास्तिक का निशान बना लें।
    • तोरई के पत्तों पर गणेश जी, चील, सियारिन और राजा जीमूतवाहन जी की मूर्तियां या तस्वीरें स्थापित करें।
    • सभी मूर्तियों को वस्त्र के रूप में कलावा चढ़ाएं।
    • इसके बाद सभी को रोली-अक्षत का तिलक लगाएं, फल-फूल और तोरई/नेनुआ के पत्ते का प्रसाद चढ़ाकर जितिया व्रत की कथा सुनें और आरती करें।
  • 12:06 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत का पारण कब किया जाएगा

    जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर को सूर्योदय के बाद कर सकते हैं। पारण से पहले किसी ब्राह्मण को भोजन कराना या अन्न का दान करना शुभ माना जाता है। इस दिन माताएं जितिया का धागा भी धारण करती हैं।

  • 11:51 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    गणेश जी की आरती (Ganesh Ji ki Aarti)

    जय गणेश जय गणेश,
    जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती,
    पिता महादेवा ॥

    एक दंत दयावंत,
    चार भुजा धारी ।
    माथे सिंदूर सोहे,
    मूसे की सवारी ॥

    जय गणेश जय गणेश...

    पान चढ़े फल चढ़े,
    और चढ़े मेवा ।
    लड्डुअन का भोग लगे,
    संत करें सेवा ॥

    जय गणेश जय गणेश...

    अंधन को आंख देत,
    कोढ़िन को काया ।
    बांझन को पुत्र देत,
    निर्धन को माया ॥

    जय गणेश जय गणेश...

    'सूर' श्याम शरण आए,
    सफल कीजे सेवा ।
    माता जाकी पार्वती,
    पिता महादेवा ॥

    जय गणेश जय गणेश...

    दीनन की लाज रखो,
    शंभु सुतकारी ।
    कामना को पूर्ण करो,
    जाऊं बलिहारी ॥

    जय गणेश जय गणेश...

  • 11:14 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    जितिया के गीत (Jitiya Geet)

    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो...

    तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
    अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए

    तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
    अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए

    तोहरो जीनगीया के दिही सवार हो
    जिऊत वाहन देव अर्जी करीह स्वीकार हो

    चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो

    चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
    हमरो दुलरवा के नजरों ने लागे
    रहीह तू हरदम सबका से आगे

    पढ़ लिख के बबुआ खूब नाम कमईह
    कौनो परेशानी से तू कबहू ना डेरईह

    जीऊत वाहन देव के बा महिमा अपार हो
    एही से त निर्जल भूकल बानी त्यौहार हो

    चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो

    चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो

    हमरो उमर तोहरा के लग जाए
    रोग बल्ला कोई छू नहीं पाई

    पावन परब हम तोहरे ला करिले
    कवनो ना गलती होखे ध्यान हम धरीले

    तोहरे से रोशन बा अंगना हमार हो
    कबहु भुलइह ना माई के दुलार हो

    चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो

    चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो...

  • 11:04 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Moon Rise Time: जितिया व्रत के दिन चांद निकलने का समय

    3 अक्टूबर जितिया व्रत के दिन चांद रात 11 बजकर 32 मिनट पर निकलेगा।

  • 10:17 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया की आरती

    जय जय जय जितिया महारानी।

    तुम हो सब जीवों की माता, हर लेती हो दुःख सब प्राणी।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    तुम्हारे व्रत से संतानें, निरोगी और लंबी उम्र पाएं।
    सुख-समृद्धि का वास हो घर में, तुम ऐसी कृपा बरसाएं।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    जो नारी श्रद्धा से पूजे, तुम्हारी महिमा अपरम्पार।
    हर संकट से रक्षा करती, और भरती खुशियों का संसार।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    सत्यवादी राजा जीमूतवाहन की, महिमा है तुम से जुड़ी।
    तुम्हारी कृपा से ही हुई, उस राजा की यश की घड़ी।
    जय जय जय जितिया महारानी।

    तुम हो दुःखहर्ता, सुखकर्ता, तुम हो जीवन की दात्री।
    तुम्हारी पूजा से पावन हो, हर घर की जननी और गात्री।
    जय जय जय जितिया महारानी।

  • 9:39 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया धागे का महत्व

    जितिया व्रत में जितिया धागे का विशेष महत्व होता है। यह धागा लाल रंग का होता है और पूजा में चील और सियारिन को यह धागा अर्पित किया जाता है। परंपरा के अनुसार, संतानों की संख्या के बराबर जितिया धागे चढ़ाए जाते हैं। माताएं अपनी सामर्थ्य अनुसार सोने या चांदी के लॉकेट सहित जितिया अर्पित करती हैं। नवमी के दिन पारण के समय माताएं इस धागे को धारण कर लेती हैं।

  • 9:05 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat Mantra: संतान गोपाल मंत्र

    ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः

  • 8:24 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया की आरती

    जितिया माता की आरती

    ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन

    त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥ ओम जय कश्यप

    सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी.

    दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥ ओम जय कश्यप.

    सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली.

    अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ ओम जय कश्यप

    सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी.

    विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥ ओम जय कश्यप

    कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा.

    सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥ ओम जय कश्यप

    नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी.

    वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥ ओम जय कश्यप

    सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै.

    हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥ ओम जय कश्यप

    ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन

  • 7:25 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया पर्व क्यों मनाया जाता है?

    हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत रखने से संतानों को लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि मिलती है। यह व्रत माता को संतान के वियोग और दुखों से बचाता है। यह सबसे कठिन निर्जला व्रतों में से एक माना जाता है।

  • 6:45 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत पूजन की तैयारी कैसे करें?

    1. पूजा करने की जगह को साफ-सुथरा कर लें और एक लकड़ी की चौकी रखकर उस पर लाल कपड़ा बिछा दें।
    2. चावल की मदद से कपड़े पर 8 पंखुड़ियों वाला कमल का फूल बना लें।
    3. अब उसी बने हुए कमल के ऊपर कलश रखें।
    4. कलश के अंदर साफ पानी, थोड़ा-सा गंगाजल, एक सुपारी, एक सिक्का और थोड़ी हल्दी डाल दें।
    5. कलश के मुंह पर आम के पत्ते लगाकर उसके ऊपर नारियल रख दें।
    6. नारियल पर कलावा लपेट दें और कलश पर सिंदूर या रोली से स्वास्तिक का निशान बना लें।
    7. तोरई के पत्तों पर गणेश जी, चील, सियारिन और राजा जीमूतवाहन जी की मूर्तियां या तस्वीरें स्थापित करें।
    8. सभी मूर्तियों को वस्त्र के रूप में कलावा चढ़ाएं।
    9. इसके बाद सभी को रोली-अक्षत का तिलक लगाएं, फल-फूल और तोरई/नेनुआ के पत्ते का प्रसाद चढ़ाकर जितिया व्रत की कथा सुनें और आरती करें।
  • 5:54 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत के दिन क्या करना चाहिए?

    • निर्जला व्रत रखना चाहिए।
    • जीमूतवाहन की पूजा विधिपूर्वक करें।
    • कथा जरूर सुनें।
    • फूल, फल, प्रसाद, खिलौने और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
    • पूजा के अंत में भगवान जी को दक्षिणा अर्पित करें और आरती करें।
    • गले में जितिया पहनें।
  • 5:16 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत के दिन क्या न करें?

    इस दिन व्रती महिलाओं को अन्न, जल या फल का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा पूजा सामग्री या प्रसाद का अपमान न करें। व्रत कथा जरूर सुनें। पूजा पूरी किए बिना व्रत को अधूरा न छोड़ें। पारण से पहले किसी भी तरह का भोजन करना अशुभ माना जाता है।

  • 4:09 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Jitiya Vrat 2026: जितिया धागे का महत्व

    जितिया व्रत में जितिया धागे का विशेष महत्व होता है। यह धागा लाल रंग का होता है और पूजा में चील और सियारिन को यह धागा अर्पित किया जाता है। परंपरा के अनुसार, संतानों की संख्या के बराबर जितिया धागे चढ़ाए जाते हैं। माताएं अपनी सामर्थ्य अनुसार सोने या चांदी के लॉकेट सहित जितिया अर्पित करती हैं। नवमी के दिन पारण के समय माताएं इस धागे को धारण कर लेती हैं।

  • 2:40 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    जितिया व्रत की कहानी

    जब वृद्धावस्था में जीमूत वाहन के पिता ने अपना सारा राजपाठ त्यागकर वानप्रस्थ आश्रम जाने का निर्णय लिया, तब जीमूत वाहन को राजा बनने में कोई रुचि नहीं थी। इसलिए उन्होंने अपने साम्राज्य को अपने भाइयों को सौंपकर अपने पिता की सेवा करने के लिए जंगल की ओर प्रस्थान किया। जीमूत वाहन का विवाह मलयवती नामक एक राजकन्या से हुआ। एक दिन, जीमूत वाहन जब जंगल में जा रहे थे तो उन्हें एक बूढ़ी महिला रोते हुए दिखी। जीमूतवाहन को पता चला कि वह नागवंश की स्त्री है। वृद्ध महिला ने आगे बताया कि नागों ने पक्षियों के राजा गरुण को रोजाना खाने के लिए नागों की बलि देने का वचन दिया है और इसी के कारण अब उसके बेटे शंखचूड़ की बारी है।

    यह सुन जीमूत वाहन ने महिला को कहा कि वह स्वयं अपनी बलि दे देंगे। इसके बाद, जीमूत वाहन ने शंखचूड़ से लाल कपड़ा लिया और वह अपनी बलि देने के लिए चट्टान पर लेट गए। जब गरुण आए, तो उन्होंने लाल कपड़े में ढके जीव को देखा और वह उसे पहाड़ की ऊंचाई पर उठा ले गए। पंजों में जकड़े हुए जब पीड़ा के कारण जीमूतवाहन कराहने लगे और तब गरुड़ की उनपर नजर पड़ी और उन्होंने जीमूतवाहन से पूछा कि वह कौन हैं और नागों के स्थान पर वह क्या कर रहे हैं। इसके बाद जीमूतवाहन ने गरुड़ राज को पूरी बात बताई।  जीमूत वाहन की बहादुरी और त्याग से गरुण प्रसन्न हुए।

    इसके बाद गरुड़ राज ने न केवल जीमूत वाहन को जीवनदान दिया बल्कि यह भी प्रतिज्ञा ली कि वे आगे से नागों की बलि नहीं लेंगे। कहते हैं इसी घटना के बाद से जीमूत वाहन की पूजा की परंपरा शुरू हुई। 

  • 2:13 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    जितिया व्रत कितने घंटे का होता है?

    जितिया व्रत सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक रखा जाता है। इस तरह से ये पूरे 24 घंटे का व्रत होता है जो कि निर्जला रखा जाता है।

  • 1:25 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत कौन-कौन रख सकता है?

    जितिया व्रत माताओं द्वारा उनकी संतान के सुखी जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। वहीं ये व्रत वे महिलाएं भी रख सकती हैं जिन्हें संतान प्राप्ति की इच्छा है।

  • 1:01 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत में कुछ खा सकते है?

    नहीं, जितिया व्रत में कुछ खाया नहीं जाता है। ये व्रत निर्जला रखा जाता है। हालांकि गर्भवती और बीमार महिलाओं को ये व्रत निर्जला नहीं रखना चाहिए।

  • 12:39 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    जितिया व्रत कथा (Jitiya Vrat Katha Chilo Siyaro)

    जितिया की पौराणिक कथा अनुसार किसी वन में एक चील और सियारिन रहती थी। दोनों में गहरी दोस्ती थी और वे हर काम को मिल-बांट के किया करती थीं। एक बार कुछ महिलाएं जंगल में आई जो जीवित्पुत्रिका व्रत की आपस में बात कर रही थीं। चील के मन में इस व्रत के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। वह महिलाओं के पास गई और उनसें व्रत के बारे में पूछने लगी। महिलाओं ने जितिया व्रत के विधान के बारे में चील को सारी जानकारी दी।

    चील ने जाकर इस व्रत के बारे में अपनी मित्र सियारिन को बताया। जिसके बाद दोनों ने जितिया माता का व्रत और पूजन करने का निर्णय लिया। चील तथा सियारिन ने जितिया माता का व्रत का संकल्प लिया और शाम को पूजा की। लेकिन पूजा के बाद ही चील और सियारिन को भूख लगने लगी।

    सियारिन को भूख बर्दास्त नहीं हुई और वह जंगल में शिकार करने चली गई। सियारिन जब मांस को खा रही थी, तब चील ने उसे देख लिया और उसने सियारिन की बहुत डांट लगाई। चील ने ये व्रत पूरी विधि से पूर्ण किया। फिर अगले जन्म में सियारिन और चील का जन्म बहन के रूप में, एक प्रतापी राजा के यहां हुआ। सियारिन का विवाह एक राजकुमार से हुआ और चील का विवाह राज्य मंत्री के पुत्र से हुआ।

    कुछ समय बीता तो सियारिन ने एक पुत्र को जन्म दिया लेकिन जन्म के कुछ दिन बाद ही उसके पुत्र की मृत्यु हो गई। इसके बाद चील ने भी एक पुत्र को जन्म दिया, जो जीवित तथा स्वास्थ्य रहा। यह देख सियारिन को अपनी बहन चील से ईर्ष्या होने लगी।

    जलन में आकर सियारिन ने अपने बहन के पुत्र और पति को मरवाने की कोशिश की, परंतु दोनों ही बच गए। एक दिन देवी मां सियारिन के सपने में आई और उन्होंने सियारिन से कहा “यह तुम्हारे पूर्व जन्म के कर्म का फल है, अगर तुम अपनी परिस्थिति ठीक करना चाहती हो तो मां जीतिया की व्रत और उपासना करो।

    प्रातः काल उठकर इस सपने के बारे में सियारिन ने अपने पति को बताया। सियारिन के पति ने यह सुन सियारिन को ये व्रत करने के लिए कहा और उसकी बहन चील से माफी मांगने को बोला। इसके बाद सियारिन चील के घर गई और उससे अपने गलतियों की माफी मांगी। सियारिन को उसकी गलतियों पर पछतावा देखकर चील ने उसे माफ कर दिया।

    अगले साल जब जितिया व्रत पड़ा तो ये व्रत सियारिन और उसकी बहन चील दोनों ने एक साथ रखा। माता जितिया ने प्रसन्न होकर सियारिन को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। कुछ दिनों बाद ही सियारिन ने एक सुंदर बालक को जन्म दिया। इसके बाद दोनों बहन प्रेम भाव से खुशी-खुशी रहने लगी।   

  • 12:15 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Jitiya Ke Gane (जितिया के गाने)

    • जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
    • तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
    • अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
    • तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
    • अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
    • तोहरो जीनगीया के दिही सवार हो
    • जिऊत वाहन देव अर्जी करीह स्वीकार हो
    • चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    • जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
    • चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    • जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
    • हमरो दुलरवा के नजरों ने लागे
    • रहीह तू हरदम सबका से आगे
    • पढ़ लिख के बबुआ खूब नाम कमईह
    • कौनो परेशानी से तू कबहू ना डेरईह
    • जीऊत वाहन देव के बा महिमा अपार हो
    • एही से त निर्जल भूकल बानी त्यौहार हो
    • चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    • जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
    • चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    • जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
    • हमरो उमर तोहरा के लग जाए
    • रोग बल्ला कोई छू नहीं पाई
    • पावन परब हम तोहरे ला करिले
    • कवनो ना गलती होखे ध्यान हम धरीले
    • तोहरे से रोशन बा अंगना हमार हो
    • कबहु भुलइह ना माई के दुलार हो
    • चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
    • जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
    • चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
  • 12:00 PM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत का पारण कब करेंगे?

    जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। इस दिन सुबह सूर्योदय के बाद आप कभी भी व्रत खोल सकते हैं।

  • 11:45 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Jitiya Vrat 2026 Live: जितिया व्रत में इस मंत्र का जरूर करें जाप

    ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः

     

  • 11:08 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    जितिया व्रत में नोनी का साग क्यों खाते हैं?

    जितिया व्रत के नहाय-खाय के दिन नोनी का साग खाने की विशेष और प्राचीन परंपरा है, क्योंकि इसे बेहद पवित्र, स्वास्थ्यवर्धक और ऊर्जा देने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नोनी का साग अत्यंत शुद्ध और सात्विक माना गया है, जिसे व्रत की शुरुआत में खाना अनिवार्य माना जाता है।

     

  • 10:52 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Jitiya 2026 Live: जितिया व्रत में क्या बरतें सावधानियां

    • जितिया के व्रत में लहसुन, प्याज और मांसाहार पूर्ण रूप से वर्जित होता है। 
    • व्रत करने के दौरान अपना मन, वचन और कर्म शुद्ध रखें। 
    • अगर गर्भवती महिला हैं तो यह व्रत ना करें। अगर रख भी रहे हैं तो कुछ न कुछ फलाहारी भोजन करते रहें।
    • इसके अलावा जिन महिलाओं को कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है उन्हें भी यह व्रत नहीं करने की सलाह दी जाती है।
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