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श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत करने से संतान सुख की होगी प्राप्ति, जानें किस मुहूर्त में पूजा करने से मिलेगा लाभ

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Aug 18, 2026 04:09 pm IST,  Updated : Aug 18, 2026 04:21 pm IST

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026- India TV Hindi
श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 Image Source : FILE IMAGE

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। हर माह में दो बार एकादशी का व्रत रखा जाता है एक कृष्ण और दूसरा शुक्ल पक्ष में। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। 24 एकादशियों में सावन माह में आने वाली श्रावण पुत्रदा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।  पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से संतान सुख की कामना पूरी होती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से संतान प्राप्ति के योग मजबूत होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसके साथ ही संतान के जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। तो आइए जानते हैं कि इस साल श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत कब किया जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

पुत्रदा एकादशी 2026 डेट

पंचांग के अनुसार, श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 23 अगस्त को 02:00 ए एम पर होगा। एकादशी तिथि का समापन 24 अगस्त को 4:18 ए एम बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को किया जाएगा।

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त 

श्रावण पुत्रदा एकादशी के दिन पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से सुबह 5 बजकर 36 मिनट पर होगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 16 मिनट पर आरंभ और समाप्त दोपहर 1 बजकर 6 मिनट पर होगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 47 मिनट से सुबह 3 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। 

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 पारण का समय

श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण 24 अगस्त  2026 को किया जाएगा। पारण के लिए शुभ समय दोपहर 1 बजकर 57 मिनट से दोपहर 4 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगा।

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक राजा था जिसकी कोई संतान नहीं थी। संतान के अभाव में वह अत्यंत दुखी रहता था। एक दिन वह वन में गया, जहां ऋषियों ने उसे श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। राजा ने विधिपूर्वक व्रत किया और भगवान विष्णु की कृपा से उसे योग्य संतान की प्राप्ति हुई।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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