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3 अक्टूबर को है 16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत का उद्यापन, जानें अंतिम दिन क्या करें और जरूरी नियम

 Written By: Arti Azad
 Published : Oct 02, 2026 08:43 pm IST,  Updated : Oct 02, 2026 08:43 pm IST

महालक्ष्मी व्रत उद्यापन: 16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत का समापन 3 अक्टूबर को होने जा रहा है। ऐसे में व्रत रखने वालों के लिए अंतिम दिन से जुड़े कुछ खास नियम और परंपराएं जानना जरूरी है, ताकि व्रत का समापन विधि-विधान के साथ किया जा सके।

Mahalakshmi Vrat Udyapan Vidhi- India TV Hindi
महालक्ष्मी व्रत अंतिम दिन की पूजा Image Source : PINTEREST

16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत का समापन 3 अक्टूबर 2026 को होगा। महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से शुरू होता है। मान्यता है कि विधि-विधान से उद्यापन करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और सौभाग्य का वास होता है। अगर आपने भी पूरे 16 दिन यह व्रत रखा है, तो अंतिम दिन पूजा, हवन और दान-दक्षिणा से जुड़ी विधि जरूर जान लें।

प्रात: पूजा की तैयारी

उद्यापन के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। घर के मंदिर की उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

कलश स्थापना

चौकी पर चावल की ढेरी बनाकर उसके ऊपर पानी से भरा कलश रखें। कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाएं और कलावा बंधा नारियल स्थापित करें। व्रत के पहले दिन रखा गया 16 गांठ वाला पवित्र धागा भी मां लक्ष्मी के सामने रखें और उस पर रोली-अक्षत चढ़ाएं।

मां लक्ष्मी को आर्पित करें भोग

पूजा के दौरान देवी लक्ष्मी को कमल का फूल, लाल वस्त्र और शृंगार की सामग्री अर्पित करें। भोग में चावल की खीर, पूरियां और फल चढ़ाए जा सकते हैं। इसके बाद हवन की तैयारी करें।

हवन और आहुति

छोटे हवन कुंड या उपले की अग्नि में 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करते हुए 108 आहुतियां दें। हवन के अंत में खीर और पूरियों की आहुति देने की बात कही गई है।

सुहागिनों को कराएं भोजन

उद्यापन के दिन 16 सुहागिन महिलाओं को सम्मानपूर्वक भोजन कराएं। उन्हें 16 शृंगार की वस्तुएं, फल और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें। 16 सुहागिनें उपलब्ध न हों तो 16 कन्याओं को भोजन कराया जा सकता है या उनके नाम से मंदिर में दान किया जा सकता है।

16 गांठ से करें ये उपाय

अंतिम दिन मां लक्ष्मी की पूजा के बाद कच्चे सूत में 16 गांठ लगाएं और 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करें। सूत्र पर कुमकुम और अक्षत लगाकर देवी के चरणों में अर्पित करें। पूजा के बाद इसे दाहिने हाथ में बांध सकते हैं। इसे तिजोरी या धन रखने के स्थान पर सुरक्षित रखें।

इन बातों का रखें ध्यान

इस दिन किसी से विवाद या क्रोध करने से बचें। भोजन सात्विक रखें और लहसुन-प्याज का इस्तेमाल न करें। पूजा के बाद सुहागिनों या कन्याओं को भोजन कराने के बाद ही स्वयं अन्न ग्रहण करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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