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03 सितंबर 2026 का पंचांग: कल शीतला सप्तमी पर रवि योग और कृतिका नक्षत्र के शुभ संयोग, नोट करें शुभ मुहूर्त और राहुकाल टाइम

03 सितंबर 2026 का पंचांग: गुरुवार के दिन भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पड़ रही है। इसके अलावा कल शीतला सप्तमी भी मनाई जाएगी। जानिए 03 सितंबर 2026 का पंचांग और राहुकाल का समय।

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Image Source : INDIA TV 03 सितंबर 2026 शीतला सप्तमी का पंचांग
कल भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि और गुरुवार का दिन है। सप्तमी तिथि 03 सितंबर को देर रात 2 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा कल रात 12 बजकर 29 मिनट तक रवि योग रहेगा। वहीं, कल रात 12 बजकर 30 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा। इसके साथ कल 03 सितंबर को शीतला सप्तमी है, इस दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए गुरुवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
 
03 सितंबर 2026 का पंचांग
  • भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि - 03 सितंबर को देर रात 2 बजकर 26 मिनट तक
  • रवि योग- 03 सितंबर को रात 12 बजकर 29 मिनट तक
  • कृतिका नक्षत्र- 03 सितंबर को रात 12 बजकर 30 मिनट तक 
  • 03 सितंबर 2026 विशेष- शीतला सप्तमी
03 सितंबर 2026 शुभ समय
  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:30 ए एम से 05:15 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या- 04:52 ए एम से 06:00 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 11:55 ए एम से 12:46 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:27 पी एम से 03:18 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:41 पी एम से 07:03 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या- 10:12 पी एम से 11:43 पी एम
  • अमृत काल- 03:07 पी एम से 04:54 पी एम
राहुकाल का समय
  • दिल्ली- दोपहर 01:55 से दोपहर बाद 03:30 तक
  • मुंबई- दोपहर 02:11 से दोपहर बाद 03:45 तक
  • चंडीगढ़- दोपहर 01:57 से दोपहर बाद 03:33 तक
  • लखनऊ- दोपहर 01:40 से दोपहर बाद 03:15 तक
  • भोपाल- दोपहर 01:53 से दोपहर बाद 03:28 तक
  • कोलकाता- दोपहर 01:10 से दोपहर बाद 02:44 तक
  • अहमदाबाद- दोपहर 02:13 से दोपहर बाद 03:47 तक
  • चेन्नई- दोपहर 01:41 से दोपहर बाद 03:13 तक 
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय 
  • सूर्योदय- सुबह 06:00 बजे 
  • सूर्यास्त- शाम 06:41 बजे
योग और नक्षत्र
 
कल रवि योग और कृतिका नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। मान्यता है कि रवि योग में किया गया कार्य सफल होता है। सूर्य के प्रभाव वाला यह योग बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। सूर्य की ऊर्जा से भरपूर इस योग में किए गए कार्य को कोई बिगाड़ नहीं सकता। इस योग में सभी अनिष्ट शक्तियों को नष्ट करने की अद्भुत शक्ति मानी जाती है। अतः इस योग में जो भी कार्य किए जाएं, उनके सफल होने की मान्यता है। इसलिए रवि योग में किसी भी प्रकार के शुभ कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।
 
वहीं, कृतिका नक्षत्र कुल 27 नक्षत्रों में कृतिका तीसरा नक्षत्र है। इसका पहला चरण मेष राशि में, जबकि बाकी तीन चरण वृष राशि में आते हैं। लिहाजा मेष और वृष, दोनों राशियों पर कृतिका नक्षत्र का प्रभाव रहता है। कृतिका नक्षत्र के दौरान सूर्यदेव की उपासना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती हैं।
 
(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)