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पुत्रदा एकादशी व्रत के दिन जरूर करें इस कथा का पाठ, सुयोग्य संतान की होगी प्राप्ति

हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन व्रत रखने और नारायण की पूजा-अर्चना करने से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है। पुत्रदा एकादशी के दिन कथा का भी पाठ या श्रवण जरूर करें।

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

साल की दो एकादशियों को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। पौष और श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशियों को पुत्रदा एकादशी कहते हैं। सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। जिन दंपतियों की कई संतान नहीं वो पुत्रदा एकादशी का व्रत जरूर रखें। इसके अलावा जो व्यक्ति ऐश्वर्य, संतति, स्वर्ग, मोक्ष, सब कुछ पाना चाहता है उसे भी यह व्रत करना चाहिए। पुत्रदा एकादशी व्रत की पूजा कथा के बिना अधूरी मानी जाती है। तो अगर आप एकादशी का व्रत रखने जा रहे हैं तो पुत्रदा एकादशी की इस कथा का पाठ अवश्य करें।

पुत्रदा एकादशी व्रत की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय की बात है जब भद्रावती नगर में एक सुकेतु नाम का एक राजा राज्य करता था। उनकी पत्नी का नाम शैव्या था। वह राजा धर्म को बहुत मानने वाले और प्रजापालक थे। लेकिन इतना सब कुछ होने के बाबजूद भी उनकी कोई संतान नहीं थी। राजा को इस बात की चिंता सदैव सताती थी कि आगे उसके वंश का नाम कैसे चलेगा। इस कारण राजा सुकेतु यह सोच कर बहुत दुःखी रहते थे। एक दिन उन्होंने अपने आश्रम में कुछ ऋषि-मुनियों को देखा, जो वहां भजन कीर्तन करते हुए आ पहुंचे थे। राजा क्योंकि धर्मनिष्ठ थे और उनकी संतों में आस्था थी। इस कारण वह उनके पास गए और उन्हें प्रणाम किया। उन तेजस्वी और विद्वान ऋषियों ने राजा को देखते ही उसके दुःखी होने का अंदाजा लगा लिया था। 

राजा जब उनके पास पहुंचे तो उनसे अपनी सारी समस्या बताई। मुनियों ने राजा से कहा कि आप पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखिएगा। इस दिन व्रत रखने से आपको संतान सुख की प्राप्ति होगी। राजा ने मुनियों की बात मानी और पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा। व्रत के बाद राजा सुकेतु ने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और उन्होंने पुत्र प्राप्ति का वरदान मांगा। भगवान विष्णु ने राजा की प्रार्थना स्वीकार कर ली और कुछ समय बाद राजा की पत्नी के गर्भ से एक पुत्र हुआ। राजा बहुत खुश हुआ और उसने पुत्रदा एकादशी व्रत के महत्व को लोगों को बताया।

पुत्रदा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारम्भ - अगस्त 23, 2026 को 02:00 ए एम बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त - अगस्त 24, 2026 को 04:18 ए एम बजे
  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:51 ए एम से 05:36 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या- 05:13 ए एम से 06:21 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:16 पी एम से 01:06 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:47 पी एम से 03:38 पी एम

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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