Ahoi Ashtami Puja Vidhi 2026: अहोई अष्टमी की पूजा कैसे करें? नोट कर लें सही विधि, मुहूर्त, व्रत कथा और नियम
अहोई अष्टमी का व्रत करने से संतान की आयु लंबी होती है और उनका जीवन खुशहाल रहता है। तो अगर आप भी अहोई अष्टमी का व्रत रख रही हैं तो यहां जानिए पूजा विधि मुहूर्त और नियम के बारे में।

प्रत्येक वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी मनाई जाती है। 5 नवंबर, 2023 को माताएं अपने बच्चों के सुखी जीवन, उनकी खुशहाली, लंबी आयु और उनके जीवन में धन-धान्य की बढ़ोतरी के साथ ही करियर में सफलता के लिए व्रत करती हैं। साथ ही संतान प्राप्ति के लिए भी अहोई अष्टमी का व्रत लाभदायक रहता है। 5 नवंबर को अहोई माता की पूजा की जाती है। पूरा दिन व्रत करने के बाद शाम के समय तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। कुछ लोग अपनी मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा को अर्घ्य देकर भी व्रत खोलते हैं। बता दें कि 5 नवंबर को रात चंद्रोदय का समय रात 11 बजकर 36 मिनट पर है।
अहोई अष्टमी पूजा विधि
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अहोई अष्टमी के दिन स्नान आदि के बाद, साफ-सुथरे कपड़े लें।
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इसके बाद व्रत का संकल्प लेते हुए कहें- संतान की लंबी आयु एवं सुखमय जीवन हेतु मैं अहोई माता का व्रत कर रही हूं। अहोई माता मेरी संतान को दीर्घायु, स्वस्थ एवं सुखी रखें।
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अब घर की उत्तर-पूर्व दिशा को अच्छे से साफ करके एक लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं।
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चौकी पर अहोई माता की तस्वीर रखें।
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कुछ लोग दीवार पर गेरु से भी अहोई माता का चित्र बनाते हैं। इस चित्र में अहोई माता, सूरज, तारे, बच्चे, पशु आदि के चित्र बने होते हैं।
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बहुत-सी महिलाएं चांदी की अहोई भी बनवाती हैं, जिसे चांदी की गोलियों के साथ पिरोकर पूजा के समय गले में पहना जाता है। इसे स्थानीय भाषा में स्याहु कहते हैं।
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चौकी की उत्तर दिशा में जमीन को गोबर से लीपकर, उस पर जल से भरा कलश रखें और उसमें थोड़े-से चावल के दाने डाल दें।
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अब कलश पर कलावा बांधिये और रोली का टीका लगाएं। फिर अहोई माता को भी रोली-चावल का टीका लगाएं।
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अहोई माता को आठ पूड़ियां या आठ मीठे पूए का भोग लगाएं।आठ की संख्या में होने के कारण इसे अठवारी भी कहते हैं।
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इसके साथ ही देवी मां के सामने चावल से भरी एक कटोरी, मूली और सिंघाड़े भी भी रखें।
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अब दीपक जलाकर देवी मां की आरती करें और फिर अहोई माता की कथा का पाठ करें।
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कथा सुनते समय अपने दाहिने हाथ में थोड़े-से चावल के दाने रखने चाहिए और कथा सम्पूर्ण होने के बाद उन चावल के दानों को अपनी साड़ी या चुनरी के पल्ले में गांठ लगाकर बांध लें।
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अब शाम के समय इन्हीं चावलों को लेकर कलश में रखे जल से अपनी मान्यता अनुसार तारों या चंद्रमा को अर्घ्य दें।
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बाकी पूजा में रखी सारी चीज़ों को, चावल से भरी कटोरी, मूली, सिंघाड़े, मीठे पूड़े या पूड़ी का प्रसाद आदि ब्राह्मण के घर दान कर दें।
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अहोई माता की तस्वीर के संदर्भ में ऐसी मान्यता है कि इसे दिवाली तक लगाए रखना चाहिए।
अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त 2026
- अष्टमी तिथि प्रारंभ - नवंबर 01, 2026 को 02:51 पी एम बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त - नवंबर 02, 2026 को 01:10 पी एम बजे
- अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त - 05:36 पी एम से 06:54 पी एम
अहोई अष्टमी चंद्रोदय और तारों को अर्घ्य देने का समय 2026
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तारों को देखने के लिये सांझ का समय - 06:00 पी एम
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अहोई अष्टमी के दिन चंद्रोदय समय - 11:40 पी एम
अहोई अष्टमी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार की बेटी ने दिवाली से पहले जंगल में मिट्टी खोदते समय अनजाने में स्याहू (साही) के बच्चे को खुरपी से घायल कर दिया था, जिससे उसकी मृत्यु हो गई थी। गुस्से में आकर स्याहू ने उसकी कोख बांधने का शाप दे दिया। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से विनती की कि वो उसकी जगह अपनी कोख बंधवा लें। ननंद की विनती पर सबसे छोटी भाभी ने खुद पर यह संकट ले लिया। साही के श्राप के कारण छोटी भाभी की जो भी संतान होती, वह सात दिन के भीतर मर जाती। दुखी होकर उसने एक पंडित जी से उपाय पूछा। पंडित जी के मार्गदर्शन पर उसने पूरी निष्ठा से सुरही गाय और बाद में साही की सेवा की। उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर साही ने उसे सातों पुत्रों और बहुओं का आशीर्वाद दिया। तभी से कार्तिक कृष्ण अष्टमी पर अहोई माता (देवी पार्वती) और स्याहू का पूजन कर संतान की लंबी उम्र और रक्षा के लिए यह व्रत रखा जाने लगा।
अहोई अष्टमी व्रत नियम
- इस दिन सुई-धागे का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। अहोई अष्टमी के दिन सिलाई-कढ़ाई करना वर्जित माना गया है।
- अहोई अष्टमी के दिन चाकू या किसी नुकीली चीज से फल-सब्जियां काटने से बचना चाहिए।
- इस दिन तामसिक चीजों से दूरी बनाकर रखें।
- गुस्से और वाद-विवाद से दूर रहें और बड़े-बुजुर्गों का अपमान न करें।
- शाम को आसमान में तारे या चंद्रमा को देखने के बाद अर्घ्य देकर ही जल ग्रहण करें।
- इस दिन सुई-धागे का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। अहोई अष्टमी के दिन सिलाई-कढ़ाई करना वर्जित माना गया है।
- अहोई अष्टमी के दिन चाकू या किसी नुकीली चीज से फल-सब्जियां काटने से बचना चाहिए।
- इस दिन तामसिक चीजों से दूरी बनाकर रखें।
- गुस्से और वाद-विवाद से दूर रहें और बड़े-बुजुर्गों का अपमान न करें।
- शाम को आसमान में तारे या चंद्रमा को देखने के बाद अर्घ्य देकर ही जल ग्रहण करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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